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यहां बनाई गई थी दुनिया की पहली मिसाइल फैक्ट्री, ये जगह अब हो गई है वीरान

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 December 2019, 15:16 IST

World's first missile factory : आज दुनिया के लगभग सभी देशों के पास अपनी-अपनी मिसाइलें (Missiles) और रॉकेट (Rocket) हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब किसी भी देश के पास न तो मिसाइल थी और ना ही कोई रॉकेट. लेकिन अब समय बदल गया है दुनिया के हर देश ने अपनी सीमाओं (Borders) की रक्षा और दुश्मन को मात देने के लिए मिसाइलें विकसित कर रखी हैं. ये मिसाइलें कई सौ किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद (Destroyed) कर देती हैं. अब बात आती है कि दुनिया के किस देश ने सबसे पहले मिसाइल बनाना शुरु किया था.

दरअसल, जर्मनी ने दुनिया में सबसे पहले युद्ध में मिसाइलों का इस्तेमाल करने के बारे में विचार किया था. हालांकि इस मामले में रूस और अमेरिका आगे निकल गए. लेकिन मिसाइलों की शुरुआत जर्मनी में सबसे पहले हुई थी. बाद में वहीं के वैज्ञानिकों ने रूस और अमेरिका में मिसाइलों के निर्माण में अहम भूमिका निभाई. जर्मनी ने कभी भी युद्ध में मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं किया.

हालांकि जर्मनी ने दुनिया में पहली बार मिसाइल का निर्माण किया था. दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने एक गांव मिसाइल फैक्ट्री के तौर पर विकसित किया गया था. इस गांव का नाम है, पेनमुंडे रखा गया. ये गांव जर्मनी के यूसडम द्वीप में पेन नदी के मुहाने पर बसा है. बता दें कि पेन नदी, यहां पर आकर बाल्टिक सागर में गिरती है. यूसडम द्वीप यूं तो अपने शानदार बीच और मछली से बने सैंडविच के लिए मशहूर है. 1936 से 1945 के बीच इस द्वीप के पेनमुंडे गांव को नाजी सरकार ने अपने बेहद खुफिया मिशन का अड्डा बनाया था.

साल 1935 में जर्मन इंजीनियर वर्नहर वॉन ब्रॉन ने पेनमुंडे गांव को अपने मिसाइल के कारखाने के लिए चुना था. इसके आसपास का चार सौ किलोमीटर का इलाका सुनसान था. ब्रॉन ने ये सोचा कि ये जगह उनके रॉकेट के परीक्षण के लिए बिल्कुल सही रहेगी. सरकार से इजाजत मिलने के बाद यहां मिसाइल का कारखाना और टेस्टिंग रेंज स्थापित करने का काम बड़ी तेजी से हुआ. उसके बाद करीब 12 हजार लोगों ने कड़ी मेहनत कर दुनिया की पहली क्रूज मिसाइल बनाने की फैक्ट्री और टेस्टिंग रेंज को तैयार किया.

बता दें कि ये फैक्ट्री करीब 25 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली थी. इस गांव में ही रॉकेट तकनीक की बुनियाद रखी गई. जिसकी मदद से आगे चलकर इंसान ने अंतरिक्ष का सफर शुरू किया. हालांकि आज पेनमुंडे गांव एक उजाड़ जगह बन गई है. इस इमारत के नाम पर लाल रंग का एक पॉवर स्टेशन बचा है जिसमें पेनमुंडे हिस्टोरिकल टेक्निकल म्यूजियम स्थापित किया गया है. पूरे इलाके में रॉकेट के टुकड़े, पतवार, इंजन और दूसरे यंत्र बिखरे पड़े हैं.

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First published: 24 December 2019, 15:12 IST
 
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