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चुनाव से पहले शराबबंदी पर नरम हुए नीतीश अब पकड़े जाने पर परिवार वालों को नहीं होगी जेल

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2018, 11:38 IST

बिहार में शराबबंदी जैसे कानून की सख्ती लागू करने वाले नितीश कुमार आलोचनाओं से घिरे रहे. सख्त कानून की वजह से चौतरफा आलोचना झेल रहे नितीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर बड़े बदलाव करने का फैसला किया है. शराबबन्दी कानून को लेकर नया प्रस्ताव जारी किया गया है.

जिसके अनुसार इसके लिए दी जाने वाली सजा में कमी की जाएगी. साथ ही साथ पहले कानून से इतर इस नए प्रस्ताव के तहत जमीन, घर, गाड़ियों को जब्त नहीं किया जाएगा. कैबिनेट से नए प्रस्ताव को मंजूरी मिल गयी है. नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस शराबबंदी कानून के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी.

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क्या है शराबबंदी का नया संशोधित कानून

नए प्रस्ताव के अनुसार अब किसी व्यक्ति के पास से शराब बरामद किये जाने पर घर, वाहन और जमीन को जब्त नहीं किया जाएगा. मद्यनिषेध और उत्पाद विधेयक-2016 में कड़े सजा के प्रावधान किए गए थे. इसके तहत पांच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और नशे में पकड़े जाने पर न्यूनतम एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक आर्थिक दंड का प्रावधान था. जिसमें बदलाव किये गये हैं.

बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया, ''संशोधन विधेयक में सजा के प्रावधानों में कमी की गई है. साथ ही पुलिस किसी को तंग न करे इसके लिए भी प्रावधान किया जा रहा है.''

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पहली बार पकड़े जाने पर देना होगा जुर्माना

नए कानून के मुताबिक सजा में सख्ती को कम करते हुए पहली बार शराब पीते हुए पकड़े जाने सीधे जेल में नहीं डाला जायेगा. पहली बार पकड़े जाने पर 50 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा. अगर दोषी जुर्माना भरने में नाकामयाब रहता है तो उसे तीन महीने की सजा होगी. पहले ये सजा 5 साल की थी. वहीं दोबारा शराब पीते पकड़े जाने पर एक से पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.

 

गौरतलब है कि अप्रैल 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है. हालांकि कई मंचों से नितीश कुमार ने ये कहा था कि इस कानून में बदलाव किये जा सकते हैं. क्योंकि इस क़ानून के दुरूपयोग की खबरें भी मिल रही हैं जिसके बाद कानून में जरूरी संशोधन आवश्यक है.

 

First published: 12 July 2018, 10:06 IST
 
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