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Phamous Review: धाकड़ वो है जिसके हाथ में बंदूक आकर बंदूक 'फेमस' हो जाती है

विकाश गौड़ | Updated on: 1 June 2018, 11:50 IST

फिल्मः फेमस
डायरेक्टरः करण ललित बुटानी
स्टार कास्टः जिमी शेरगिल, श्रिया सरन, केके मेनन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ, माही गिल
रेटिंगः 2/5

चंबल की गुंड़ागर्दी पर बॉलीवुड में एक और फिल्म बनी है जिसका नाम है 'फेमस'. फिल्म 'फेमस' शुक्रवार 1जून को रिलीज हो गई है जिसे आप नजदीकी सिनेमाघरों में देख सकते हैं. हालांकि फिल्म 'फेमस' कितनी फेमस होगी इसकी बात बाद में करेंगे लेकिन इससे पहले आपको बता दें चंबल में बनी ये बॉलीवुड की तीसरी फिल्म है पिछली दो फिल्मों की अपेक्षा काफी कमजोर है.

बता दें कि 'फेमस' से पहले चंबल में 'बैंडिट क्वीन' और 'पान सिंह तोमर' बन चुकी है जो काफी शानदार रही हैं. इस फिल्म के साथ करण ललित बुटानी ने डायरेक्टर के तौर पर अपना डेब्यू किया है. बुटानी ने फिल्म को भारीभरकम स्टार कास्ट दी है लेकिन फिल्म 'फेमस' बांधने में कामयाब नहीं होती दिख रही. हर फिल्म की तरह इस फिल्म में भी कमियां हैं लेकिन ये कमियां एक-दो नहीं बल्कि ढेर सारी हैं.

फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर स्क्रीनप्ले तक हर एक चीज में कमियां हैं, हालांकि कुछ डायलॉग आपको अच्छे लग सकते हैं. फिल्म 'फेमस' के पहले हाफ पर नजर डालें तो फिल्म बहुत कुछ दूसरे पार्ट के लिए छोड़ जाती है लेकिन दूसरा पार्ट जल्दी समेटने के चक्कर में रायता फैल गया है. फिल्म का आखिरी हिस्सा तो न जाने क्या सोचकर बनाया इसके लिए खुद बुटानी सिर पकड़कर बैठ जाएं.

करण ललित बुटानी से उम्मीदें थी कि वह तिग्मांशू धूलिया जैसे डायरेक्टर को असिस्ट करेंगे लेकिन ऐसा कुछ दिखा नहीं कई सीन्स को बहुत ही खराब ढ़ग से शूट किया है. भले ही फिल्म छोटे बजट की हो लेकिन बुटानी वो सब नहीं कर पाए जो पान सिंह तोमर में तिग्मांशू धूलिया ने कर दिखाया था. इसका सबसे अच्छा उदाहरण है फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर'. अब बात करते हैं फिल्म की कहानी की.

फिल्म 'फेमस' का प्लॉट

फिल्म 'फेमस' पान सिंह तोमर की तरह चंबल के एक गांव से शुरू होती है, जहां के धाकड़ हैं शंभू सिंह (जैकी श्रॉफ). यहां शंभू की बेटी की शादी हो रही है लेकिन तभी कड़क सिंह (केके मेनन) आ जाता है. शंभू के घर खून खराबा शुरू हो जाता है और इसी बीच कड़क सिंह दुल्हन(शंभू की बेटी) को उठा कर ले जाने लगता है. इधर बेटी को छुड़ाने के लिए शंभू सिंह गोली चलाता है लेकिन कड़क सिंह घूम जाता है और गोली लगने से शंभू की बेटी की मौत हो जाती है.

इसके बाद शंभू को जेल हो जाती है और गांव का एक नया धाकड़ कड़क सिंह मिल जाता है. कड़क सिंह और राम विजय त्रिपाठी (पंकज त्रिपाठी) गांव से सारे हथियार छीन लेते हैं और उनका दबदबा बन जाता है. बाद में राम विजय त्रिपाठी विधायकी का चुनाव जीत जाता है और कड़क सिंह के साथ मिलकर उसकी बंदूक की नोक पर मनमानी करवाता है और त्रिपाठी की ठरकी पना भी जारी रहता है.

इन सबके बीच राधे (जिमी शेरगिल) की भी एक अपनी कहानी है. दरअसल, राधे को पढ़ाई पसंद होती है लेकिन उसके दोस्त उसके परेशान करते रहते हैं. एक दिन राधे जब स्कूल में होता है तो रोजी टीचर (माही गिल) उसको अपना फेवरेट स्टूडेंट बता देती हैं और प्यार से गाल चूम लेती है. दूसरे दिन वो कड़क सिंह को एक आदमी मारते हुए देख लेता है लेकिन पुलिस के सामने उसको पहचानने से इनकार कर देता है.

इसी बीच रोजी टीचर पर राम विजय त्रिपाठी की नजर पड़ जाती है. बाद में वह रोजी को अपनी हवस का शिकार बनाता है और गोली मार देता है. ये सब राधे देख लेता है, लेकिन वह किसी को बताता नहीं है. यही बात कड़क सिंह को अच्छी लग जाती है और वह उसके एहसान तले दब जाता है लेकिन बाद में राधे के खिलाफ ऐसा चक्रव्यूह रचता है कि वह उसमें से निकल न पाए.

इसके बाद राधे की शादी लल्ली (श्रिया सरन) से होती है, जो पहले से अपनी हरकतों के लिए 'फेमस' होती है. त्रिपाठी की नजर लल्ली पर भी पड़ जाती है. इसके लिए उसको कड़क सिंह की जरूरत पड़ती है और कड़क सिंह उसके इस मंसूबे को अंजाम भी दिलवाने की कोशिश करता है लेकिन क्या कड़क सिंह अपनी इस मंसूबे को पूरा कर पाता है, क्या शंभू जेल से छूटकर बदला ले पाता है, क्या राधे अपनी पत्नी को त्रिपाठी की हवस से बचा पाता है इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

फिल्म की सबसे बड़ी कमी है इसकी स्क्रिप्ट. अगर आपको जिमी शेरगिल, माही गिल, केके मेनन और पंकज त्रिपाठी जैसे स्टार्स को कास्ट करना है तो आपको इतनी कमजोर स्क्रिप्ट बनाने का अधिकार नहीं है. बहरहाल इस फिल्म को भगवान ही 'फेमस' करा सकते हैं. फिल्म को देखने की बात करें तो अगर आप जिमी शेरगिल, केके मेनन या पंकज त्रिपाठी के फैन हैं तो फिल्म देखने जरूर जाइए.

फिल्म 'फेमस' के कुछ बेस्ट डायलॉग

"धाकड़ वो है जिसके हाथ में बंदूक आकर बंदूक 'फेमस' हो जाती है"

"धाकड़ वो है जिसके सीने में गोली घुसके गोली 'फेमस' हो जाती है"

"चंबल के उसूल के हिसाब से सीधो दाग देनों चहिए"

"सेक्स करते हुए आदमी इमोशनल नहीं हो सकता"

"गांव के सहारे के लिए मैं बदले के लिए आया हूं"

"जब तक खुद की सीता का अपहरण नहीं होता तब कोई आदमी राम नहीं बनता"

"धाकड़ कड़क सिंह ही दिलाएगो हमको लल्ली"

 

First published: 1 June 2018, 11:39 IST
 
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