Home » बिहार » Senari Massacre: 10 sentenced to death, life imprisonment for 3
 

सेनारी जनसंहार: 34 की हत्या में 10 को फांसी, 3 को उम्रक़ैद

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 November 2016, 16:09 IST
(एएफपी )

बिहार के जहानाबाद ज़िले के सेनारी जनसंहार मामले में ज़िला अदालत ने दस दोषियों को फांसी और तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई है. जहानाबाद जिला कोर्ट के एडीजे रंजीत कुमार सिंह ने सजा सुनाते हुए उम्र कैद के दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.

जिन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई, उनके नाम बुचन यादव, बुटाई यादव, बचेस सिंह, गोपाल साव, सत्येंद्र दास, लल्लन पासी, उमा पासवान, दुखन पासवान, करीमन पासवान, जोराई पासवान हैं. ज़िला अदालत ने इनके अपराध को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मानते हुए इन्हें फांसी की सज़ा सुनाई. 

जिन दोषियों को उम्रकैद हुई है, उनके नाम अरविंद कुमार, मुंगेश्वर यादव, विनय पासवान हैं. कोर्ट ने इन तीनों दोषियों को कम उम्र का हवाला देते हुए सज़ा कम कर दी लेकिन एक-एक लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया. वहीं केस में दो दोषियों की सजा को रिजर्व रखा गया है क्योंकि बेल मिलने के बाद से दोनों फरार हैं. 17 साल पहले सेनारी में 34 लोगों की हत्या के लिए ज़िला अदालत ने 27 अक्टूबर को 15 मुलज़िमों को दोषी पाया था और अब इन्हें सज़ा सुनाई गई है. 

27 अक्टूबर को दोषी क़रार

17 साल पहले बिहार में हुए सेनारी जनसंहार पर जहानाबाद कोर्ट 15 दोषियों को सज़ा सुना दी है. इससे पहले 27 अक्टूबर को अदालत ने 23 मुलज़िमों को बरी कर दिया गया था. इस हत्याकांड में सवर्ण जाति के 34 लोगों की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी. 

1999 में हुए इस नरसंहार के लिए बिहार पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर को ज़िम्मेदार क़रार दिया था. अब जहानाबाद कोर्ट के ज़िला सत्र न्यायाधीश रणजीत कुमार सिंह ने 15 मुलज़िमों को हत्या, हत्या की साज़िश रचने, विस्फोटक और हथियार रखने समेत कई मामलों में दोषी पाया है. 

18 मार्च 1999 को हुई इस घटना में 34 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. 18 मार्च की रात प्रतिबंधित एमसीसी के हथियारबंद उग्रवादी दस्ते ने गांव को चारों ओर से घेरने के बाद इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया था.

गांव के जाति विशेष के 34 लोगों को उनके घरों से जबरन निकाला गया और उनकी गांव के उत्तर सामुदायिक भवन के पास बधार में ले जाकर गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई थी. मामले में चिंता देवी के बयान पर गांव के चौदह लोगों सहित कुल सत्तर नामजद लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.

जातिय हिंसा और बिहार

बिहार दो दशक से ज़्यादा समय तक जातीय हिंसा की आग में जलता रहा है. एक के बाद एक जातीय जनसंहार राज्य में हुए हैं. सेनारी कांड से ठीक पहले इसी ज़िले के शंकरबिघा गांव में 23 और नारायणपुर में 11 दलितों की हत्या की गई थी. 

इसी तरह 1 दिसम्बर 1997 में इसी ज़िले के लक्ष्मणपुर बाथे गांव में सवर्णों के हथियारबंद संगठन रणवीर सेना ने निचली जाति के 61 लोगों की हत्या कर दी थी. मरने वालों में बच्चे और गर्भवती औरतों की संख्या भी काफी थी. हालांकि इस कांड में उच्च न्यायालय सभी 26 मुलज़िमों को बरी कर चुका है. अभियोजन पक्ष की दलील यह थी कि वो आरोपियों के ख़िलाफ़ पुख़्ता सुबूत नहीं जुटा पाए. 

इस कांड से एक साल पहले 1996 में भोजपुर ज़िले के बथानी टोला में भी दलितों, मुसलमानों समेत पिछड़ी जाति के 22 लोगों की हत्या की गई थी. मगर साल 2012 में उच्च न्यायलय ने इस कांड के भी 23 मुलज़िमों को बरी कर दिया था.

First published: 15 November 2016, 16:09 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी