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बिहार: नोटबंदी को लेकर उलझी महागठबंधन की राजनीति, राजद के धरने से लालू के बेटे नदारद

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 6:41 IST
(पीटीआई)

नोटबंदी के विरोध में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव द्वारा पटना में आयोजित धरना चर्चा का विषय बन गया. हालांकि इस धरने में पूर्व मुख्यमंत्री के काफी समर्थक मौजूद थे लेकिन उनके अपने ही दोनों सुपुत्र नदारद रहे. देखा जाए तो तेज प्रताप यादव और उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव को धरने में मौजूद रहना चाहिए था, क्योंकि वे पार्टी मुखिया के परिवार का ही हिस्सा हैं. जो भी हो, चूंकि वे धरने में दिखाई नहीं दिए. इसलिए हो सकता है कि जिस वजह से ये दोनों अपनी पार्टी के धरने में शामिल नहीं हुए उसी वजह से कांग्रेस पार्टी भी धरने में शामिल नहीं हो पाई हो.

इस मौके पर लालू प्रधानमंत्री पर जम कर बरसे और जनता से उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकने की अपील की. उन्होंने ‘मोदी हटाओ, देश बचाओ’ का नारा लगाते हुए कहा मोदी ने काला धन हटाने के नाम पर देश को धोखा दिया है.

काले धन के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करके मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री तानाशाह की तरह बर्ताव कर रहे हैं और उनके कई फैसले देश के लिए कई मायनों में घातक हैं.

लालू ने कहा, नोटबंदी का सर्वाधिक बुरा प्रभाव किसानों, मजदूरों और महिलाओं पर पड़ा है. वे जल्द ही नोटबंदी के विरोध में एक रैली निकालेंगे, जिसमें 10 राजनीतिक दल शामिल होंगे, फिलहाल उन्होंने इन पार्टियों का नाम नहीं बताया.

प्रदेश राजनीति की कलई खुली

राजनीतिक विश्लेषक चिंतित हैं कि बिहार में राजद के गठबंधन सहयोगी जदयू और कांग्रेस इस धरने में क्यों नहीं थे? कांग्रेस की धरने में नामौजूदगी बड़ी बात है क्योंकि एक दिन पहले ही नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की संयुक्त विपक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालू भी नहीं जा पाए थे. जदयू इन दोनों ही कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुआ लेकिन कांग्रेस ने तो उनके कार्यक्रम में लालू के न आने का बदला लिया है.

राजद के एक सूत्र ने कहा कि वे ठगा सा महसूस कर रहे हैं. सहयोगियों की गैर मौजूदगी पर भड़ास निकालते हुए लालू ने कहा, 'कोई इस गलतफहमी में न रहे कि वे अकेले हैं.' कांग्रेस के एक सूत्र ने कहा, 'नोटबंदी का विरोध कर रही पार्टियां हर हाल में एकजुट हैं. हालांकि बिहार में स्थानीय समीकरणों के चलते स्थितियां कुछ अलग हैं.'

दरअसल बिहार कांग्रेस प्रमुख अशोक चौधरी और लालू के दोनों बेटे बिहार सरकार में मंत्री हैं. सूत्रों के अनुसार, हो सकता है चौधरी जदयू के दबाव में इस धरने से दूर रहे हों. जदयू अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुरू से ही इस नोटबंदी का समर्थन करते आ रहे हैं और अब भी उनका समर्थन जारी है.

जहां तक पार्टी के इस मसले पर रवैये की बात है; तो नीतीश ने हाल ही में कहा था कि वह प्रधानमंत्री द्वारा दी गई 50 दिन की अवधि पूरी होने पर ही इस पर अपनी पार्टी का रवैया पुनः तय करेंगे.

सूत्रों का कहना है, हो सकता है कि चौधरी को नीतीश कुमार की बातों से कुछ ऐसे संकेत मिले हों कि राजद के धरने में शामिल होने से कहीं कैबिनेट में उनका पद खतरे में न पड़ जाए. अगर यह सच है तो एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि जदयू एक बार फिर भाजपा से नजदीकियां बढ़ा रहा है. ऐसे में अगर उनके गठबंधन सहयोगी के ही सरकार विरोधी कार्यक्रम में कोई शामिल न हुआ हो तो सवाल तो उठेंगे ही. लेकिन लालू के अपने ही बेटों का पिता की राजनीतिक गतिविधि से दूर रहना उनके लिए करारा राजनीतिक झटका है.

तो क्या टूटेगा महागठबंधन?

अब तक तो ऐसा नहीं लगता. दोनों ही घटक इस मामले में पूरी सतर्कता बरते हुए यही कह रहे हैं कि नोटबंदी पर मतभेद का असर बिहार में गठबंधन पर तो नहीं पड़ेगा. लेकिन अगर भाजपा के साथ संबंध बढ़ाने की बात पर जदयू और दूसरी पार्टियों के बीच मतभेद इसी तरह गहराते रहे तो एकता का यह दिखावा कब तक चलेगा?

First published: 29 December 2016, 7:48 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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