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किसान के नेत्रविहीन बेटे ने IAS बनकर परिवार का सपना किया साकार, बंद आंखों से मिली सफलता

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2019, 12:11 IST

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक नेत्रहीन युवा ने यूपीएससी में 714वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया. लगातार तीसरे प्रयास में उनको ये सफलता हासिल हुई है. नेत्रहीन सतेंद्र सिंह ने ये साबित कर दिया कि भले ही उनके आंखों में रोशनी की कमी है, लेकिन उनके अंदर ज्ञान की रोशनी का सागर है. आईएएस बनकर सतेंद्र दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं. सतेंद्र इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर का काम करते थे.

सतेंद्र के माता पिता किसान है. बेटे की कामयाबी की खबर सुनते ही सतेंद्र के बुजुर्ग माता-पिता फफक पड़े. सतेंद्र के पिता जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर गांव रजबपुर के पास मजरा हुमायूं नगर में किसान है. परिवार में पत्नी राजेंद्री देवी और दो बेटे मोहित कुमार व सतेंद्र सिंह हैं.

बता दें कि सतेंद्र के आंखो की रोशनी 26 साल चली गई थी. आंखों की रोशनी जाने के बाद उनके माता-पिता की से भी रोशनी चली गई थी. सतेंद्र के पिता विक्रम सिंह ने उन्हें एक संस्था के जरिये दिल्ली पढ़ने के लिए भेजा थी. वहां सतेंद्र ने 12वीं तक की पढ़ाई हुई.

इसके बाद उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. वहीं, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से उन्होंने राजनीतिशास्त्र पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. वहीं, पर पीएचडी करने के बाद सतेंद्र तीन साल पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए.

सतेंद्र ने पढ़ाई करने के लिए स्क्रीन रीडिंग सिस्टम का प्रयोग किया. उन्होंने मोबाइल और कंप्यूटर से 'टॉक बैक' एप्लीकेशन के जरिये सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की. सिविल सर्विस का जब परिणाम आया, तो उनके दोस्तों ने ये खुशखबरी उन्हें दी.

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First published: 8 April 2019, 12:11 IST
 
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