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Review of Reviews: संवेदनशील मुद्दे पर करारी चोट करती है स्वरा की 'अनारकली आॅफ आरा'

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 March 2017, 8:41 IST
Swara

अपनी परफॉर्मेंस और टैलेंट के दम पर बॉलीवुड में एक पहचान बनाने वाली स्वरा भास्कर इस बार अनारकली बनकर पर्दे पर आ रही हैं. उनकी फिल्म अनारकली ऑफ आरा 24 मार्च को रिलीज हो गर्इ है. जानें कैसा रहा इस फिल्म का रिव्यू... 

जनसत्ता: फिल्म में स्वरा ने इंप्रेसिव अंदाज में अनारकली के किरदार को निभाया है. वो अपने किरदार की फील को बनाए रखती हैं. वो एक ऐसी महिला के किरदार में हैं जिसके पास गजब का सेंस ऑफ ह्यूमर है, वह मजबूत और जरूरत पड़ने पर अपने लिए खड़ा होना जानती है. 

आजतक: फिल्म का सब्जेक्ट काफी सरल है और ग्राउंड लेवल की सच्चाई की तरफ इशारा करता है. फिल्म का एक सुर है जो पूरी फिल्म के दौरान बना रहता है और संगीत को भी उसी लिहाज से पिरोया गया है जो कर्णप्रिय है और जो लोग उत्तर प्रदेश, बिहार या कहें की नार्थ इण्डिया से ताल्लुक रखते हैं उनके लिए काफी फ्री फ्लो फिल्म है. फिल्म में संजय मिश्रा की बेहतरीन एक्टिंग नजर आती है और वो आपको विलेन के नाते घृणा करने पर विवश कर देते हैं. वहीं रंगीला के किरदार में पंकज मिश्रा ने अपने किरदार पर काफी बारीकी से काम किया है जो कि परदे पर साफ नजर आता है. स्वरा भास्कर ने अपने सिंगर के पात्र को बखूबी निभाया है जिससे आप खुद को कनेक्ट कर पाते हैं. फिल्म का डायरेक्शन अविनाश दास ने किया है जो पहली बार किसी फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं और यह प्रयास सराहनीय है.

हिंदुस्तान: फिल्म रंगीन नाच दिखाने वाली कलाकार की बेरंग जिन्दगी की कहानी है. फिल्म एक औरत की मर्जी की बता करता है. एक सीन में अनारकली कहती है, 'मैं खुद को कोई सती सावित्री नहीं कह रही. बंद कमरे की बात अलग है, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि भरी महफील में हमें नंगा कर दिया जाए.' फिल्म में ना ही कोई हीरो हीरोइन की लव स्टोरी है ना ही कोई रोमांटिक गाना है. कुल मिलाकर फिल्म डांसिग अरांउड द ट्री टाइप की फिल्म नहीं है. यह एक औरत के जीवन के सच और संघर्ष की कहानी है. 

First published: 24 March 2017, 8:40 IST
 
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