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पैडमैन मूवी रिव्यूः वह 'औरतों वाली बात' पर विचलित हो जाता है...

विकाश गौड़ | Updated on: 9 February 2018, 10:21 IST

रेटिंग- 3.5 स्टार
स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, राधिका आप्टे और सोनम कपूर
डायरेक्टर- आर बाल्की

बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने एक बार फिर साबित किया है कि वो अलग हट कर फिल्म की थीम चुन रहे हैं. उनकी पिछली फिल्म 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो कहीं न कहीं देश हित की बात कर रहे हैं. ऐसा ही कुछ उनकी आज यानी शुक्रवार 9 फरवरी को रिलीज हुई 'पैडमैन' में दिखाया गया है. ये फिल्म एक ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बनी है जिसके अलग-अलग जगह अलग-अलग मायने हैं. यहां तक कि महिलाओं को माहवारी के समय 5 दिन तक घर में एंट्री नहीं मिलती. इसके अलावा माहवारी शुरु होने पर किसी किसी जगह जश्न मनाया जाता है कि बिटिया सयानी हो गई.

 

एक पति अपनी पत्नी की 'औरतों वाली बात' यानी मेंस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर तब से चिंतित हो जाता है जब डॉक्टर उसे इसके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी देता है. इसके बाद वह इतना ज्यादा विचलित हो जाता है कि वह अपनी पत्नी के समेत घर की सभी महिलाओं की उस समस्या का निवारण करने के लिए खुद सैनिटरी पैड बनाने की सोचता लेता है. लेकिन यह वो दौर था जब टीवी पर सैनिटरी पैड का कोई विज्ञापन आता था तो लोग चैनल बदल दिया करते थे. ये बात साल 2001 की है.

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इसके साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में तो इसे (माहवारी) गंदा और अपवित्र माना जाता है. यहां तक कि इसके बारे में अगर कोई बात भी करता है तो इसे भी पाप समझा जाता है. उसी परिवेश में अरुणाचलम मुरुगनाथम ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर देश में अपना नाम किया है. इस फिल्म की कहानी भी अरुणाचलम मुरुगनाथम की सच्ची कहानी पर आधारित है. फिल्म 'पैडमैन' के जरिए डायरेक्टर आर. बाल्की और एक्टर अक्षय कुमार ने मेंस्ट्रुअल हाइजीन के प्रति लोगों को जागरूक करने की एक दमदार और बड़ी पहल की है.

 

फिल्म की बात

लक्ष्मी कांत चौहान यानी अक्षय कुमार को गायत्री (राधिका आप्टे) से शादी करने के बाद पता चलता है कि माहवारी भी कुछ होता है. इस बीच उसे हैरानी तब होती है जब उसकी पत्नी माहवारी में न केवल गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती है बल्कि उसे अछूत कन्या की तरह 5 दिन घर से बाहर भी रहना पड़ता है. इसके बाद उसे इसके बारे में थोड़ा बहुत पता चलता है और भाग कर सैनेटरी पैड का पैकेट ले आता है लेकिन उसकी कीमत इतनी ज्यादा होती है कि एक परिवार उसे अफॉर्ड नहीं कर सकता है. लिहाजा उसकी पत्नी उसका यूज करने से मना कर देती है. वो पैड को वापस भी करने जाता है लेकिन कैमिस्ट उसे वापस नहींं लेता. इसके बाद वह काम पर जहां उसके साथ काम करने वाला का लोहे की एंगल से हाथ कट जाता है. कटी हुई जगह पर वह पैड का इस्तेमाल करता है और उसे डॉक्टर के पास ले जाता है.

इसके बाद डॉक्टर से लक्ष्मी को पता चलता है कि उन दिनों में महिलाएं पैड की जगह गंदे कपड़े, राख, छाल आदि का इस्तेमाल करके कई जानलेवा और खतरनाक रोगों को दावत देती हैं. इस बात को जानकर वह खुद सैनिटरी पैड बनाने की कवायद में जुट जाता है. इस सिलसिले में लक्ष्मी को पहले तो अपनी पत्नी, बहन, मां के तिरस्कार का सामना करता है फिर देखते ही देखते उसकी छवि पूरे समाज में गंदी बन जाती है और उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है. यहां तक उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली जाती है लेकिन उसके सैनिटरी पैड बनाने की जिद और दृढ़ हो जाती है.

