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महंगाई ने इस देश के लोगों का निकाला दिवाला, एक लग्जरी कार की कीमत में मिल रहा है बर्गर

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 December 2018, 12:19 IST

हमारे देश में प्याज, टमाटर और सब्जियों की कीमत जब 50 रुपये से ऊपर हो जाती है तो इसे महंगाई की मार मान लिया जाता है. फ्रांस में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग सड़कों पर उतर आए हैं. कई बार हमारे देश में भी ऐसा ही होता है जब तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग सरकार का विरोध करने लगते हैं.

लेकिन दुनियाभर में कई ऐसे देश हैं जहां महंगाई इतनी हो गई है कि वहां के मुकाबले अपने देश की महंगाई में शून्य लगने लगेगी. जहां लोग खाने-पीने की थोड़ी सी चीजों के लिए सौ-दो सौ रुपये नहीं बल्कि कई लाख रुपये खर्च करने के मजबूूर हैदरअसल, दक्षिणी अमेरिकी में बसा वेनेजुएला देश की साल से इस तरह की परेशानी से गुजर रहा है.

जहां महंगाई का आलम ये है कि दुकानदार नोटों को गिनकर नहीं बल्कि तोलकर ले रहे हैं. जिसकी वजह से जरूरी सामान सहित तमाम वस्तुओं की कीमतों में उछाल. वेनेजुएला में महंगाई दर 10 लाख फीसदी तक बढ़ चुकी है, इसीलिए यहां रोजमर्रा की चीजों के दाम कई हजार गुना बढ़ गए हैं. कभी दक्षिण अमेरिका के सबसे अमीर देशों में से एक रहे वेनेजुएला की इस हालत के पीछे गलत सामाजिक प्रयोग जिम्मेदार रहे है.

वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था अब इतने बुरे दौर में पहुंच चुकी है कि हर दिन पांच हजार लोग दूसरे देशों की तरफ पलायन कर रहे हैं. यहां के पेशेवर अब अस्पताल और विश्वविद्यालयों को छोड़कर जा रहे हैं. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनुजुएला में वकालत की पढ़ाई कर चुके लोग अब मजदूरी या सेक्स वर्कर के तौर पर काम करने के लिए मजबूर हैं. वहीं बताया जा रहा है कि ब्यूरोक्रेट स्तर के अधिकारी घरों में काम कर रहे हैं.

वेनेजुएला संकट की वजह से उसके पड़ोसी देश त्रिनिदाद और टोबैगो के सामने मुश्किलें पैदा हो गई हैं. क्योंकि सबसे अधिक शरणार्थी इन्हीं दो देशों में शरण लेने के लिए पहुंच रहे हैं. हालांकि इन दोनों देशों की स्थिति भी ऐसी नहीं कि ये वेनेजुएला के लोगों को अपने देश में शरण दे सकें. इस वजह से सीमा पर मानव तस्करी की शुरुआत भी हो चुकी है.

बता दें कि 1950 से 1980 के दशक तक वेनेजुएला आर्थिक रूप से सशक्त देश रहा हैं. यहां तेल के कई भंडार मौजूद हैं. इसीलिए आज भी कई बार सरकार पेट्रोल और डीजल को फ्री कर देती है. यानि पेट्रोल और डीजल कई बार यहां लोगों को मुफ्त में दे दिया जाता है. साल 1999 में ह्यगो शावेज देश के राष्ट्रपति बने तो समाजवाद की नीति ने कई व्यवसायों को तबाह कर दिया. कुछ व्यवसायों को राष्ट्रीयकृत कर दिया गया. राज्य द्वारा संचालित तेल उद्योग से हजारों श्रमिकों को हटा दिया गया.

उसके बाद 2013 ह्यूगो शावेज के करीबी बस ड्राइवर और फिर यूनियन लीडर निकोलस मादुरो देश के राष्ट्रपति बने. जिनके आने के बाद देश की अर्थव्यस्था की हालत और खराब हो गई. अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने वेनेजुएला से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा रखा. जिस कारण वहां की तेल बिक्री न के बराबर हो गई है. अब यहां खाने पीने का सामना लेने के लिए लोग स्थानीय मुद्रा वोलीवर को पर्स में नहीं बल्कि बोरों में भरकर ले जाते हैं.

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First published: 4 December 2018, 12:12 IST
 
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