Home » अजब गजब » This village of Rajasthan does not have any two storey house know the reason of curse which given 700 years ago
 

700 साल से श्रापित है ये गांव, यहां आज भी कोई नहीं बनाता दो मंजिला मकान

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 January 2019, 10:14 IST

हमारे देश में ऐसे कई स्थान हैं जिन्हें श्रापित माना जाता है. इसी श्राप की वजह से आज भी यहां कुछ अनहोनी होती रहती हैं. वैसे राजस्थान में तमाम ऐसे स्थान हैं जिनके बारे में अलग-अलग बातें कही जाती रही हैं. चूरू जिले के सरदारशहर तहसील के उडसर गांव के बारे में भी कुछ ऐसा ही कहा जाता है. इस गांव में कोई भी घर दो मंजिला नहीं है. इसके पीछे की वजह इस गांव का श्रापित होना बताया जाता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये गांव पिछले 700 सालों से श्राप झेल रही है इसीलिए इस गांव में आजतक किसी ने दो मंजिल इमारत बनाने की हिम्मत नहीं जुटाई. बताया जाता है कि 700 साल पहले इस गांव भोमिया नाम का एक व्यक्ति रहता था. भोमिया गोभक्त था और उसके पास के ही गांव आसपालसर में उनकी ससुराल थी.

एक बार भोमिया के गांव में लुटेरे आ गये और वो गायों को चुरा कर ले जाने लगे. इस पर भोमिया लुटेरों से भिड़ गया. इस दौरान भोमिया बुरी तरह से जख्मी हो गया. उसके बाद भोमिया दौड़ते-दौड़ते अपने ससुराल पहुंच गया और वहां दूसरी मंजिल पर जाकर छिप गया.

जब लुटेरे वहां पहुंचे और ससुराल वालों से मारपीट करने लगे और भोमिया के बारे में जानकारी मांगी. इस पर ससुराल वालों ने भोमिया के दूसरे मंजिल पर छिपे होने की बात लुटेरों को बता दी. जिसके बाद लुटेरों ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया, लेकिन भोमिया अपना सिर हाथ में लिए हुए उनसे लड़ते रहा और और लड़ते-लड़ते अपने गांव की सीमा के पास पहुंच गया.

इस दौरान भोमिया का लड़का भी युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गया. बाद में भोमिया का धड़ उड्सर गांव में आकर गिर गया. जहां भोमिया का मन्दिर बनाया गया. इसी दौरान भोमिया की पत्नी ने गांव में श्राप दिया कि आज से घर पर कोई दूसरी मंजिल नही बनाएगा और खुद सती हो गईं.

गांव के लोगों का मानना है कि ये श्राप इसलिए दिया गया ताकि आगे से अगर घर में कोई मंजिल नहीं होगी तो किसी पर वो मुसीबत नहीं आएगी जो भोमिया पर आई थी. गांव के लोगों ने बताया कि उस दिन के बाद जिस किसी ने दो मंजिल मकान बनाया उस घर की औरत मर गई और एक का तो पूरा परिवार ही खत्म हो गया.

इसी डर से लोग आज भी अपने घरों पर दूसरी मंजिल यानि मालिया नहीं बनाते हैं. इस गांव में शिक्षित लोग भी हैं लेकिन वो भी इस परंपरा को मानते हैं. लोगों का कहना है कि वे लोग इसे अंधविश्वास नहीं मानते हैं. ये वर्षों से चली आ रही परम्परा है, जिसे वो लोग तोड़ना नहीं चाहते.

भोमिया का मंदिर आज भी इस गांव में मौजूद है. गांव के लोग इस मंदिर में गहरी आस्था रखते हैं. हर दिन इस मंदिर में पूजा की जाती है. इसी तरह गांव से 2 किलोमीटर दूर रेतीली धोरों (माटी के टिल्लो) के बीच माता सती का मंदिर है. माता सती के मंदिर में बांस की झाड़ू चढ़ाई जाती है. इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.

ये भी पढ़ें- 1857 की क्रांति के इस योद्धा के मिले अवशेष, 161 साल से गुमनाम था ये देशभक्त

First published: 11 January 2019, 10:14 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी