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लालू को झटका: 'नीतीश-मोदी' सरकार के ख़िलाफ़ याचिकाएं ख़ारिज

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 July 2017, 14:48 IST

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को पटना हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने बिहार में जनता दल यूनाइटेड और भाजपा गठबंधन की साझा सरकार के गठन को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है.

सरकारी वकील ने बताया कि अदालत ने याचिकाओं को इस आधार पर खारिज कर दिया कि नई सरकार का गठन संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हुआ है. दरअसल पिछले बुधवार यानी 26 जुलाई को नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके ठीक अगले दिन नीतीश ने भाजपा की मदद से छठी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 

'बहुमत का फैसला सदन से'

हाईकोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए यह भी कहा कि राज्य सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया है, लिहाजा इस स्थिति में वह कुछ नहीं कर सकती.

बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने सदन में बहुमत साबित कर दिया है, ऐसे में अदालत ऐसे मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती. अदालत ने यह भी कहा कि अगर आपके पास बहुमत था, तो इसे सदन में साबित करना चाहिए था. केवल यह कहना कि हम सबसे ज्यादा विधायकों की पार्टी हैं, पर्याप्त नहीं है. 

सरकार बर्खास्तगी की मांग ख़ारिज

दोनों याचिकाओं में से एक जीतेंद्र कुमार और दूसरी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायकों सरोज यादव और चंदन कुमार वर्मा ने दायर की थीं. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता-दल (यूनाइटेड), राजद और कांग्रेस के महागठबंधन को जनादेश मिला था और इस सरकार को पांच साल सरकार चलाना था.

याचिकाकर्ताओं ने साथ ही कहा कि राजद के विधानसभा में सबसे बड़ा दल होने के बावजूद राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने के बाद नई सरकार बनाने के लिए उन्हें आमंत्रित नहीं किया.

याचिकाओं में कहा गया था कि यह संविधान के विरुद्ध है और अदालत को हस्तक्षेप करके नवगठित जद (यू)-भाजपा गठबंधन सरकार को बर्खास्त कर देनी चाहिए. 

शुक्रवार को नीतीश ने जीता विश्वास मत

शुक्रवार को पटना विधानसभा में भारी हंगामे के बीच नीतीश सरकार ने विश्वास मत हासिल किया. नीतीश के पक्ष में 131, जबकि विपक्ष में 108 मत पड़े थे. नीतीश ने लालू के बेटे तेजस्वी यादव के मुद्दे पर त्यागपत्र दिया था. दरअसल लालू के बतौर रेल मंत्री रहते रेलवे होटल टेंडर मामले में इसी महीने सीबीआई ने लालू के आवास पर छापे मारे थे.

छापेमारी के बाद जांच एजेंसी ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था. इसी के बाद से विपक्ष लगातार तेजस्वी के डिप्टी सीएम पद से इस्तीफे की मांग कर रहा था.

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में राजद सबसे बड़ा दल है, जिसके पास 80 सीटें हैं. इसके अलावा जेडीयू के 71, भाजपा के 53 और कांग्रेस के 27 सदस्य हैं. विश्वास मत हासिल करने के बाद शनिवार को नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल में जेडीयू कोटे से 14 और भाजपा से 12 मंत्री बनाए. वहीं एलजेपी के एक सदस्य को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई.

साभार: आईएएनएस

First published: 31 July 2017, 13:24 IST
 
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