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इस गुस्ताखी के लिए गधों को हवालात में बिताने पड़े चार दिन

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 November 2017, 14:21 IST

यूपी में गधे अक्सर चर्चा में रहते हैं. यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान गधे बहस का एक बड़ा मुद्दा बने थे. एक बार फिर यूपी में चल रहे निकाय चुनाव में गधे एक बार फिर चर्चा में है. यूपी पुलिस ने इस बार गधों को भी गुस्ताखी की ऐसी सज़ा दी जिसका जिक्र पूरे यूपी के साथ साथ पूरे देश में है. 

यूपी के उरई जिले में गधों को जेल परिसर में लगे पेड़-पौधों को खाने की वजह से जेल जाना पड़ा. यूपी पुलिस ने इन्हें इस गुस्ताखी के लिए चार दिन हवालात में रखा. एक स्थानीय भाजपा नेता के दखल के बाद जाकर पुलिस ने इन गधों को चार दिन बाद इनके मालिक कमलेश को सौंपा. 

इस मामले पर उरई जिला जेल के हेड कॉन्स्टेबल आरके मिश्रा ने कहा, "इन गधों ने जेल के बाहर रखे कई महंगे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया था. इन गधों के मालिक को चेतावनी दी गई थी कि वह इन्हें खुले में ना छोड़े लेकिन जब उसने ये बात नहीं सुनी तो हम इन्हें पकड़कर थाने ले आए."

वहीं, गधों के मालिक कमलेश ने भाजपा नेता का नाम बताने से इनकार कर दिया जिसकी मदद से उसे उसके गधे मिले. गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में अपने चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने रायबरेली में एक सभा के दौरान गधों के प्रचार को लेकर पीएम मोदी को निशाने पर लिया था. 

अखिलेश ने गुजरात सरकार के पर्यटन विभाग के टीवी विज्ञापन की तरफ इशारा करते हुए कहा था, "एक गधे का विज्ञापन आता है. मैं सदी के महानायक से अपील करता हूं कि वह गुजरात के गधों का प्रचार न करें." उनके इस बयान पर पीएम मोदी ने अपने अंदाज में कटाक्ष करते कहा था कि अगर दिल-दिमाग साफ हो तो किसी से भी प्रेरणा ली जा सकती है.

मोदी ने अखिलेश को जवाब देते हुए कहा था कि गधा अपने मालिक का वफादार होता है. कम खर्चे में पूरा काम करता है. गधा कितना भी बीमार हो, कितना भी थका हुआ हो, मालिक अगर काम लेता है तो बीमारी के बावजूद वह काम पूरा करता है.

First published: 28 November 2017, 14:21 IST
 
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