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यह है दुनिया का सबसे खतरनाक जहर, एक ग्राम ही ले सकता है हजारों लोगों की जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2020, 21:09 IST

दुनिया में सबसे खतरनाक जहर कौन सा है, इसके सवाल के जवाब में शायद आप कहें साइनाइड. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पोलोनियम-210 साइनाइड से भी एक खतरनाक जगह है और इसका सिर्फ एक ग्राम हजारों लोगों को मौत की नींद सुला सकता है.

पोलोनियम-210 एक रेडियोएक्टिव तत्व है और यङ पोलोनियम का आइसोटोप है. पोलोनियम-210 से निकलने वाला रेडिएशन इंसानी शरीर के अंदरूनी अंगों, डीएनए और इंसान के इम्यून सिस्टम को भी तेजी से तबाह कर सकती है. मैरी क्यूरी ने 1898 में पोलोनियम-210 की खोज की थी.

मैरी क्यूरी भौतिकी और रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली वैज्ञानिक थी. हालांकि, शुरूआत में पोलोनियम का नाम रेडियम एफ रखा गया बाद में इसका नाम पोलोनियम रखा गया.


पोलोनियम-210 कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बार से लगा सकते हैं कि अगर नमक के छोटे कण जितना भी इंसान में चला जाए तो उस व्यक्ति की मौत पक्की है. अगर किसी व्यक्ति के शरीर में पोलोनियम पहुंच जाए तो इसकी मौजूदगी का पता लगाना काफी मुश्किल होता है.

अगर किसी व्यक्ति के शरीर में पोलोनियम पहुंच जाए तो भी व्यक्ति के बाल गिरने लगते हैं लेकिन इसके अलावा कोई खास लक्षण सामने नहीं आते और बालों के गिरने से इंसान आमतौर पर यह कभी नहीं सोचता कि ऐसा पोलोनियम की वजह से ऐसा हो रहा है.

पोलोनियम-210 मशीनों के पकड़ में बहुत आसानी से नहीं आता इसीलिए इसकि तस्करी बहुत आसान मानी जाती है. पोलोनियम-210 से सिर्फ अल्फा कण निकलते हैं जो कागज की एक शीट को भी पार नहीं कर पाते.

बता दें, कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में इसी पोलोनियम-210 के इस्तेमाल की बात कही जाती है. इतना ही नहीं फिलिस्तीन के पूर्व नेता यासिर अराफात और केजीबी के एक अधिकारी अलेक्जेंडर लिटनिवेनको की जान भी इसी पोलोनियम-210 के कारण गई थी.

वहीं पोलोनियम की खोज करने वाली मैरी क्यूरी की बेटी ईरीन ज्यूलियट क्यूरी का निधन पर भी इसी पोलोनियम के कारण हुई थी. ज्यूलियट क्यूरी ने गलती से इसका एक कण अपने मुंह में ले लिया था.

किसी व्यक्ति की मौत पोलोनियम से हुई हैं इसका पता लगाया जा सकता है. पोलोनियम किसी इंसान को अपना शिकार बनाने से पहले जिन चीजों से होकर गुजरता है उन पर रेडियोधर्मी निशान छोड़ देता है.

पोलोनियम हमारे वायुमंडल और मिट्टी में पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा काफी कम है. पोलोनियम का उत्पादन न्यूक्लियर रिऐक्टर में किया जाता है. बिसमथ-209 पर न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है तब पोलोनियम बनता है. पोलोनियम इतना खतरनाक है इसीलिए इसका उत्पादन 100 ग्राम ही होता है और उसमें भी रूस में सबसे अधिक इसका उत्पादन होता है.

जब एक तरबूज के कारण हुआ था युद्ध, हजारों सैनिकों की गई थी जान

First published: 10 June 2020, 20:57 IST
 
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