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बिहार दिवस विशेष: ये पांच हस्तियां जिन्होंने बिहार को पूरे देश में दिलाई पहचान

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2018, 16:50 IST

बिहार अपने समृद्ध इतिहास के लिए प्रसिद्ध है. ये कई महापुरुष राजनेताओं की जन्मस्थली भी बिहार रही है. बिहार के छोटे-छोटे गांव और कस्बों से कई ऐसी महान शख्यियतें निकलीं जिन्होंने देश ही नहीं दुनिया में बिहार और भारत का नाम रोशन किया. आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म भी बिहार में हुआ.

बिहार दिवस के मौके पर आज हम आपको कुछ ऐसी ही हस्तियों से रूबरू कराएंगे. जिन्हें आज भी बिहार के गौरव के रूप में देखा जाता है.

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सारन जिले के जीरादेई गांव में हुआ. वे पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. उन्होंने लॉ की पढ़ाई की और इसमें डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की. भारतीय स्वतंत्रता अभियान के दौरान ही वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल हो गए. उसके बाद डॉक्टर प्रसाद की गिनती देश के बडे़ नेताओं में होने लगी. 1934 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गये.

 महात्मा गाँधी के सहायक होने की वजह से राजेन्द्र प्रसाद को ब्रिटिश सरकार ने 1931 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान जेल में डाला दिया. साल 1962 में राष्ट्रपति पद से अवकाश पाने के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्‍न' से सम्मानित किया गया. उन्होंने अपनी आत्मकथा के आलावा कई पुस्तकें लिखीं, इनमें इण्डिया डिवाइडेड, सत्याग्रह एट चम्पारण, गांधीजी की देन, भारतीय संस्कृति एवं खादी का अर्थशास्त्र इत्यादि उल्लेखनीय हैं. पटना के निकट सदाकत आश्रम में 28 फरवरी 1963 को उनका निधन हो गया.

जयप्रकाश नारायण

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को हुआ था. वे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे. उन्होंने 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष को एकजुट किया और उनका सफल नेतृत्व किया. 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की और जयप्रकाश सहित हजारों विरोधी नेताओं को बन्दी बनाया गया. इसी दौरान मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी गयी.

तब जयप्रकाश नारायण ने सत्ता-पलट करने के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' नामक आन्दोलन चलाया. साल 1977 में  जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोधी पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया. वे एक सच्चे समाज-सेवक थे. वे इतने लोकप्रिय हुए कि उन्हें 'लोकनायक' के नाम से भी जाना जाने लगा. 1998 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मनित किया गया.

इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में रैमन मैगसेसे पुरस्कार दिया गया. आज की राजनीति के कई सफल नेता जैसे लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, सुशील मोदी इत्यादि ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से ही राजनीतिक करियर की शुरुआत की.

नीतीश कुमार

बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार में कानून राज लाने के लिए जाना जाता है. उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. वे साल 2005 से 2014 और 2015 से वर्तमान समय तक बिहार के मुख्यमंत्री हैं. नीतीश कुमार भारत सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर भी रहे.

वो जनता दल यू (JDU) के अध्यक्ष हैं. उन्होंने बिहार में सुधार के कई काम किये जैसे एक लाख से अधिक शिक्षा मित्रों को नियुक्त करने में लाभांश देना, स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों में सुविधा मिलना, गांवों के विद्युतीकरण, सड़कों का निर्माण, लड़कियों की निरक्षरता को कम करना, अपराधियों पर लगाम लगाया.

लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद का जन्म 11 जून 1948 बिहार के गोपालगंज हुआ. उन्होंने राजनीति की शुरूआत जयप्रकाश नारायण के जेपी आन्दोलन से की. वे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष हैं. लालू यादव 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. 2004 से 2009 तक केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मन्त्री रहे. 1990 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने.

उनके समर्थक लालू को गरीबों का मसीहा भी कहते हैं. लालू ने चरवाहा स्कूल खोलकर उन्होंने काफी सुर्खिया पायीं थी. 23 सितंबर 1990 को लालू यादव ने राम रथ यात्रा के दौरान समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी करा कर खुद को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत किया.

रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार राज्य के बेगुसराय जिले में सिमरिया घाट में हुआ. दिनकर हिन्दी साहित्य के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे. उन्हें आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में जाना जाता है. उन्होंने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की. दिनकर को राष्ट्रकवि के नाम से भी जाना जाता है.

वे भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार भी बने, उन्हें पद्म विभूषण की उपाधि भी मिली. उनके द्वारा लिखी गयी किताब 'संस्कृति के चार अध्याय' के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 'उर्वशी' के लिये भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया. रामधारी सिंह दिनकर की महान रचनाओं में रश्मिरथी और परशुराम की प्रतीक्षा शामिल है.

First published: 22 March 2018, 16:47 IST
 
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