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Gold Review: अंग्रेजों को सबक सिखाकर तिरंगे को बुलंद करती है अक्षय कुमार की 'गोल्ड'

विकाश गौड़ | Updated on: 15 August 2018, 13:54 IST

फिल्म- गोल्ड
डायरेक्टर- रीमा कागती
स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, मौनी रॉय, कुनाल कपूर और अमित साध
रेटिंग- 3.5 स्टार

जब भी अपने देश का तिरंगा झंडा किसी भी जगह ऊपर जाता है तो हमारा सीन गर्व से सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है. यही आपको फिल्म अक्षय कुमार की आज रिलीज हुई फिल्म में देखने को मिलेगा. अक्षय कुमार की ये फिल्म नई पीढ़ी को भारतीय हॉकी टीम के स्वर्णिम इतिहास की कहानी से रूबरू कराएगी.

ये फिल्म के आज के दौर के लिए जरूरी इसलिए भी है क्योंकि लोग खेलों में क्रिकेट के अलावा किसी और की तरफ कम ही ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में अक्षय कुमार 'गोल्ड' फिल्म लेकर आए हैं, जिससे आज के युवाओं के भारत के पहले ओलंपिक गोल्ड मेडल के बारे में ही पता नहीं चलेगा बल्कि कई सारी बातें भी सीखने को मिलेंगी.

आज यानी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज हुई अक्षय कुमार और मौनी रॉय की डेब्यू फिल्म 'गोल्ड' देश के युवाओं को हॉकी के लिए जागरुक करेगी. रीमा कागती के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आप अगर सोच रहे हैं कि कुछ मसाला मिलेगा तो आपको निराशा हाथ लग सकती है.

हालांकि, कुछ-कुछ जगह फिल्म में हल्की-फुल्की कॉमेडी डाली गई है, जिससे दर्शक बंधे रहे. टॉयलेट एक प्रेम कथा और पैडमैन जैसी फिल्मों में एक अलग तरह के पागल नजर आए अक्षय कुमार इस फिल्म में भी पागलपन से भरे नजर आ रहे हैं. दरअसल, का ये पागलपन एक जुनून की तरह है.

फिल्म ‘गोल्ड’ की कहानी

फिल्म ‘गोल्ड’ की कहानी तपन दास यानी अक्षय कुमार के ही पागलपन की है. तपन दास ‘गोल्ड’ में एक बंगाली है, जो हॉकी से बेपनाह मोहब्बत करता है. ऐसा इश्क जो एक सच्चा प्रेमी अपनी महबूबा को करता है. तपन दास साल 1936 में हुए ओलंपिक गेम्स के दौरान भारतीय हॉकी टीम(उस समय भारत ब्रिटेन के अधीन होता है) के कप्तान सम्राट यानी कुणाल कपूर के साथ यह शपथ लेता है कि जब उनका देश(भारत) आजाद होगा तो उनकी टीम ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतेगी और पूरी दुनिया खड़े होकर उनके देश के झंडे को सलाम करेगी.

तपन दास का यह सपना दो बार औंधे मुंह जमीन पर भी गिरता है. पहली बार तब जब पूरी दुनिया वर्ल्ड वॉर 2 से जूझ रही थी. दूसरी बार तब जब अंग्रेजों ने रेडक्लिफ लाइन खींचकर हिन्दुस्तान के दो टुकड़े(भारत-पाकिस्तान) कर डाले थे. इतने बड़े दो सदमे झेलने के बाद भी तपन दास हार नहीं मानता. यही वजह है कि तपन दास अपने अथक प्रयास से फिर से आजाद भारत की पहली हॉकी टीम बनाता है.

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तपन दास की यही हॉकी टीम तमाम मुश्किल और परेशानियों के बावजूद साल 1948 में हुए ओलंपिक गेम्स में इंग्लैंड को उनके घर में धूल चटाती है. इतना ही नहीं आजाद भारत पहली बार ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतता है. कुछ इसी तरह की फिल्म है 'गोल्ड' जो इमोशनल भी करती है, तो आपको गर्व महसूस करने का मौका भी देती है. वहीं, किस तरह अक्षय कुमार अपने इस अागाज को अंजाम तक पहुंचाते हैं इसके लिए आपको फिल्म देखने होगी.

रीमा कागती से उम्मीद थी कि वह तलाश जैसा जादू विखेर सकती हैं लेकिन ऐसा फिल्म ‘गोल्ड’ के साथ दिखा नहीं है. फिल्म के गाने चढ़ गई है और नैंनो ने बांधी की कोई जरूरत नहीं दिखी. हालांकि एक थ्रिलर इस फिल्म में जरूर दिखा है वो है फिल्म ‘गोल्ड’ का हॉकी मैच जो वाकई में पसंद आएगा.

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रीमा कागती के डायेरक्शन की बात करें तो ‘गोल्ड’ को देखते हुए आम दर्शक भी अंदाजा लगा सकता है कि आगे क्या होने वाला है. वैसे भी कुलमिलाकर अक्षय कुमार और मौनी रॉय की ‘गोल्ड’ एक इमोशनल फिल्म है, जो आपके दिलों में बस जाएगी. कहानी और कलाकार दोनों ही फिल्म की दमदार कड़ी हैं.

First published: 15 August 2018, 11:11 IST
 
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