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भारत का वो राज्य जहां भारतीयों को जाना है मना, बिना 'वीजा' के किसी को भी नहीं मिलती एंट्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 July 2019, 13:10 IST

अपने ही देश के किसी राज्य में वीजा की जरूरत होती है. ऐसा सुनना अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सच है. हमारे देश में एक ऐसा राज्य है, जहां जाने के लिए आम नागरिकों को वीजा (इनर लाइन परमिट) की जरूरत होती है. हम जिस राज्य की बात कर रहे हैं, वह नागालैंड है, जहां बिना अनुमति के जाना मना है. यहां केवल स्थानीय लोग ही बिना किसी रोक-टोक के जा सकते हैं.

जम्मू-कश्मीर में भी पहले इनर लाइन परमिट लागू थी, लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा आंदोलन करने के जम्मू-कश्मीर में परमिट सिस्टम को खत्म कर दिया गया. लेकिन नागालैंड में यह नियम अबतक लागू है. आज भी ये मामला राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बना हुआ है.

भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्निनी उपाध्याय हाल ही में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. लोकसभा में बीते 23 जुलाई को दो सांसदों ने भी इनर-लाइन परमिट सिस्टम का मुद्दा उठाया था. इस मुद्दे को लेकर सरकार ने कहा, 'भारतीय नागरिकों को मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और दीमापुर को छोड़कर नगालैंड में प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है. फिलहाल दीमापुर के लिए इनर लाइन परमिट लागू करने को लेकर राज्य सरकार के प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श किया जा रहा है."

क्या है इनर लाइन परमिट?

भारत में फिलहाल सिर्फ नागालेंड में ही इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू है. बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन्स, 1873 के तहत एक सीमित अवधि के लिए किसी संरक्षित, प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल होने के लिए अनुमति देता है. इतना ही नहीं इस क्षेत्र में नौकरी या फिर किसी भी प्रकार के पर्यटन के लिए जाने के लिए भी अनुमति लेनी जरूरी होती है.

 

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इस क्षेत्र के बारे में बताया जाता है कि यहां आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार ने इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू किया था. ऐसा उन्होंने इसलिए किया था क्योंकि नागालैंड क्षेत्र में प्राकृतिक औषधी और जड़ी-बूटियों का प्रचुर भंडार था. जिसे ब्रिटिश सरकार ब्रिटिश भेजा करती थी. इन औषधियों पर किसी दूसरों की नजर न पड़े, इसके उन्होंने नागालैंड में इनर लाइन परमिट की शुरुआत की थी. ताकि इस इलाके से संपर्क करने के लिए लोगों को सरकार की अनुमति लेना पड़े. अब आजादी के बाद भी इधर इनर लाइन परमिट सिस्टम जारी रखा गया है.

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अब इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि नागा आदिवासियों की कला-संस्कृति, रहन-सहन, बोलचाल औरों से काफी अलग है. ऐसी स्थिति में इनके संरक्षण के लिए इनर लाइन परमिट होना जरूरी है. ताकि बाहरी लोग इधर की संस्कृति को प्रभावित न कर सकें.

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First published: 26 July 2019, 13:10 IST
 
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