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Review of the Reviews: संजीदा मुद्दे को बेहतरीन अदाकारी के साथ दिखाती है हरामखोर

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 January 2017, 11:24 IST

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म 'हरामखोर' लगभग तीन साल पहले ही बनकर तैयार थी और सेंसर के साथ साथ कुछ और मामलों की वजह से रिलीज हो पाने में देरी हो रही थी, वैसे फिल्म को कई सारे फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया जा चुका है और नवाजुद्दीन सिद्दीकी को न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला है. जानिए क्या रहा इस फिल्म का रिव्यू...

टाइम्स ऑफ इंडिया: 

बेहद संजीदा विषय पर बेहतरीन तरीके से दर्शार्इ गर्इ फिल्म है हरामखोर. इसमें कर्इ गंभीर मुद्दों को उठाया गया है. अदाकारी की बात करें ताे नवाजुद्दीन आैर श्वेता ने एक बार फिर से खुद को साबित कर दिया है. 

आज तक: 

फिल्म का पटकथा छोटे शहर के स्कूल और वहां हो सकने वाली घटनाओं की तरफ प्रकाश डालती है जो कि आंख खोलने का काम कर सकती है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ-साथ 'मसान' फिल्म की एक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी ने इस फिल्म में भी बेहतरीन अभिनय किया है. कुछ सीन तो काफी दिलचस्प हैं. वहीं सह कलाकार आपके चेहरे पर मुस्कान भी लाते हैं. अगर आपको फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली फिल्में पसंद आती हैं तो इसे जरूर देख सकते हैं.

बाॅलीवुड भास्कर: 

फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है. रियल लोकेशंस की शूटिंग देखने को मिली है, साथ ही रिसर्च भी अच्छी है. फिल्म को सेंसर की कैंची चलने की वजह से काफी नुकसान हो सकता है क्योंकि उसकी वजह से कहानी प्रभावित हुई है. हालांकि स्क्रीनप्ले को थोड़ा और बेहतर किया जा सकता था क्योंकि एक तरफ जहां लव ट्राइंगल था तो दूसरी तरफ फादर-डॉटर के रिश्ते को भी दर्शाया गया है जो कहीं ना कहीं अधूरा नजर आता है. यही कारण है कि शायद सबको यह फिल्म पसंद ना आए. 

श्लोक शर्मा ने अपनी पहली फिल्म में दिखा दिया कि उनके कितने प्रॉमिसिंग डायरेक्टर हैं. फिल्म में रोमांस और लस्ट के बीच के हल्के से अंतर को बखूबी दिखाया गया है. डायरेक्टर श्लोक शर्मा ने बेहद गंभीर विषय चुना और सावधानी के साथ फिल्म बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. फिल्म भले डार्क विषय पर हो और नाम भी काफी अलग है लेकिन कई जगहों पर फिल्म में आप हंस पड़ेंगे. 

बीबीसी हिंदी: 

इस फ़िल्म के शुरू होने से पहले ही एक संदेश आता है कि फ़िल्म स्कूल जाने वाली उन बच्चियों और बच्चों के लिए बनी है जो अपने शिक्षकों या गार्जियन के द्वारा प्रताड़ित होते हैं. एक बेहद गंभीर और सच्चे विषय पर बनी इस फ़िल्म में माद्दा है कि यह आपको घृणा महसूस करवा सकती है और यही इस फ़िल्म की ताक़त है. 

First published: 13 January 2017, 11:24 IST
 
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