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ये शख्स है असली स्पाइडरमैन, 10 हजार से ज्यादा बच्चों की बचा चुका है जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2018, 11:02 IST

हर इंसान की जिंदगी का कुछ ना कुछ मकसद होता है. कोई अपने लिए जीता है तो कोई दूसरों के लिए जीना पसंद करता है. लेकिन ऐसे कम ही लोग होंगे जो दूसरों के लिए जिंदा है या कुछ काम समाज की भलाई के लिए करते हैं. लेकिन अमेरिका का रहने वाले रिकी मीना शायद दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाने के लिए ही पैदा हुए हैं. क्योंंकि रिकी मीना स्पाइडर मैन की ड्रेस पहनकर बच्चों के अस्पतालों में घूमते हैं और उन्हें बीमारी से निजात दिलाने में अहम भूमिका अदा करते हैं.

रिकी मीना स्पाइ़डर मैन की ड्रेस में उन बीमार बच्चों से मुलाकात करते हैं जो अस्पताल में भर्ती हैं. वो उनसे स्पाइडर मैन की ड्रेस पहनकर मुलाकात करने जाते हैं. तो बीमार बच्चे भी उठकर खड़े हो जाते हैं. अस्पताल पहुंचकर वो बच्चों से ऐसे मिलने हैं जैसे बच्चों की हर ख्वाहिश पूरी हो गई हो. यही नहीं वो बच्चे के कहे अनुसार ही हर काम करते हैं.

वो अस्पताल में पहुंच कर बच्चों के साथ वीडियो गेम खेलते हैं, बच्चों का हाथ पकड़कर घंटों बैठे रहते हैं. उनमें ऐसा जादू है कि बच्चे सारे दुख, दर्द और परेशानी भूलकर उनके साथ खूब खेलते हैं. ऐसा कर रिकी ने अब तक गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 10 हजार से अधिक बच्चों की जान बचा चुके हैं.

रिकी मीना बताते हैं कि एक रात उनके सपने में उनकी दादी मां आईं थीं. जो उन्हें पुराने से प्रोजेक्टर पर एक वीडियो दिखा रही हैं. इस वीडियो में स्पाइडर मैन एक अस्पताल में है जहां ढेर सारे बीमार बच्चे हैं जोकि स्पाइडरमैन को देखकर खुश हो जाते हैं. वो बताते हैं कि मैंने सपने में अपनी दादी मां से पूछा कि यह वीडियो किस फिल्म का है तो उन्होंने बताया कि बेटा ये तुम हो और कल सुबह उठोगे तो इस काम को करोगे. तब से रिकी हर रोज स्पाइटर मैन की ड्रेस में अस्पताल-अस्पताल घूमते हैं और बच्चों को बीमारी से मुक्ति दिलाते हैं.

बता दें कि जब रिकी को सपना आया तो उनके पास न तो काम था और न ही जरूरतें पूरी करने का कोई जरिया. वो बताते हैं कि उन दिनों मेरे पास सिर्फ मेरे दोस्त का काउच था, जिस पर मैं रहता और सोता था. सपने को देखने के बाद रिकी ने इस पर काम करना शुरू किया. पहली बार ड्रेस बनवाने के लिए भी पैसे नहीं थे इसलिए कार बेच दी. पहले तो हॉस्पिटल का रिस्पॉन्स अच्छा नहीं था लेकिन जैसे ही बच्चों की तबियत में सुधार आने लगा तो अस्पताल उन्हें कॉल करके बुलाने लगे.

रिकी बताते हैं कि मैं इस दौरान हर किसी के पास नहीं पहुंच पाता था. एक दिन उनकी मुलाकात हर्ट ऑफ हीरो नामक एनजीओ से हुई. उनके साथ मिलकर रिकी ने काम करना शुरू किया. 4 साल से वह लगातार यही काम कर रहे हैं.

रिकी बताते हैं कि कई ऐसे बच्चों की मौत हो गई, जिनसे उनकी अच्छी दोस्ती हो गई थी. उन्होंने बताया कि एक बच्चे ने अपनी आखिरी सांसे तब ली थी जब वो मेरी गोद में था. उसके बाद मैं कई रातों तक सो नहीं पाया.

रिकी बताते हैं कि कई ऐसे बच्चों की मौत हो गई, जिनसे उनकी अच्छी दोस्ती हो गई थी. उन्होंने बताया कि एक बच्चे ने अपनी आखिरी सांसे तब ली थी जब वो मेरी गोद में था. उसके बाद मैं कई रातों तक सो नहीं पाया.

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First published: 12 July 2018, 11:02 IST
 
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