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नीतीश कुमार: प्रकाश पर्व के बहाने बिहारी छवि का कायाकल्प

एन कुमार | Updated on: 5 January 2017, 8:22 IST
(पीटीआई)

पटना अपने रंग में है. चहुंओर एक ही होर्डिंग दिख रही है. 'बिहार में हार्दिक स्वागत है' का इश्तेहार लगा हुआ है. हर सड़क, गली, मोहल्ला एकदम साफ हैं. पटना के जिन सड़कों और नालियों में बजबजाती गंदगी के कारण चलना मुश्किल होता था, उन सड़कों पर लोग बैठ रहे हैं.

गुरू गोविंद सिंह के 350वें जन्मोत्सव पर प्रकाश पर्व के आयोजन ने पटना और बिहार की छवि को तेजी से बदला है. बदलाव की इस कहानी को सरकार और सिख संगठनों के साथ मिलकर खुद बिहारी लिख रहे हैं. जिस तरह से देश और दुनिया के कोने-कोने से सिख समुदाय के लोग प्रकाश पर्व में शामिल होने पटना आ रहे हैं, वही उमंग बिहार के लोगों में भी देखने को मिल रही है.

दिलकश नज़ारा

पटना में बनी टेंट सिटी, उसकी लाइटिंग को देखने के लिए, सिख समुदाय के नगर कीर्तन में शामिल होने और उसे देखने के लिए बिहार भर से लोग पटना आ रहे हैं. अदभुत नजारा है पटना में.

जिस पटना में राजनीतिक रैलियों के दौरान कुछ हजार की भीड़ से सड़कों पर अराजकता फैल जाती है, वह लाखों की भीड़ जुटने के बाद भी अनुशासित है. पटना में तीन दिनों की सरकारी छुट्टी हो चुकी है. जो पटनावाले हैं वे अपने घर के बाहर साफ-सफाई कर पूरी व्यवस्था में लगे हुए हैं ताकि जो लोग आएं उनके घर के बाहर बैठ कर सुस्ता सकें.

कई होटलों ने अपने जितने कमरे कॉमर्शियल रेट पर बुक किये हैं, उतने ही कमरे सिख समुदाय के लोगों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराए हैं. सड़क पर बिहारियों की भीड़ कतारबद्ध होकर चल रही है. बिहारियों और पटनवालों की नयी पीढ़ी ऐसा नजारा पहली बार देख रही है.

बड़े-बड़े नेताओं के पटना आने का सिलसिला जारी है. दिल्ली के मुख्यमंत्री पटना आकर पटना साहिब में मत्था टेक कर जा चुके हैं. जाते-जाते इंतजाम और व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते गये हैं. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टर अमरिंदर सिंह मंगलवार से ही पटना में डेरा डाले हुए हैं. वे भी दिल खोलकर नीतीश की तारीफ कर रहे हैं. 

बुधवार को नीतीश कुमार से भी मिले थे. सिख समुदाय के धार्मिक आयोजन में अमरिंदर सिंह के आने से राजनीति का छौंका भी लगा है. उन्होंने बयान दिया है कि पंजाब से भी बेहतर इंतजाम नीतीश कुमार ने बिहार में किया है. अब जरा चुनाव में भी चलकर पंजाब में मदद कर दें तो बेहतर रहेगा.

राजनीति

अमरिंदर सिंह ने खुलेआम राजनीतिक बयान दिया है. बिहारी नेता पहले से ही इसे राजनीतिक रंग देने को बेताब बैठे हैं. हर दल में होड़ मची है इसका श्रेय लेने के लिए. लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी अपनी ओर से लगातार स्वतंत्र अभियान चलाकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि इस आयोजन में उनकी भी भूमिका है.

जदयू के कार्यकर्ता हर जगह अपने झंडे लगाकर अपनी पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराने को बेताब हैं. नीतीश कुमार के आदेश से पूरे पटना से सभी दूसरे झंडे-बैनर हटा दिये गये हैं. लेकिन झंडा-पोस्टर हटाने से भी अंदर ही अंदर राजनीतिक जंग की जमीन की तैयारी में कमी नहीं आयी है.

दूसरी ओर राजनीतिक दल पांच जनवरी गुजर जाने का इंतजार कर रहे हैं. पांच जनवरी को प्रकाशपर्व का मुख्य आयोजन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आयोजन में आनेवाले हैं. माना जा रहा है कि प्रकाश पर्व का मुख्य समारोह खत्म होते ही बिहारियों और पटनावालों के सौजन्य से हुआ यह अभूतपूर्व आयोजन बिहारी राजनीति की भेंट चढ़ेगा. इसके संकेत जदयू कार्यकर्ताओं की ओर से और उससे भी ज्यादा बिहार भाजपा के नेताओं की ओर से मिलने शुरू हो गये हैं.

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी हर अवसर की तर्ज पर प्रकाश पर्व को लेकर भी आंकड़ा वगैरह तैयार कर रहे हैं. सुशील मोदी के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से प्रकाश पर्व सफल हो रहा है. इस पर राजनीति नहीं होना चाहिए.

केंद्र की सौगात

केंद्र सरकार ने प्रकाश पर्व के लिए 100 करोड़ का बजट मुहैया करवाया है, 41.53 करोड़ बिहार को मिलनेवाले हैं. यह राशि दो किश्तों में मिलेगी. एक किश्त 20.76 करोड़ मिल चुकी है. केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने इसके लिए पटना साहिब और गुरु गोविंद सिंह से जुड़े स्थानों के विकास के लिए 41.53 करोड़ की राशि दी है.

पटना साहिब स्टेशन के विकास के लिए 8.25 करोड़ व पटना घाट स्टेशन के लिए 1.03 करोड़ खर्च किये गये हैं. गुरु गोविंद सिंह का अगर कोई स्मारक बनता है तो केंद्र 15 करोड़ रुपए का योगदान दे सकता है. आंकड़ों के दस्तावेज सुशील मोदी अभी से दिखाना शुरू कर चुके हैं.

जदयू के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि हमें नीतीश कुमार की ओर से आदेश मिला हुआ है कि इस मसले पर हमें कुछ नहीं बोलना है. अगर सीनियर मोदी (नरेंद्र मोदी) भी यही बात बोलेंगे तब जदयू के लोग जवाब देंगे. वे कहते हैं कि जदयू की ओर से भी पूरी तैयारी है और दूसरे अंदाज में जवाब देने के लिए राजद की अपनी तैयारी है.

पांच जनवरी को आयोजन के बाद बिहार में इस विषय पर कैसी सियासत होगी यह अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है. लेकिन एक बात तय है कि इस एक आयोजन के जरिये बिहार और बिहारियों मेहमाननवाजी वाली प्रतिष्ठा मजबूत हुई है. नीतीश कुमार ने खुद इस आयोजन की पूरी कमान अपने हाथ में रखकर यह साबित किया है कि राजनीति से इतर वे एक अच्छे प्रशासक भी हैं.

First published: 5 January 2017, 8:22 IST
 
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