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Manto Review: आज़ाद भारत का गुलाम लेखक है मंटो

दीपाली श्रीवास्तव | Updated on: 21 September 2018, 13:28 IST

फिल्म: मंटो

डायरेक्टर: नंदिता दास

स्टार कास्ट: नवाजुद्दीन सिद्दीकी,ऋषि कपूर, दिव्या दत्ता, रणवीर शौरी, नीरज कबि, परेश रावल,जावेद अख्तर,रसिका दुग्गल, ताहिर राज भसीन,

रेटिंग: 3.5 स्टार

सिनेमाघरों में आज रिलीज हो रही फिल्म 'मंटो' एक्ट्रेस और डायरेक्टर नंदिता दास के डायरेक्शन में बनी है. नंदिता दास ने अपना डेब्यू डायरेक्शन फिल्म 'फिराक़' से किया था जो कि सुपरहिट साबित हुई थी और इसके लिए नंदिता को कई अवॉर्ड भी मिले थे. नंदिता का अपनी फिल्मों को लेकर अलग ही टेस्ट हैं और जो कि उन्होंने फिल्म 'मंटो' में फिल्मा दिया है.

इस बार नंदिता दास ने उर्दू शायर और मशहूर शख्सियत सआदत हसन मंटो के जीवन के चार साल और उनकी कुछ कहानियों को पर्दे पर उतार दिया है. इस फिल्म में उन्होंने मंटो की भूमिका में जान डालने वाले किरदार के लिए एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी को चुना हैं. आइये जानते है फिल्म की कहानी के बारे में...

 

फिल्म 'मंटो' की कहानी

फिल्म की कहानी साल 1946 के मुंबई से शुरू होती है जहां उर्दू के शायर मंटो अपनी पत्नी साफिया (रसिका दुग्गल) और बेटी के साथ रह रहे होते हैं. अपने ख्यालों में मंटो का सभी के साथ जुड़ाव उनके फिल्म के प्रोड्यूसर (ऋषि कपूूर) के साथ अनबन की वजह बन जाती है. इसके बाद मंटो 1947 में देश आजाद होने का जश्न देखते हैं और खुश होते है कि देश आजाद हो गया. इसी दौरन भारत-पाकिस्तान का बंटवारा होता है और मंटो को अपने अजीज दोस्त सुपरस्टार श्याम (ताहिर राज भसीन) से बिछड़कर पाकिस्तान जाना पड़ जाता हैं.

पाकिस्तान पहुंचकर और अपने शहर मुंबई से बिछड़कर मंटो बिल्कुल खुश नहीं होते हैं और इसी दौरान उनके एक लेखन 'ठंडा गोस्त' पर कोर्ट केस में फंस जाते हैं. इस केस में मंटो का क्या होता है ये जानने के लिए आपको फिल्म देखने जाना पड़ेगा. इन सभी मुश्किलों से निकलते हुए मंटो के ईर्द-गिर्द सभी पात्र नजर आ रहे हैं.

फिल्म 'मंटो' में कई दमदार डॉयलॉग हैं. इसमें एक डायलॉग में नवाज बोलते हैं कि गुलाम थे तो आजादी का ख्वाब देखते थे और अब आजाद हो गए हैं तो किसका ख्वाब देखें. वहीं इसमें एक दूसरे एक्टर का डायलॉग है, विश्वास नहीं हो रहा कि हमारा मुल्क आजाद है. मंटो भारत पाकिस्तान के विभाजन के उपर लिखी गई अपनी कहानियों से आज भी मशहूर हैं.

फिल्म 'मंटो' सआदत हसन मंटो के साल 1946 से 1950 तक के जीवन पर केंद्रित है. डायरेक्टर नंदिता दास ने मंटो की कहानियों और उनके जीवन पर फिल्माए ये चार सालों को बेहद ही तरीके से बनाया है. मंटो की चार साल की जिंदगी में उनके रहन-सहन के ढंग और उनकी सोच के बारे में आपको पता चल जाएगा. उनका जन्म 11 मई, 1912 को हुआ था और वह बाद में पाकिस्तान चले गए. मंटो का निधन 55 साल की उम्र में 18 जनवरी, 1955 को हुआ.

इसके साथ ही फिल्म में 40-50 दशक में जो काफी मशहूर एक्टर रहे हैं उनका किरदार भी दिखाया गया है. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अलावा दिव्या दत्ता, रणवीर शौरी, नीरज कबि, परेश रावल,जावेद अख्तर सभी अहम किरदार निभाते नजर आ रहे हैं. फिल्म का बैकग्राउंड काफी मजबूत दिखाया गया है जिससे आप पहले के उस दौर से आसानी से कनेक्ट हो पाएंगे. 

 

 

क्यों ना देखें फिल्म-

अगर आपने पहले कभी मंटो की कहानियां ना सुनी या पढ़ी हो तो आप इस फिल्म को समझने में थोड़ा परेशान हो सकते हैं और आप बोर महसूस कर सकते हैं. इसके साथ ही इस फिल्म में 40-50 दशक के कई बड़े स्टार और लोगों के किरदारों को भी दिखाया गया है. जिनके बारे में अगर आपने नहीं सुना होगा तो भी आप फिल्म से कनेक्ट नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही अगर आप मनोरंजन के लिए इस फिल्म का देखने का मन बना रहे हैं तो भी ना जाएं क्योंकि उस हिसाब से ये फिल्म आपके लिए नहीं बनी है. अगर आप मंटो को जरा भी जानते हैं तो आज ही फिल्म को देखने के लिए पहुंच जाएं.

First published: 21 September 2018, 13:01 IST
 
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