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भारत का यह शहर नहीं मानता है अपने ही देश की सरकार को, न ही चलता है पैसा

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 July 2018, 17:07 IST

हमारे देश में ताजमहल के बाद भी कई और भी अजूबे हैंजिन्हें जानकर आप हैरान रह सकते हैंजो किसी इमारत की शक्ल में ना होकर किसी और रूप में भी हो सकता हैदरअसलभारत में एक ऐसा शहर है जो किसी अजूबा से कम नहीं हैक्योंकि इस शहर में ना भारत की सरकार चलती है और ना ही पैसाइस शहर में रहने वाले लोग किसी धर्म को भी नहीं मानते.

आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि ये शहर दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में स्थित हैइस शहर का नाम है ऑरोविलेइस शहर की स्थापना 1968 में मीरा अल्फाजों ने की थीऑरोविले नाम का ये शहर चेन्नई से महज 150 किलोमीटर दूर हैइस जगह को सिटी ऑफ डॉन यानी भोर का शहर भी कहा जाता हैइस शहर को बसाने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद रहा थावो था कि इस शहर में लोग जात-पातऊंच-नीच और भेदभाव से दूर रहेंयहां कोई भी इंसान आकर बस सकता है लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी गई.

शर्त सिर्फ इतनी सी है कि उसे एक सेवक के तौर पर यहां रहना होगायह एक तरीके की प्रयोगिक टाउनशिप है जो की विल्लुप्पुरम डिस्ट्रिक तमिलनाडु में स्थित हैमीरा अल्फाजों जिन्होंने इस शहर की स्थापना की वह श्री अरविंदो स्प्रिचुअल रिट्रीट में 29 मार्च 1914 को पुदुच्चेरी आई थीं.

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वह कुछ समय के लिए जापान चली गई थीलेकिन 1920 जब वह वापस आऊं तो 1924 में श्री अरविंदो स्प्रिचुअल संस्थान से जुड़ गईउसके बाद वह जनसेवा के कार्य करने लगींभारत में मीरा अल्फाजों को लोग 'मांकहकर पुकारने लगे थे.

1968 आते आते उन्होंने ऑरोविले की स्थापना कर दीजिसे यूनिवर्सल सिटी का नाम दिया गयाजहां कोई भी कही से भी आकर रह सकता है. 'ओरोविलेशब्द का मतलब एक ऐसी वैश्विक नगरी से हैजहां सभी देशों के स्त्री-पुरुष सभी जातियोंराजनीति तथा सभी राष्ट्रीयता से ऊपर उठकर शांति एवं प्रगतिशील सद्भावना की छांव में रह सकें.

ओरोविले का उद्देश्य मानवीय एकता की अनुभूति करना हैसाल 2015 तक इस शहर का आकार में बढ़ता चला गया और इसे कई जगह सराहा भी जाने लगाआज इस शहर में करीबन 50 देशों के लोग रहते हैंइस शहर की आबादी तकरीबन 24000 हैयहां पर एक भव्य मंदिर भी हैलेकिन ऑरोविले के इस मंदिर में किसी देवी या देवता की मूर्ति नहीं लगाई गई हैक्योंकि इस मंदिर में किसी धर्म से जुड़ी पूजा नहीं होती बल्कि यहां लोग सिर्फ योगा करने के लिए आते हैं.

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First published: 29 July 2018, 17:03 IST
 
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