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दो दिल एक जानः अब आपके सीने के साथ पेट में भी होगी धड़कन

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 December 2017, 15:50 IST

आपको जानकर हैरानी होगी कि अब इंसान का दिल शरीर उसके सीने के साथ शरीर के एक और हिस्से में भी धड़केगा. जी हां अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक एक्सक्लूसिव ख़बर के मुताबिक किसी इंसान के सीने के अलावा उसके पेट में एक और दिल ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा.

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में डॉक्टरों ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में ये दावा किया. इस खबर के मुताबिक दिल के कमजोर लोगों को इसका सीधा फायदा होगा. चेन्नई के हार्ट सर्जन ने दो कुत्तों के पेट में एक अतिरिक्त दिल का सफलतापूर्वक ट्रासप्लांट किया है.

फ्रंटियर लाइफलाइन टीम ने अब इंसानों के पेट में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए स्टेट ट्रांसप्लांट अथॉरिटी से इजाजत मांगी है. इनका दावा है कि जो मरीज पूरी तरह हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए फिट नहीं होते उनके पेट में इसे ट्रांसप्लांट किया जा सकता है.

मंगलवार 11 दिसंबर 2017 को इन डॉक्टरों ने अपने प्रयोग को अन्य हार्ट सर्जन के सामने पेश किया. डॉक्टरों की टीम ने कहा कि वे इस तकनीक का व्यापक तौर पर ह्यूमन ट्रायल करके ये देखना चाहते हैं कि यह कितनी सफल होती है? ट्रांसटैन के मेंबर सेक्रटरी डॉक्टर पी बालाजी ने बताया कि वो इसकी सिफारिश तमिलनाडु सरकार को भेजेंगे.

फ्रंटियर लाइफलाइन के चीफ डॉक्टर केएम चेरियन ने कहा, "अगर किसी दानकर्ता के हृदय की पंपिंग क्षमता 30 प्रतिशत से कम होगी तो सर्जन उसका इस्तेमाल करने से मना कर देंगे. वहीं, इसके विपरीत, हार्ट फेल होने वाले कई मरीज हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं करा सकते क्योंकि इसमें मल्टी-ऑर्गन फेलियर और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं."

डॉक्टर केएम चेरियन ने आगे बताया कि ऐसे मरीजों (हार्ट फेल वाले) के कमजोर दिल को ब्लड पंप करने के लिए लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस की जरूरत होगी जो एक मैकेनिकल पंप होता है, जिसे मरीज की छाती में लगाया जाता है. इस मशीन की कीमत 1 करोड़ रुपये तक है.

डॉक्टर चेरियन ने कहा, "मरीजों को ऐसा दिल देना जो मामूली रूप से काम कर रहा है, के बजाय इस तकनीक के इस्तेमाल से जिंदगी और पैसा दोनों बचाए जा सकते हैं. डॉक्टर इसे 'बायो लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस' कहते हैं."

गौरतलब है कि इसी साल कोयंबटूर के डॉक्टरों ने हेट्रोट्रॉपिक हार्ट ट्रांसप्लांट किया था. इसमें डॉक्टरों ने मरीज की छाती में एक छोटा अतिरिक्ट दिल लगाया था. डॉक्टरों का कहना है कि पेट में हार्ट लगाने के लिए मरीज की छाती को काटकर नहीं खोलना पड़ता जिससे सर्जिकल रिस्क भी कई गुना कम हो जाता है. 

दरअसल जानवरों पर प्रयोग करते हुए डॉक्टरों ने डोनर हार्ट को दो कुत्तों के पेट के हिस्से में फिट किया. डॉक्टर मधु शंकर ने बताया, "हमने कुत्तों के पेट में हार्ट ट्रासप्लांट करके देखा कि नया हार्ट उनके अपने दिल को काम करने में मदद कर रहा था. हालांकि इनमें से एक कुत्ते की मौत पहले ही दिन हो गई क्योंकि उसके पास डोनर ब्लड की कमी थी, जबकि दूसरा कुत्ता अगले 48 घंटे तक जिंदा रहा. इस कुत्ते ने टहलने के अलावा खाना भी खाया."

डॉक्टर शंकर ने बताया कि इसके बाद दोनों कुत्तों के पोस्टमॉर्टम में ये बात सामने आई कि दोनों कुत्तों के दिल की मांसपेशियां काम करने योग्य थीं.  हॉस्पिटल अब एथिक्स कमिटी से इस तकनीक के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत चाहता है.

First published: 14 December 2017, 15:50 IST
 
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