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बिहार स्थापना दिवस: नवरत्न जिन्होंने बढ़ाया है बिहार का गौरव

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2017, 15:59 IST

बौद्ध भिक्षुओं की वो पावन भूमि जिसने मौर्य वंश, गुप्त वंश तथा अन्य कई राजवंशों को जन्म दिया जिन्होंने देश के ज्यादातर हिस्सों पर राज किया. इस पावन भूमि पर बहुत से संतों का जन्म हुआ, इसी पावन भूमि पर आचार्य चाणक्य और आर्यभट्ट जैसे विद्वान और वैज्ञानिक हुए. जी हां हम बात कर रहे है कभी देश और दुनिया में शिक्षा का केंद्र रहे बिहार की.

बिहार भारत के पूर्व भाग में स्थित एक विशेष राज्य है, बिहार ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भारत का सबसे बड़ा केंद्र भी है, या फिर ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि बिहार के बिना भारत अधूरा है. 

बिहार स्थापना दिवस के मौके पर आपको मिलवाते हैं बिहार के नवरत्नों से, जिनमें आज़ादी के मतवालों से लेकर सियासत साहित्य, कला और संगीत जगत की हस्तियां भी शामिल हैं.

बाबू कुंवर सिंह

1857 में भारत की आजादी की पहली जंग में 80 साल की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ दहाड़ने वाला शेर कोई और नहीं बल्कि बाबू कुंवर सिंह थे. बाबू कुंवर सिंह जगदीशपुर के एक शाही उज्जैनिया राजपूत घर से ताल्लुक रखते थे. जगदीशपुर वर्तमान बिहार में भोजपुर जिले का हिस्सा है. कुंवर सिंह ने सक्रिय रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के खिलाफ सशस्त्र सैनिकों का नेतृत्व करते हुए विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था. वे बिहार में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के मुख्य संयोजक रहे.

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद

सादगी, सेवा, त्याग और देशभक्ति की प्रतिमूर्ति राजेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार के सिवान जिले के जीरादेई में हुआ था. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति हैं. वकील और विलक्षण प्रतिभा के धनी बाबू राजेंद्र प्रसाद गांधी जी से प्रभावित होकर  भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए. इसके साथ ही वे बिहार क्षेत्र से एक प्रमुख नेता बन गए. 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया. डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने दो बार राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली.

जयप्रकाश नारायण

जयप्रकाश नारायण बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में जन्मा एक कर्मयोगी जिसने आगे चल कर भारतीय राजनीती की दिशा बदल दी. जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को हुआ था वो आगे चल कर जेपी के नाम से मशहूर हुए .

कहा जाता है गांधी जी के बाद सत्ता से दूर रहकर जिसने सिर्फ लोक कल्याण की राजनीति की वो जयप्रकाश नारायण थे. 70 के दशक में जेपी तत्कालीन इंदिरा सरकार की बखिया उधेड़ते हुए जनता के सबसे बड़े नायक बन कर उभरे और उसी के बाद उन्हें लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम से जाना जाने लगा. संपूर्ण क्रांति के नारे से जनता के हीरो बने जेपी ने अपनी आवाज से इंदिरा का सिंहासन हिला डाला और उनके अहंकार को तोड़ने वाले नायक बने.

नीतीश कुमार

अशोक की धरती के नाम से विख्यात बिहार की धरती आजादी के इतने दिन बीत जाने के बाद भी विकास की राजनीति से अछूता रहा. 'बिहार सुशासन के पुरोधा' और सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने वादों और जाति की राजनीति से ऊपर उठते हुए बिहार में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं.

पिछले लगातार तीन बार से प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने बिहार में विकास को अलग दशा और दिशा दी है. नीतीश कुमार का जन्म कभी बिहार में शिक्षा का केंद्र रहे नालंदा जिले के बख्तियारपुर में एक मार्च 1951 को हुआ था. राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान पटना से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले नीतीश कुमार ने जेपी के आंदोलन के जरिए सियासत का ककहरा सीखा. 1974 से 1977 के दौरान संपूर्ण क्रांति आंदोलन का हिस्सा रहे. समाजसेवी और राजनेता सत्येंद्र नारायण सिन्हा के भी वे काफी करीबी रहे.

मनोज तिवारी

भोजपुरी गायक के रूप में मनोज तिवारी ने पटना से लेकर लखनऊ तक अपनी आवाज़ का लोगों को दीवाना बनाया. उनके कई गाने पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक भोजपुरी पट्टी में लोगों की जुबान पर आज भी जुगलबंदी करते नजर आते हैं.

संगीत से सियासत तक अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुके तिवारी अभी उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद है और दिल्ली बीजेपी के मुखिया भी हैं. 45 साल के मनोज तिवारी का जन्म 1 फरवरी 1971 को बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में हुआ था.

मनोज तिवारी के पिता का नाम चंद्रदेव तिवारी और मां का नाम ललिता देवी है.मनोज तिवारी ने अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित चर्चित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के लिए एक लोकप्रिय गीत 'जिय हो बिहार के लाला' को भी गाया है.

शारदा सिन्हा

पूरे भारत में स्वर कोकिला के नाम से मशहूर और पद्मश्री से सम्मानित  शारदा सिन्हा  का जन्म बिहार की पावन धरती पर हुआ है. शारदा सिन्हा भोजपुरी और मैथिली भाषाओं में बिहार की सबसे मशहूर गायिका हैं. इनके द्वारा गाया गया फिल्म मैंने प्यार किया का गाना कहे तोसे सजना तोहरी सजनिया लोगों की जुबान पर चढ़ गया था.

रवीश कुमार

बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में जन्मे टीवी पत्रकार रवीश कुमार अपनी जमीनी रिपोर्टिंग और अनूठे अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं. रवीश कुमार को पेशेवर और संवेदनशील पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड मिल चुका है. हाल ही में उन्हें पहले कुलदीप नैयर अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया. इसके साथ ही उनका ब्लॉग क़स्बा भी काफी चर्चित है.

रामधारी सिंह 'दिनकर'

हार कर बैठा चांद एक दिन, माता से यह बोला,‘‘सिलवा दो मां मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला. हम लोगों में शायद कोई ऐसा होगा जिसने रामधारी सिंह दिनकर की ये कविता न पढ़ी हो. आपातकाल के दौरान उनकी कविता सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ने जनता में नया जोश जगा दिया था.

हिंदी कविताओं के सूरज रामधारी सिंह दिनकर का जन्म मुंगेर जिले के सिमरिया गांव में हुआ था. एक भारतीय हिंदी कवि, निबंधकार, देशभक्त दिनकर को आधुनिक हिंदी कवियों की धुरी माना जाता है. उनकी कविता ने वीर रस को उकसाया, और उनके प्रेरक देशभक्तिपूर्ण रचनाओं के कारण उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दी गई. इसके अलावा महाभारत के पात्र कर्ण से प्रेरित उनका काव्य रश्मिरथी भी काफी चर्चित है.

विद्यापति

विद्यापति मैथिल कवि कोकिल (मैथिली के कवि कोयल) एक मशहूर कवि और एक संस्कृत लेखक थे. वह बिहार के मिथिला क्षेत्र के मधुबनी जिले के गांव बीसिफी में पैदा हुए थे और उनका निधन समस्तीपुर में  हुआ था. उनके पिता का नाम श्री गणपति ठाकुर था. विद्यापति का नाम दो संस्कृत शब्द, विद्या (ज्ञान) और पति (गुरु) से प्राप्त होता है.

First published: 22 March 2017, 15:55 IST
 
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