परिवार को छोड़ कर वह दूसरे जगह चला जाता है लेकिन उसके सिर पर पैड बनाने की धुन सवार रहती है. मान-मजदूरी करके वह कुछ जानकारी लेता है और फिर तमाम प्रयोग करके एक छोटी सी मशीन बनाता है. लेकिन उसके सामने सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर उसका पैड यूज कौन करेगा. लिहाजा उसे अपने पहले ग्राहक के तौर पर एक प्रोग्राम ऑर्गनाइजर्स की टीम मिलती है जो पूछती (सोनम कपूर के लिए) है कि पैड मिलेगा. इसके बाद उसके इस सफर में उसकी जिद को सच में बदलने के लिए दिल्ली की एक एमबीए स्टूडेंट परी यानी एक्ट्रेस सोनम कपूर उसका साथ देती है.

फिल्म रिव्यू

'चीनी कम', 'पा', 'शमिताभ' और 'की ऐंड का' जैसी बॉलीवुड को कुछ अलग फिल्में देने वाले डायरेक्टर आर. बाल्की ने भरकम कोशिश की है कि वह इस मुद्दे को भुना लें. इसमें में भी कोई दो राय नहीं कि आज मासिक धर्म को लेकर समाज में ाजितनी जानकारी का अभाव वह देश का बहुत बड़ा तबका है. किसी को इस बारे में पता तक नहीं है तो कोई इन दिनों न जाने क्या-क्या यूज करता है. यहां तक कि भारत की सिर्फ 18 फीसदी महिलाएं सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं. ऐसे में कहा जा सकता है फिल्म 'पैडमैन' आज के दौर की सबसे जरूरी फिल्म है.

फिल्म में डायरेक्टर बाल्की कई जगहों पर भावनाओं में बह गए हैं फिल्म में उपदेशात्मक बातें डाल दी हैं. साथ ही सैनिटरी पैड को लेकर फैलाई जानेवाली जागरूकता की कहानी को भी कई जगह खींच दिया गया है. हालांकि बाल्की ने इन सीन्स को चुटीले संवादों से संतुलित करने की एक बड़ी कोशिश भी की है. फिल्म 'पैडमैन' का दूसरा भाग पहले भाग की तुलना में ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है. साथ ही फिल्म शुरु होते ही मुद्दे से न भटकते हुए अपने सही मुद्दे पर आ जाती है. बाल्की ने इसमें दक्षिण भारत के बजाय मध्यप्रदेश का बैकड्रॉप रखा है जो कहानी को दिलचस्प और देखने लायक बनाता है.

 

किरदार की बात

फिल्म में किरदारों की बात करें तो अक्षय कुमार फिल्म की जान हैं, उन्होंने पैडमैन के किरदार के हर अंदाज में जिया है. एक बड़े और मंजे हुए एक्टर की तरह वह फिल्म में हर तरह से स्वछंद नजर आए हैं. इसके साथ-साथ राधिका आप्टे ने भी बड़ी ही सहजता ने अपने किरदार को निभाया है. वहीं फिल्म की परी यानी सोनम कपूर ने भी अपने किरदार को जीने की कोशिश की है. फिल्म 'पैडमैन' की सपॉर्टिंग कास्ट भी काफी मजबूत है. साथ ही फिल्म में महानायक अमिताभ बच्चन की एंट्री प्रभावशाली नजर आई है. उनके छोटे सी स्पीच बेहद प्रभावी है जो भारत जन संख्या की नहीं बल्कि जहन संख्या की बात करते हैं. वहीं, म्यूजिक कंपोजर अमित त्रिवेदी ने पहले ही फिल्म के गानों 'पैडमैन पैडमैन', 'हूबहू', 'आज से तेरी' से दिल जीत लिया है. अमित ने भी फिल्म को हिट कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

फिल्म क्यों देखें:

1. अक्षय कुमार की ऐक्टिंग के लिए
2. खास मुद्दों पर बनीं फिल्म देखना पसंद है तो 'पैडमैन' देख सकते हैं.
3. राधिका आप्टे या सोनम के फैन हैं तो फिल्म देख सकते हैं.
4. अरुणाचलम मुरुगनाथम की जिद को जीना हैं तो भी फिल्म देख सकते हैं

First published: 9 February 2018, 10:13 IST
 
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