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Omerta Review: अनपढ़, जाहिल के बस का नहीं है आंतकी संगठन चलाना

विकाश गौड़ | Updated on: 4 May 2018, 11:49 IST

फिल्मः ओमेर्ता
डायरेक्टरः हंसल मेहता
स्टारकास्टः राजकुमार राव और टिमोथी रायन
रेटिंगः 2 स्टार

बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव भारत देश की तरह हैं जैसे भारत विविधताओं का देश है वैसे ही राजकुमार राव भी अलग-अलग किरदार निभाते दिख रहे हैं. हाल ही रिलीज हुईं राजकुमार की फिल्मों की बात करें तो वह बहन होगी तेरी में अलग तरह के आशिक के रूप में नजर आए, उसके बाद बरेली की बर्फी में सीधे साधे प्रीतम विद्रोही के किरदार में दिखे.

इसके बाद नेशनल अवॉर्ड विनिंग और ऑस्कर के लिए नोमिनेट हुई फिल्म 'न्यूटन' में क्लर्क तो वहीं शादी में जरूर आना में IAS सत्येंद्र सिंह की भूमिका में नजर आए हैं. इसी कड़ी में शुक्रवार 4 मई को उनकी एक और फिल्म रिलीज हुई जिसमें वह इन सबसे अलग एक आतंकवादी के रूप में नजर आ रहे हैं.

राजकुमार राव की इस फिल्म का नाम है ओमेर्ता. इस फिल्म में राजकुमार अहमद ओमर सईद शेख की भूमिका में है जो तमाम हमलों का मास्टरमाइंड था. वहीं, इस फिल्म के डायरेक्टर हंसल मेहता और एक्टर राजकुमार राव में एक समानता है कि दोनों ही लोग करियर में चैलेंज लेना अच्छी तरह से जानते हैं.

 

बता दें कि पहले हंसल मेहता ने राजकुमार राव के साथ 'शाहिद', 'अलीगढ़' और 'सिटी लाइट्स' जैसी लीक से हटकर फिल्में बनाई हैं जो लोगों को पसंद आई हैं. राजकुमार राव और हंसल मेहता ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें हर बार कुछ नया और बहुत कुछ अलग करना है.

यही कारण है कि हंसल मेहता ने एकबार फिर रिस्क लेकर राजकुमार के साथ अपनी इस नई फिल्म के साथ लौटे हैं. ये फिल्म किसी देश भक्त की लाइफ पर नहीं बल्कि एक आंतकी की कहानी पर बनी है जिसे हंसल मेहता ने कुछ अलग ढंग से पेश करने की हिम्मत जुटाई है.

वहीं, अगर फिल्म के नाम ओमेर्ता की बात करें तो यह एक इटैलियन शब्द है. ओमेर्ता शब्द एक ऐसे आतंकवादी के लिए यूज होता है जो पुलिस के बेइंतहां जुल्म के बाद भी टूटता नहीं है. ऐसे ही एक आंतकी ओमर सईद शेख की कहानी पर बनी फिल्म है ओमेर्ता.

 

फिल्म की कहानी

फिल्म ओमेर्ता की कहानी साल 2002 की है. लंदन में रह रहा अहमद ओमार सईद शेख यानी राजकुमार राव पत्रकार डेनियल पर्ल (टिमोथी रायन) की बेरहमी से हत्या कर देता है. वहीं, साल 1994 में दिल्ली में कुछ विदेशी टूरिस्टों के किडनैप करने की घटना भी ओमार द्वारा की जाती है. जेल में गुजारे वक्त और डेनियल की बेरहमी से की गई हत्या के आसपास घूमती यह कहानी इन्हीं कुछ किरदारों के इर्द गिर्द घूमती है. फिल्म को भी मेहता ने लंबा नहीं खींचा है हालांकि कुछ सीन थोड़े लंबे जरूर हैं.

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हंसल मेहता ने फिल्म ओमेर्ता को लाकर यह दिखाने की कोशिश की है कि एक खूंखार आतंकी एक हीरो है जो गलत काम करता है. इसके अलावा हंसल मेहता ने फिल्म ओमेर्ता में यह दिखाने के लिए भी पूरी ईमानदारी दिखाई है कि आज की युवा पीढ़ी किस तरह से आंतकवादी संगठनों की तरफ आकर्षित हो रही है. इसके साथ इस फिल्म इस बात को भी बताया गया है कि एक अनपढ़ जाहिल किसी भी आंतकी संगठन को नहीं चला सकता.

 

फिल्म ओमेर्ता में अगर किसी की एक्टिंग की बात करें तो राजकुमार ने एक ऐसे आतंकी के किरदार को अपने लाजवाब अभिनय से जीवंत कर दिखाया है जो देखने में आपको बेहद शांत लगता है लेकिन है बहुत ही जालिम. फिल्म को देखने के बाद आप कहेंगे कि इस तरह के किरदार को यकीनन राजकुमार राव ही कर सकते हैं. ऐसे में उनकी एक बार फिर उन्होंने इस बात का साबित कर दिया है कि वह कितने दमदार और असरदार एक्टर हैं.

फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर की बात की जाए तो ईशान छाबड़ा ने इसको शानदार तो नहीं लेकिन ठीकठाक स्कोर दिया है. यहां तक कि हंसल की ये फिल्म भी पिछली कुछ फिल्मों की तरह लिमिटेड ऑडियंस के लिए ही बनाई गई है. हालांकि फिल्म को देखने के बाद ये जरूर महसूस क पाएंगे कि एक बेहद खूंखार आतंकवादी किस तरह शांत नजर आता है.

क्यों देखें फिल्म

राजकुमार राव की दमदार एक्टिंग के लिए
हंसल मेहता के अलग हटकर कॉन्सेप्ट के लिए
अहमद ओमार सईद शेख के बारे में थोड़ा बहुत जानने के लिए.

First published: 4 May 2018, 11:49 IST
 
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