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जब एक बाल्टी के लिए दो देशों में हुआ था भीषण युद्ध, दो हजार से अधिक लोगों की गई थी जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 March 2020, 11:41 IST

युद्ध होने के पीछे कई अंतहीन कारण हो सकते है लेकिन इतिहास में पीछे जाए तो युद्ध होने के मुख्य कारण अपने आप को बड़ा साबित करना, किसी से बदला लेना या फिर किसी राज्य से बदला लेना. हालांकि अगर हम  695 साल पीछे जाए तो हमें एक ऐसे युद्ध की जानकारी दस्तावेजों में मिलती है जो एक बाल्टी के लिए लड़ा गया था और जिसमें दो हजार से अधिक लोगों की जान गई थी. आपको यह सुनकर हैरानी होगी लेकिन यह सच्चाई है.

दरअसल, 11वीं शताब्दी के दौरान रोमन सम्राट फ्रेडरिक बारबरोसा ने इटली पर हमला कर दिया. फ्रेडरिक  का मानना था कि भगवान ने उसे धरती पर अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है ना कि पोप को लेकिन ईरान के लोग इसको मानते नहीं थे. पोप के समर्थक ग्वेल्फ कहा गया था और फ्रेडरिक के समर्थक गिबिलाइंज कहलाए थे. उस दौरान यूरोप पर कब्जा को लेकर संघर्ष करते रहे. वहीं बोलोग्ना और मोडेना के बीच लडा़ई का कारण भी यही था. बोलोग्ना के लोग पोप को मानते थे यानि वो ग्वेल्फ गुट के थे जबकि फ्रेडरिक को मामने वाले बारबरोसा गुट में मोडेना के लोग थे.

बोलोग्ना और मोडेना के लोग साल 1296 में एक युद्ध लड़ चुके थे. ऐसे में दोनों राज्यों के बीच तनाव काफी हमेशा रहता था. 13वीं शताब्दी के दौरान मोडेना के कुछ सैनिक बोलोगना में घुस गए और वहां से शहर के बीचोबीच में रखी एक बाल्टी उठा लाए. बोलोगना और मोडेना के लोग हमेशा एक दूसरे से लड़ते रहते और एक दूसरे के राज्य में घुसकर सामाना लूटते थे. कहा जाता है कि बोलोगना के सैनिक  मोडेना से जो लूटपाट करके लाए थे उसमें से कीमती चीजों को वो बाल्टी में रखते थे और यह बाल्टी शहर के बीचो-बीच रहती थी. 

मोडेना के सैनिक जब बाल्टी ले गए तो बोलोगना ने इसे अपना अपमान समझा. बोलोगना के सैनिकों ने मोडेना के सैनिकों से बाल्टी लौटाने की मांग की लेकिन मोडेना ने उनकी मांग नहीं मानी. इसके बाद बोलोगना ने मोडेना के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया.

बोलोगना की सेना मोडेना की सेना में काफी बड़ी थी. बोलोगना की सेना में 32000 सैनिक थे जिसमें 2,000 घुड़सवार सैनिक थे. दूसरी तरफ  मोडेना की सेना में मात्र सात हजार सैनिक थे. संख्या में कम होने के बावजूद मोडेना ने बोलोगना को हरा दिया. इस लाड़ाई में करीब 2000 हजार सैनिकों की जान गई थी.

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First published: 16 March 2020, 11:13 IST
 
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