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इस रेगिस्तान में हैं पैरों के अनोखे निशान, कोई नहीं जान पाया इनका रहस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 December 2019, 20:13 IST

Worlds oldest desert Namib : भगवान या किसी देवी देवता को किसी ने नहीं देखा,लेकिन लोग उनके मौजूदगी के बारे में मानते हैं. तमाम कहावतों में भी इस बात का जिक्र आता है कि देवताओं के पैरों के निशान भी हैं. वहीं कुछ लोग इसके बारे में परियों के नाचने की बातें भी करते हैं. वहीं दूसरे ग्रह से आए प्राणी एलियंस यानी यूएफओ के बारे में कहा जाता है लेकिन किसी का भी रहस्य पूरी तरह से उजागर नहीं हुआ है. ऐसा ही अफ्रीका के नामीब रेगिस्तान में मौजूद लाखों गोलाकार आकृतियों के बारे में कहा जाता है कि ये भगवान के पैरों के निशान है.

दरअसल, दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के अटलांटिक तट से लगा नामीब रेगिस्तान धरती के सबसे सूखे स्थानों में से एक है. जिसको स्थानीय नामा भाषा में मतलब उस स्थान से हैं जहां कुछ भी न हो. ये रेगिस्तान मंगल ग्रह की तरह दिखाई देता है. जहां रेत के टीले हैं, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ हैं और 81 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले बजरी के मैदान हैं.

कहा जाता है कि ये रेगिस्तान पांच करोड़ 50 लाख साल पुराना है जो दुनिया का सबसे पुराना रेगिस्तान है. वहीं सहारा रेगिस्तान 20 से 70 लाख साल पहले का है. यहां गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और रातें इतनी ठंडी होती हैं कि बर्फ जम जाती है. ये स्थान बिल्कुल भी रहने लायक नहीं है. लेकिन कई प्रजातियों ने यहां पर अपने घर बनाए हैं.

ये रेगिस्तान दक्षिणी अंगोला से नामीबिया होते हुए 2,000 किलोमीटर दूर दक्षिण अफ्रीका के उत्तरी हिस्से तक फैला है. नामीबिया के लंबे अटलांटिक तट पर समुद्र से मिलता है. ऐसा लगता है मानो पूरब की ओर रेत का अंतहीन समुद्र फैला हो, जो दक्षिण अफ्रीका के 160 किलोमीटर अंदर विशाल ढलान तक जाता है.

इस रेगिस्तान के सबसे सूखे हिस्सों में साल में औसतन सिर्फ दो मिलीमीटर बारिश होती है. और कभी-कभी कई साल बिल्कुल बारिश नहीं होती. फिर भी ओरिक्स, स्प्रिंगबॉक, चीता, लकड़बग्घा, शुतुरमुर्ग और जेब्रा ने यहां की कठोर परिस्थितियों में खुद को ढाल लिया है. शुतुरमुर्ग पानी के नुकसान को कम करने के लिए अपने शरीर के तापमान को बढ़ा लेते हैं. हार्टमैन के पहाड़ी जेब्रा कुशल पर्वतारोही हैं जिन्होंने रेगिस्तान के बीहड़ इलाकों में खुद को ढाल लिया है. ओरिक्स बिना पानी पिए सिर्फ पौधे की जड़ और कंद खाकर हफ्तों तक जिंदा रह सकते हैं.

यहां की सबसे हैरान करने वाली बड़ी पहेली एक भू-आकृति है जिसे 'परियों का घेरा' कहा जाता है. एक खास प्रजाति के घास से घिरे गोल-गोल घेरों में कोई पौधा नहीं होता. पूरे नामीब रेगिस्तान में ऐसे लाखों घेरे हैं जो कई दशकों से विशेषज्ञों को चकित किए हुए हैं. इन घेरों को आसमान से देखना सबसे अच्छा है. नामीब के अंतहीन रेगिस्तान में हर जगह ये घेरे दिखते हैं, जो कई बार चेचक के धब्बों की तरह लगते हैं.

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First published: 22 December 2019, 20:10 IST
 
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