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सलमान के खिलाफ लड़ने वाले बिश्नोई समुदाय के लोग हिरण को मानते हैं अपना बच्चा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2018, 11:33 IST

बॉलीवुड सुपर स्टार सलमान खान पर जोधपुर कोर्ट में काला हिरण के शिकार का मामला चल रहा है. राजस्थान का बिश्नोई समुदाय सलमान खान के लिए सजा की मांग कर रहा है. क्योंकि बिश्नोई समुदाय का हिरणों से कुछ खासा लगाव है. यही वजह है कि बिश्नोई समुदाय सलमान खान को सजा की मांग कर रहा है.

बिश्नोई समुदाय का क्या है हिरणों से संबंध

राजस्थान मे बिश्नोई समुदाय ज्यादा बड़ा समुदाय नहीं है, लेकिन इनका जानवरों और प्रकृति के लिए प्रेम इनके दिलों में कूट-कूट कर भरा है. इस समुदाय के लोग प्रकृति प्रेमी होते हैं. यही वजह है कि बिश्नोई समुदाय की महिलाएं हिरण के बच्चों को दूध पिलाती हैं. राजस्थान का मारवाड़ गांव की पहचान ही बिश्नोई समुदाय से ही. ये लोग जानवरों की पवित्रता में बेहद विश्वास रखते हैं. इसीलिए वे हिरण को मरने नहीं देते. यही वजह है कि बिश्नोई समुदाय के लोग हिरण को अपने बच्चेे की तरह मांगते हैं.

बता दें कि बिश्नोई समुदाय के लोग पिछले 500 सालों से प्रकृति की पूजा करते आ रहे हैं. इसीलिए इस समुदाय का प्रकृति से विशेष लगाव है. वे हिरण के बच्चों को पालते हैं. इस समुदाय की औरतें हिरण के बच्चों की मां कही जाती हैं.

क्या है राजस्थान का बिश्नोई समुदाय

ऐसा माना जाता है कि बिश्नोई समाज को ये नाम भगवान विष्णु से मिला है. बिश्नोई समाज के लोग पर्यावरण की पूजा करते हैं. इस समाज के लोग ज्यादातर जंगल और थार के रेगिस्तान के पास रहते हैं. जिससे यहां के बच्चे जानवरों के बच्चों के साथ खेलते हुए बड़े होते हैं. ये लोग हिंदू गुरु श्री जम्भेश्वर भगवान को मानते हैं. वे बीकानेर से आए थे. इस समाज के लोग उनके बताए 29 नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं.

बता दें कि 1736 में प्रकृति प्रेमी बिश्नोई समुदाय के 363 लोगों की जान उस वक्त चली गई जब उन्होंने खेजड़ी के पेड़ को बचाने के लिए अभियान चलाया. उस वक्त खेजड़ली व आसपास के गांव पेड़ों की हरियाली से भरे थे. दरबार के लोग खेजड़ली में खेजड़ी के पेड़ काटने पहुंचे. तभी खेजड़ली गांव की अमृतादेवी बिश्नोई ने गुरु जम्भेश्वर महाराज की सौगंध दिलाई और पेड़ से चिपक गईं. इस पर बाकी लोग भी पेड़ों से चिपक गए. फिर संघर्ष में एक के बाद एक 363 लोग मारे गए. बिश्नोई समाज ने इन्हें शहीद का दर्जा दिया. अमृता देवी के नाम केंद्र व कई राज्य सरकारें पुरस्कार देती हैं.

 

First published: 5 April 2018, 11:28 IST
 
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