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कार-बाइक के टायर्स क्यों नहीं होते कलरफुल? जानकर हिल जाएगा आपका दिमाग

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 March 2019, 12:10 IST

कार-बाइक में कितने भी अलग और खास फीचर आ जाएं, लेकिन टायर के कलर में कभी बदलाव नहीं होता. आपके वाहन का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट टायर ही होता है, फिर भी इसके कलर में आज तक कोई बदलाव नहीं देखा होगा. बिना टायर के गाड़ी नहीं होती. गाड़ियों के इतने महत्वपूर्ण पार्ट के कलर का कभी बदलाव नहीं होता. चलिए जानते हैं इसके पीछे का कारण-

वाहन बनाते समय टायर का रंग बदला जाता है. शुरुआत में ये स्लेटी रंग का होता है, जो बाद में काला हो जाता है. टायर बनाने की इस प्रक्रिया को वल्कनाइजेशन कहा जाता है. टायर बनाने के लिए इसमें काले रंग का कार्बन मिलाया जाता है, इस कार्बन को इसलिए मिलाया जाता है ताकि टायर जल्दी ना घिसे.

यदि आप सादा रबर का टायर इस्तेमाल करेंगे, तो आपका वाहन मुश्किल से 10 हज़ार किलोमीटर चल सकता है. इसलिए टायर को मजबूत करने के लिए इसमें कार्बन मिलाया जाता है. कार्बन युक्त टायर 1 लाख किलोमीटर या फिर उससे अधिक चल सकता है. टायर को लंबे समय तक चलाने के लिए इसमें काले रंग का कार्बन और सल्फर भी मिलाया जाता है.

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काले कार्बन की कई कैटेगरी होती है. इनकी इस श्रेणी से निर्भर करता है कि टायर का रबर कितना सख्त होगा और कितना मुलायम और इसी अनुसार टायर बनाने के लिए कार्बन का इस्तेमाल किया जाता है. मुलायम रबर के टायर्स की पकड़ मजबूत होती है, लेकिन ऐसे टायर जल्दी घिस जाते हैं.

वहीं, सख़्त टायर जल्दी नहीं घिसते और ज्यादा दिनों तक चलते हैं. टायर्स बनाते समय इसमें सल्फर भी मिलाया जाता है. कार्बन और सल्फर मिलकर अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचाते हैं.

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First published: 29 March 2019, 12:10 IST
 
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