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देश में यहां पर है बिना नाम वाला रेलवे स्टेशन, हैरान करने वाली है वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2018, 13:18 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

किसी भी देश में रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड, गली, मौहल्ला या चौराहा सब के नाम होते हैं, लेकिन क्या कभी आपने बिना नाम वाले रेलवे स्टेशन के बारे में सुना है. नहीं तो आज हम आपको ऐसे ही रेलवे स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं. जो अपने ही देश में मौजूद है. जिसका कोई नाम ही नहीं है. इस बिना नाम वाले रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें भी रुकती हैं और यात्री चढ़ते-उतरते भी हैं. बावजूद इसके इस स्टेशन का आजतक कोई नाम नहीं रखा गया. क्योंकि रेलवे स्टेशन का नाम रखने को लेकर विवाद चल रहा है.

ये रेलवे स्टेशन झारखंड में मौजूद है. जहां रांची से टोरी जाने वाली कई ट्रेन रुकती है. ये स्टेशन रांची से लोहरदगा के ठीक बार पड़ता है. जो एक अनाम रेलवे स्टेशन है. यहां जैसे ही ट्रेन रुकती है. दर्जनों यात्री गाड़ी से उतरने लगते हैं. इस स्टेशन पर ट्रेन सिर्फ एक मिनट के लिए रुकती है.

बीबीसी हिंदी वेबसाइट की खबर के मुताबिक ट्रेन से उतरने वाले ज्यादातर लोग कमले बड़कीचांपी, छोटकीचांपी, सुकुमार आदि गांवों के रहने वाले होते हैं. रांची से ट्रेन पकड़ने से पहले इन लोगों को बड़कीचांपी का टिकट लेना पड़ता है. इस तरह देखा जाए तो इस रेलवे स्टेशन का नाम बड़कीचांपी भी माना जा सकता है. बावजूद इसके इस स्टेशन पर यात्री शेड या किसी अन्य स्थान पर स्टेशन का नाम नहीं है.

 

प्रतीकात्मक फोटो

बीबीसी की खबर के मुताबिक रेलवे स्टेशन का नाम ना होने की वजह दो गांवों का विवाद है. इसलिए इस स्टेशन कोई नाम नहीं रखा गया. कमले गांव के लोगों का कहना है रेलवे स्टेशन का नाम उनके गांव 'कमले’ के नाम पर रखा जाए, क्योंकि गांव के लोगों ने स्टेशन के निर्माण के लिए जमीन दी है. लेकिन स्टेशन का नाम बड़कीचांपी रख दिया गया. गांव के लोगों के विरोध की वजह से यहां स्टेशन का नाम नहीं रखा गया.

बता दें कि रेलवे स्टेशन के नाम का ये विवाद सात साल पुराना है. लोहरदगा रेलवे स्टेशन से टोरी की तरफ 14 किलोमीटर के बाद बने इस स्टेशन पर नवंबर 2011 में पहली बार ट्रेन चली थी. तब स्टेशन का नाम लिखने की कोशिश की गई लेकिन ग्रामीणों के विरोध की वजह से यहां स्टेशन का नाम नहीं लिखा गया.

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First published: 7 July 2018, 13:18 IST
 
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