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Daas Dev Movie Review: सब कुछ फिक्स हो सकता है सिवाय इश्क के

विकाश गौड़ | Updated on: 27 April 2018, 15:58 IST

फिल्मः दास देव
डायरेक्टरः सुधीर मिश्रा
स्टारकास्टः राहुल भट्ट, ऋचा चड्डा और आदिति राव हैदरी
रेटिंगः 2.5 स्टार

विश्व विख्यात लेखक शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के विख्यात नोबेल 'देवदास' पर अब तक कई फिल्में बन चुकी हैं. यहां तक कि हमेशा से हिंदी फिल्ममेकर्स के लिए चट्टोपाध्याय का यह उपन्यास फिल्म मेकिंग के लिए एक पसंदीदा विषय रहा है. आपको बता दें पहली बार साल 1928 में फिल्म 'देवदास' बनाई गई जो मूक फिल्म थी. इसके बाद यही फिल्म साल 1955 में दिलीप कुमार, वैजयंती माला और सुचित्रा सेन को लेकर बनाई जिसे आज भी इसकी कलात्मक रचना के लिए याद किया जाता है.

इसके बाद सिनेमा को रंगीनियत मिल गई थी और बीसवीं सदी में 'देवदास' एक बार फिर परदे पर आई. यह साल था 2002, जब फेमस फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली ने इसको भव्यता और ऐसा संगीत दिया जिसे अभी भी कोई भूला नहीं है. यहां तक कि इसमें निभाए गए शराबी वाले शाहरुख खान के किरदार को. उसके बाद 'देवदास' को थोड़ा मॉर्डन अनुराग कश्यप ने किया और 'देव डी' लेकर आए. वहीं, अब सुधीर मिश्रा ने 'देवदास' को 'दास देव' कर एक नया रूप दिया है.

 

'देवदास' को 'दास देव' कर और इसके एक अनसुलझे से ट्रेलर को रिलीज कर सुधीर मिश्रा ने भले ही दर्शकों में एक जिज्ञासा भर दी है लेकिन हम यहां आपको बता दें कि इसमें कोई खास प्रेम कहानी नहीं. अगर आपने 'दास देव' देखने का मन बनाया कि इसमें आपको कोई लव स्टोरी मिलेगी तो आपको निराशा हाथ लगने वाली.

ऐसा भी नहीं है इसमें आपको लव स्टोरी नहीं मिलेगी, मिलेगी लेकिन एक औसत दर्ज की जो कि आज के सिनेमा में आम बात है. दरअसल, सुधीर मिश्रा ने शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के हारे हुए प्रेम की मासूमियत के बजाय इस में ऐसी राजनीति डाली है जो एक दलदल के जैसी है. अगर आपने प्रकाश झा की फिल्म राजनीति देखी हो तो इस फिल्म में उससे भी ज्यादा राजनीति दिखाई गई है.

 

फिल्म की कहानी

फिल्म 'दास देव' की पृष्ठभूमि उत्तरप्रदेश की दिखाई गई है. इस फिल्म में भंसाली की फिल्म जैसे तीन मुख्य किरदार देव, पारो और चंद्रमुखी तो हैं लेकिन इनकी लव स्टोरी कोई मायने नहीं हैं. दरअसल, देव यानी राहुल भट्ट यूपी के एक राजनीतिक घराने का उत्तराधिकारी है. उसे पारो यानी रिचा चड्ढा से प्यार है क्योंकि वह बचपन से ही साथ रहे हैं. पारो उनके परिवार के करीबी की बेटी है. देव को नशे और अय्याशी शौक है. देव के पिता बिसंभर(अनुराग कश्यप) की बचपन में ही एक हेलीकॉप्टर हादसे में मौत हो जाती है जिसके बाद उसके मुख्यमंत्री चाचा अवधेश (सौरव शुक्ला) ने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा करते हैं.

पारो देव की नशे की लत को छुड़ाना चाहती है, यही देव के चाचा भी चाहते हैं क्योंकि उसे खानदान की राजनीतिक विरासत संभालनी है. लेकिन जब सभी नाकाम होते हैं तो इस काम के लिए चांदनी या यूं कहें कि चंद्रमुखी (अदिति राव हैदरी) को लाया जाता है. कुछ ही समय में चांदनी को देव से प्यार हो जाता है लेकिन चांदनी राजनेताओं के काले कारनामों की संगिनी है.

फिल्म 'दास देव' कहानी में एक मोड़ ऐसा भी आता है, जब चांदनी एक ऐसी स्क्रिप्ट बनाती है जिससे देव को राजनीति की बागडोर अपने हाथ में लेनी पड़ जाती है. इस बीच चांदनी की स्क्रिप्ट काम कर जाती है और पारो और देव में टकराव होता है. अपने पिता नवल द्वारा दिए गए आदर्शों और गरिमा को ऊंचा रखने के लिए पारो को विपक्ष के नेता रामाश्रय शुक्ला (विपिन शर्मा) से शादी कर लेती है. इसके बाद शुरू होती है 'दास देव' की असली कहानी, जिसमें देव, पारो और चांदनी का इश्क और राजनीति की रार.

 

'दास देव' का कोई भी किरदार दूध का धुला नहीं नजर आता. यही वजह है कि कई किरदारों वाली कहानी में एक के बाद एक कई परतें खुलती हैं, ऐसे में एक आम दर्शक परेशान हो जाए कि वह किस किरदार के साथ बंधे रहे. यही फिल्म की सबसे बड़ी कमी है. 'दास देव' का स्क्रीन प्ले भी कुछ खास नहीं हैं और फिल्म में कई किरदारों की उपस्थिति भी दर्शक के लिए उलझन पैदा करती है.

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मेहमान कलाकार के रूप में काम करने वाले अनुराग कश्यप ने भी फिल्म 'दास देव' को मजबूती दी है. वहीं. कई संगीतकारों की मौजूदगी में 'रंगदारी', 'सहमी है धड़कन' जैसे गाने भी फिल्म के लिए अच्छे साबित हुए जो कहानी में जान फूंक रहे हैं. इसके अलावा फिल्म का म्यूजिक भी दमदार है. इसके अलावा कुछ डायलॉग भी अच्छे जिसे याद किया जा सकता है. उसमें से एक डायलॉग है, सबकुछ फिक्स किया जा सकता है सिवाय इश्क के. इसको हैदरी बोला है. एक और डायलॉग है, पॉवर की खातिर दिल के मामलों को दूर रखना चाहिए.


क्यों देखें फिल्म 'दास देव'

डार्क सिनेमा के शौकीन फिल्म देख सकते हैं.
राजनीति के रंग में रंगे देव, पारो और चंद्रमुखी को देख सकते हैं.
'दास देव' में समझ रहे हों कि रोमांटिक लव स्टोरी होगी तो जाना बेकार है.
रिचा चड्डा, राहुल भट्ट और आदिति के फैन हैं तो फिल्म देखने जा सकते हैं.

First published: 27 April 2018, 10:26 IST
 
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