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Review of the Reviews: युद्ध और इतिहास का शानदार अनुभव है कंगना, शाहिद, सैफ की रंगून

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 February 2017, 12:48 IST
Rangoon

रंगून यूं तो कहने को एक लव ट्राएंगल है लेकिन शुरू युद्ध के दृश्यों से होती है. कहानी 1943 की है. दूसरा विश्वयुद्ध पूरे जोर पर है और भारत की आजादी की लड़ाई भी. अगर आप भी इस फिल्म को देखने की सोच रहे हैं तो एक बार जरूर पढ़ें इस फिल्म का रिव्यू.

नवभारत टाइम्स: 
रंगून' एक महत्वकांक्षी कोशिश है, एक ऐसी फिल्म बनाने की जो प्रेम त्रिकोण पर बेस्ड है, लेकिन युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है. 1942 में आई 'कैसाब्लांका; और 2002 में आई 'शिकागो' से इस फिल्म का इतिहास काफी मेल खाता है, लेकिन अगर इस फिल्म का संगीत कुछ और मजेदार होता तो बेहतर होता जो फिल्म के बीच-बीच में आता है.
इस फिल्म में सैफ ने जहां अपने व्यापारी के किरदार को बेहद सटीक तरीके से निभाया है वहीं, शाहिद का अभिनय दमदार है. कंगना यकीनन फिल्म में सबसे अहम हैं.

इंडियन एक्सप्रेस: 
इस फिल्म को इंडियन एक्सप्रेस ने वन एंड हाफ स्टार दिए हैं. फिल्म की कहानी को दमदार तरीके से पेश नहीं किया गया है. इसकी सबसे मजबूत बात है फिल्म के गाने जो काफी शानदार है. अभिनय की बात करें तो तीनों कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है.

जनसत्ता: 
सैफ अली खान, शाहिद कपूर और कंगना रनौत स्टारर रंगून फिल्म की कहानी आजादी से पहले के भारत के समय में एक वॉर रोमांस की कहानी है. यह सेकेंड वर्ल्ड वॉर के समय शुरू हुए एक लव ट्रायएंगल की कहानी है. फिल्म के कुछ हिस्से बेहतरीन हैं. लेकिन आखिर तक आते-आते फिल्म कहीं-कहीं थकाने लगती है. विशाल भारद्वाज की इस हाई बजट फिल्म में सब कुछ तब तक ठीक चलता है जबतक हीरो हीरोइन को उनकी तरह ही रहने दिया जाता है. मलिक और जूलिया का रोमांस धीरे-धीरे पकता है. दोनों के बीच के मोमेंट्स को जबर्दस्ती लंबा खींचा गया है. विशाल भारद्वाज ने इस फिल्म के जरिए दो फिल्मों ओल्ड स्कूल रोमांस और वॉर थ्रिलर को बखूबी पेस किया है. रंगून 2017 की एक गुडलुकिंग फिल्म के तौर पर उभर कर आती है.

फर्स्टपोस्ट: 
रंगून एक परफेक्ट फिल्म नहीं है. कुछ सीन असर नहीं डालते. कुछ अहम दृश्य कार्टून फिल्मों से किसी सीन जैसे लगते हैं जो फिल्म में गहरे डूबे दर्शक को चुभती हैं. यह किरदार के साथ आपकी यात्रा को प्रभावित करता है. मुख्य किरदारों के रिश्तों और और बेहतर गढ़ा जा सकता था लेकिन अदाकारों के बीच की केमिस्ट्री इस कमी को छिपा जाती है.
लेकिन रंगून जब तक चलती है- एक शानदार अनुभव है. युद्ध और इतिहास (हालांकि इन पर भी फिल्म में अच्छे पॉइंट हैं) को परे रखिए लेकिन अगर प्यार की बात करें- प्यार जो आपको कंट्रोल करना चाहता है, प्यार जिसके सहारे के बिना आप जी नहीं सकते, प्यार जो अधूरा होता है, प्यार जिसकी इजाजत नहीं है - तो विशाल भारद्वाज की यह फिल्म कोहिनूर है.

First published: 24 February 2017, 12:48 IST
 
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