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वैज्ञानिकों ने मेंढकों के स्टेम सेल से बनाया ऐसा रोबोट जो कैंसर की बीमारी में करेगा मदद

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 January 2020, 20:52 IST

वैज्ञानिकों ने मेंढकों(Frog) के स्टेम सेल का उपयोग कर दुनिया का पहला जीवित, आत्म-चिकित्सा रोबोट(Robot) बनाया है. इसको बनाने के लिए अफ्रीकी पंजे वाले मेंढक (ज़ेनोपस लाविस) के स्टेम सेल लिए गए है इसीलिए इन रोबोट का नाम जेनोबोट्स रखा गया है.  वैज्ञानिकों की मानें तो यह रोबोट मानव शरीर के अंदर चल सकते हैं और तैर सकते हैं. साथ ही ये बिना भोजन के हफ्तों तक जीवित रह सकते हैं. इतना ही नहीं ये रोबोट समूहों में एक साथ काम कर सकते हैं. इन रोबोट का साइड एक मिलीमीटर (0.04 इंच) चौड़ी - से काफी कम हैं.

वर्मोंट विश्वविद्यालय(University of Vermont) और टफ्ट्स विश्वविद्यालय के एलन सेंटर(Tufts University's Allen Discovery Center) ने मिलकर यह शोध किया है उन्होंने बताया कि यह ये "पूरी तरह से नए जीवन-रूप हैं".

स्टेम कोशिकाएँ(Stem cells) विशिष्ट कोशिकाएँ होती हैं जो विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विकसित होने की क्षमता रखती हैं. शोधकर्ताओं ने मेंढक भ्रूण से जीवित स्टेम कोशिकाओं को निकाला  और उन्हें छोड़ दिया. फिर, कोशिकाओं को काट दिया गया था और सुपरकंप्यूटर द्वारा डिज़ाइन किए गए विशिष्ट "बॉडी फॉर्म्स" में बदल दिया गया था.

वर्मोंट विश्वविद्यालय के इसके बारे में बताया, प्रकृति में ऐसा कभी नहीं देख. इसके बाद सेल्स ने खुद ही काम करना शुरू कर दिया. त्वचा कोशिकाओं ने संरचना का निर्माण किया, जबकि हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाओं के स्पंदन ने रोबोट को अपने आप आगे बढ़ने की अनुमति दी. जेनोबोट्स में स्व-उपचार की क्षमता भी होती है; जब वैज्ञानिकों ने एक रोबोट में टुकड़ा किया, तो यह अपने आप ठीक हो गया और चलता रहा.

जेनोबोट्स(xenobot ) पारंपरिक रोबोट की तरह नहीं दिखते - उनके पास कोई चमकदार गियर या रोबोट हथियार नहीं हैं. इसके बजाय, वे बढ़ते गुलाबी मांस के एक छोटे से बूँद की तरह दिखते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया है - यह "जैविक मशीन" स्टील और प्लास्टिक के विशिष्ट रोबोटों को प्राप्त कर सकती है.

First published: 15 January 2020, 20:05 IST
 
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