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बिहार: पिछड़ा-मुसलमान बनाम सवर्ण के बीच संघर्ष की सुलगती ज़मीन

एन कुमार | Updated on: 22 October 2016, 7:38 IST
QUICK PILL
पटना हाई कोर्ट से बार-बार ज़मानत पाने वाले मुलज़िमों के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में नीतीश सरकार की अपील उनके लिए राजनीतिक टकराव की वजह बन सकती है. सरकार बाहुबली शहाबुद्दीन और राजवल्लभ यादव के बाद रॉकी यादव के मामले  को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रही थी. 

बाहुबली शहाबुद्दीन और राजद विधायक राजवल्लभ यादव पर राजनीतिक घमासान ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब रॉकी यादव की ज़मानत पर बिहार में हंगामा शुरू हो गया है. रॉकी पर 19 साल के एक लड़के आदित्य सचदेवा की हत्या का आरोप है. इनकी ज़मानत के ख़िलाफ़ जब आवाज़ बुलंद हो रही थी, तभी इसपर एक सवालिया ट्वीट दागकर फिल्म अभिनेत्री पूनम ढिल्लन ने इसे और तूल दे दिया. 

रॉकी पर मई महीने में रोड रेज के बाद आदित्य सचदेवा की गोली मारकर हत्या का आरोप है. बिहार पुलिस कड़ी मशक्कत के बाद मुलज़िम को दबोच पाई थी. रॉकी की तलाश में जब उनके घर छापेमारी की गई तो वहां से शराब भी पकड़ी गई. रॉकी के पिता बिंदी यादव जदयू के नेता और मां मनोरमा देवी विधान परिषद की सदस्य थीं. घर से शराब पकड़ी जाने के बाद नीतीश कुमार ने मनोरमा देवी को तुरंत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. 

अब 20 अक्टूबर को रॉकी यादव को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली है. मगर बिहार के मुख्य अतिरिक्त महाधिवक्ता ललित किशोर करते हैं कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है और 24 अक्तूबर तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी जाएगी. 

सुलगती ज़मीन

सरकार की इस पहल के बावजूद आदित्य सचदेवा के पिता श्याम सचदेवा कहते हैं कि अब तो कानून के मंदिर से भरोसा उठता जा रहा है. सरकार से आग्रह करेंगे कि वह ईमानदारी से और बिना देर किये इस मामले में आरोपी की जमानत रद्द करवाए और सख्त से सख्त सजा दिलवाए. इससे मेरा 19 साल का बेटा आदित्य तो वापस नहीं आयेगा लेकिन कम से कम ऐसे लोगों को कानून के दायरे में रहने का सबक मिलेगा. 

आशंका यह भी है कि बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाने से नीतीश के लिए राजनीतिक टकराव की ज़मीन तैयार हो जाए. यह संयोग ही है कि पिछले कुछ महीने में जो तीन मामले चर्चित हुए और दो के बाद जिस तीसरे मामले में सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है, वह मुस्लिम और यादव समुदाय के नेताओं से जुड़ा मामला रहा. 

रॉकी के पिता बिंदी यादव गया ज़िले के दबंग और बाहुबली की छवि रखने के साथ ही जिला परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं.  कई बार राजद के टिकट से गुरूवा विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं. राजद के साथ-साथ बिंदी की पहचान एक यादव नेता के रूप में भी है. शहाबुद्दीन की जमानत पर नीतीश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने पर सीवान में जो हुआ, उसे सबने देखा था. सीवान में सरेआम नीतीश कुमार का विरोध हुआ था और उस विरोध में राजद के विधायक भी शामिल हुए थे. 

लालू बोलेंगे तो भूचाल आएगा

गया में वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र पुष्प कहते हैं कि जब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, तब बिंदी यादव यह फैला सकते हैं कि नीतीश सरकार में यादव और मुस्लिम नेता ही लगातार निशाने पर हैं. समाजशास्त्री प्रो एस नारायण कहते हैं कि लालू प्रसाद यादव लगातार इस राजनीति को मौन साधकर डील कर रहे हैं. सीवान में नीतीश कुमार का विरोध होने पर उन्होंने कुछ नहीं बोला. राजवल्लभ पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट मूव की, जबकि लालू प्रसाद यादव घंटों राजवल्लभ को अपने घर बुलाकर मिले. 

प्रो एस नारायण कहते हैं कि लालू प्रसाद मौन हैं लेकिन जब वो मौन तोड़ेंगे तो भूचाल-सा आएगा, क्योंकि अपने समर्थकों के बीच एक सीमा तक ही वे यह संदेश फैलने देना चाहेंगे कि लालू प्रसाद यादव नीतीश कुमार के सामने मजबूर हैं. 

पटना के राजनीतिक गलियारे में मशहूर संतोष यादव कहते हैं कि अंदर ही अंदर यह तैयारी काफी पहले से चल रही है कि जब शहाबुद्दीन और राजवल्लभ की जमानत रद्द कराने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है, और अब रॉकी के लिए जा रही है तो फिर कुछ पुराने मामले को भी खोले. मसलन सरकार रणवीर सेना के जो हत्यारोपी पटना हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा होकर चैन की सांस ले रहे हैं, उनके खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट जाए.

रणवीर सेना के ख़िलाफ़ अपील कब

आज नीतीश कुमार भले उस मामले पर कार्रवाई नहीं कर रहे लेकिन आगे उन्हें बाथे-बथानी-नगरी बाजार जैसे कांड में जमानत रद्द करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना ही होगा. राजद के एक नेता कहते हैं कि फिलहाल तेजप्रताप और तेजस्वी को सत्ता में बनाये रखने के लिए एक सीमा के बाद लालू प्रसाद यादव ऐसी गलती नहीं करेंगे कि भविष्य में उनके बेटों के लिए मूल आधार ही खत्म हो जाए. 

बिहार में यादव और मुसलमान उनके कोर आधार हैं. वे चाहेंगे कि अंदरखाने से शह देकर ऐसा माहौल बनवाएं ताकि नीतीश बाथे-बथानी-नगरी बाजार कांड का अध्याय भी खोलें. अगर बाथे-बथानी आदि के आरोपियों का चैप्टर खुलेगा तो उसमें सवर्ण जाति के दबंग निशाने पर आयेंगे. जिस दिन यह होगा, उस दिन टकराव की राजनीति राजनीतिक गलियारे से निकलकर गांव के गलियों तक पहुंचेगी.

First published: 22 October 2016, 7:38 IST
 
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