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Mulk Review: कैसे फर्क साबित होगा दाढ़ी वाले मुराद अली मोहम्मद में और उस दाढ़ी वाले टेरेरिस्ट में?

विकाश गौड़ | Updated on: 2 August 2018, 12:52 IST

फिल्म- मुल्क
डायरेक्टर- अनुभव सिन्हा
स्टारकास्ट-ऋषि कपूर, तापसी पन्नू, मनोज पहावा, प्रतीक बब्बर, आशुतोष राणा और कई अन्य
रेटिंग- 3.5 स्टार
रिलीज डेट- 3 अगस्त

'हम' उन्हें बताएं किस तरह लेकिन 'वो' हमें अपना समझते ही नहीं. कुछ ऐसी ही स्टोरी को लेकर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने फिल्म बनाई है, जिसका नाम है 'मुल्क'. फिल्म 'मुल्क' दाढ़ी वाले मुराद अली मोहम्मद और उस दाढ़ी वाले टेरेरिस्ट में फर्क करने को लेकर है.

अगर अनुभव सिन्हा की बात करें तो अभी तक वह ज्यादातर फिल्मों में प्यार को दिखाते नजर आए हैं लेकिन इस बार वह शायद सिद्ध कर पाएंगे कि 'मुल्क' से कैसे प्यार किया जाता है. फिल्म 'मुल्क' तीन किरदारों के इर्दगिर्द है लेकिन हर एक एक्टर का रोल अपने आप में पूरा है.

फिल्म 'मुल्क' में किसी देश का विभाजन नहीं बल्कि हम और वो के बीच का विभाजन दिखाया गया है. 'मुल्क' को देखकर ऐसा लगता है जैसे इस फिल्म की जरूरत आज हर शख्स को है फिर चाहे वह हिंदू मुस्लिम सिख या ईसाई किसी समाज या धर्म का हो.

ऋषि कपूर, तापसी पन्नू और मनोज पहावा की ये फिल्म आज के समय में उस बात को दिखाना चाहती है कि लोग जिहाद और आतंकवाद के मायने क्या निकालते हैं. अगर किसी का बेटा आतंकवादी है तो उसका पूरा परिवार आतंकवादी आज के लोगों की इसी सोच को लेकर ये फिल्म बनाई गई है.

फिल्म 'मुल्क' की कहानी

बनारस की गलियों में एक घर है. इस घर(जिसे वकील अड्डा बोलता है ) में वकील मुराद अली मोहम्मद यानी ऋषि कपूर का परिवार रहता है. मुराद अली के पड़ोसी हिंदू हैं जो कि हरदम उनके साथ और मदद के लिए तैयार होते हैं. बनारस के इसी घर में मुराद अली मोहम्मद का 65वां जन्मदिन सेलिब्रेट किया जाता है, जिसमें पड़ोसी भी शामिल होते हैं.

इस बर्थडे सेलिब्रेशन पार्टी में आरती मल्होत्रा जो बाद में मुराद अली के बेटे से शादी करने के बाद आरती मोहम्मद (तापसी पन्नू) भी शामिल होती हैं. इस पार्टी में कोई हिंदू तो कोरमा खा लेता है लेकिन एक दो लोग कहते हैं कि हम इनके नहीं खा सकते. इसके बाद मुराद अली का भतीजा(प्रतीक बब्बर) रात को निकल जाता है.

बिलाल खुद बेटे को छोड़कर आते हैं क्योंकि बेटा कहता है उसे दोस्तों के साथ कानपुर में मैच देखने जाना है. इस बीच वह एक आतंकवादी घटना को अंजाम देता है और बाद में पुलिस उसे एनकाउंटर में मार गिराती है. इसके बाद पुलिस मुराद अली मोहम्मद के घर वालों से पूछताछ करती है.

वहीं, मुराद अली मोहम्मद के छोटे भाई बिलाल मोहम्मद यानी मनोज पहावा का बेटा शाहिद मोहम्मद जब आतंकवादी गतिविधियों में पड़ जाता है तो फिर उसके हिंदू पड़ोसी उसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं और उसकी रिपोर्ट कर देते हैं. इसके बाद शुरू होता है मुराद अली मोहम्मद का मुल्क के लिए अपना प्यार साबित करना.

शाहिद मोहम्मद से जोड़कर मुराद अली मोहम्मद के हर एक घरवाले को आतंकवादी समझा जाता है लेकिन खुद मुराद और उनकी बहू तापसी पन्नू वकील बनकर अपना केस लड़ते हैं लेकिन इस बीच बिलाल की मौत हो जाती है और कुछ ऐसा होता है कि बिलाल के तार पाकिस्तान से मेल खाते हैं.

बाद में मुराद अली मोहम्मद को भी वकील संतोष यानी आशुतोष राणा आतंकवादी घोषित करने की कोशिश करते हैं. क्या मुराद अली मोहम्मद को आरती मोहम्मद बरी करा पाएगी? क्या मुराद अली के परिवार से आतंकवादी परिवार होने का दाग हटेगा? क्या मुराद अली मोहम्मद का अपने 'मुल्क' के लिए प्यार साबित होगा? इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म के डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले की बात करें तो फिल्म 'मुल्क' आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगी. हालांकि, कुछ-कुछ जगह कैमरा वर्क थोड़ा खराब लेकिन अनुभव सिन्हा ने अपनी दमदार स्क्रिप्ट से ये सारे दाग धुल दिए हैं. फिल्म में म्यूजिक भी अच्छा और आपको बोर नहीं करेगा.

इसके अलावा अगर इस फिल्म के पहले हाफ की बात करें तो इसमें खुशियां भाईचारा और थोड़ा सा प्यार है. वहीं, दूसरे हाफ में अनुभव ने पूरी तरह से फिल्म का निचोड़ कर दमदार ड्रामा पेश किया है. ये फिल्म आप दूसरे हाफ में एक मिनट भी मिस नहीं करना चाहेंगे.

क्यों देखें फिल्म 'मुल्क'

ऋषि कपूर और उनकी एक्टिंग के फैन हैं तो फिल्म देखें
'मुल्क' धर्म और सामाजिक धारणाओं की पड़ताल करनी है तो भी फिल्म देखें.
तापसी पन्नू को फिर एक साधारण किरदार में देखना है तो फिल्म देखनी बनती है.

First published: 2 August 2018, 12:38 IST
 
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