Home » बिहार » JEE Advanced-2017 Results: Once Again All The 30 Students Crack IIT JEE Exam From Super 30
 

Super 30: जब मेहनत इरादों के रथ पर सवार होकर अपने सफ़र पर चल पड़ती है

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 June 2017, 12:04 IST

देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक IIT (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) में एडमिशन के लिए हुए JEE-17 एडवांस में एक बार फिर बिहार का रिजल्ट सुपर से ऊपर रहा है. आनंद कुमार के सुपर-30 के सभी परीक्षार्थी सफल रहे हैं. वहीं पूर्व डीजीपी अभयानंद के सुपर 30 के शशि कुमार ने 258वीं रैंक हासिल की है और वे बिहार टॉपर बने हैं. 

सुपर-30 के सभी छात्रों के सफलता के बाद मशहूर मैथमेटीशियन और सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट में इसकी ख़ुशी जाहिर की. कुमार ने लिखा, "मेरे सभी 30 बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़कर यह सिद्ध कर दिया है कि चाहे बेरोजगार पिता का बेटा केवलिन हो या सड़क किनारे अंडे बेचने वाले का बेटा अरबाज आलम हो, खेतों में मजदूरी करने वाले का बेटा अर्जुन हो या फिर भूमिहीन किसान का बेटा अभिषेक। इन सभी 30 बच्चों ने घनघोर आर्थिक पिछड़ेपन के बावजूद सपने देखे और अपनी मेहनत से उसे साकार किया."

सुपर-30 के वजूद की वजह

आनंद कुमार का जन्म बिहार के पटना में हुआ था, इनके पिता डाक विभाग में क्लर्क थे. जैसा कि होता आ रहा है कि गरीबी हमेशा टैलेंट के आड़े आ जाती है, वही आनंद कुमार के साथ भी हुआ. मिस्टर कुमार कहते हैं कि एक ऐसा भी वक़्त था, जब उन्हें पापड़ बेचने पड़े और परिवार को चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाने का काम भी करना पड़ा.

आनंद कुमार को Cambridge University जाने का भी मौका मिला, लेकिन पैसे की तंगी और पिता के निधन की वजह से उनका जाना नहीं हो सका. इस घटना ने आनंद को अंदर तक हिला दिया और उन्हें बाकी बच्चों के हालात से रूबरू करवा दिया, जो पढ़ना तो चाहते हैं मगर फिर भी पैसे की तंगी की वजह से उन्हें सही शिक्षण संस्थान नहीं मिल पाते हैं. आनंद कुमार ने सन 2002 में आज मशहूर हो चुके सुपर-30 की नींव रखी, जहां हर साल 30 उन चुनिन्दा बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं.

गुरुकुल जैसा माहौल

आनंद कुमार के पटना स्थित घर का माहौल एकदम गुरुकुल जैसा है. आनंद के अलावा उनका पूरा परिवार हर साल उन 30 छात्रों का भविष्य निखारने का काम करता है. सुपर-30 में चुने गए सारे स्टूडेंट आर्थिक रूप से पिछड़े होते हैं. वो आनंद कुमार के घर में ही रहकर जी की तैयारी करते हैं. आनंद कुमार की मां ही सारे छात्रों का खाना बनाती हैं और उनके छोटे भाई प्रणव इन छात्रों का ख्याल रखते हैं. इसके एवज में इन छात्रों से कोई फीस नहीं ली जाती.

आनंद कुमार बताते हैं, "खून-पसीने के अपने गाढ़ी कमाई के पैसे से ही उनके और अपने परिवार के लिए भोजन-भात का इंतजाम करता हूं , आज तक मैंने किसी से एक रुपया चंदा नहीं लिया, आगे सुपर-30 को बड़ा करने के लिए मुझे किसी से पैसे नहीं चाहिए, हां, आपके सपने जरूर चाहिए."

First published: 12 June 2017, 12:01 IST
 
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