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'GANGS OF वासेपुर' के 5 साल और 10 'धुआंधार' डायलॉग

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 June 2017, 15:16 IST

अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर पांच साल पहले थिएटर में एक तूफान बनकर आई थी. यह भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की क्लासिक फिल्म मानी जाती है. आज ही के दिन यानी 22 जून 2012 को रिलीज हुई इस फिल्म ने धनबाद के वासेपुर की पहचान को लेकर बहस छेड़ दी थी. आज के दौर में बेशक वासेपुर में चारों ओर तरक्की की निशानियां देखी जा रही हैं, लेकिन इस फिल्‍म में इस जगह को एक अलग (गैंगवार के गढ़) रूप में दिखाया गया है.

इस फिल्म में मनोज वाजपेयी ने सरदार खान के रोल को जीवंत कर दिया था. पटना से मुंबई तक, हर कोई इस फिल्म का आनंद ले रहा था. फिल्म के सुपरहिट डायलॉग्स ने हर किसी को मुरीद बना दिया. मनोज वाजपेयी ने फिल्म में प्रमुख भूमिका निभाई. यह फिल्म नवाजुद्दीन सिद्दीकी की नई पहचान बन गई.

आलोचकों और दर्शकों ने दोनों फिल्मों में नवाजुद्दीन के प्रदर्शन की सराहना की. फिल्म में मनोज वाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अलावा, हुमा कुरैशी और रिचा चड्ढा ने भी अहम किरदार निभाया था. इस फिल्म के 5 साल पूरे होने पर हम आपके लिए इस फिल्म के कुछ ऐसे डायलॉग्स लेकर आये हैं, जो लोगों की जुबान पर छाये हुए थे.

1. उस हरामी को मिटाना है हमें...गोली नहीं मारेंगे...कह के लेंगे उसकी.

2. मैं जब सोचता हूं...तो उस हरामी को तकलीफ देता हूं.

3. ग़रीबी तो देती है जो रिश्ते ख़ास होते हैं...और पराये अपने होते हैं जब पैसे पास होते हैं.

4. सरदार खान नाम है हमारा...बता दीजियेगा उसको.

5. हर यार वफ़ादार नहीं होता...हर फूल चमकदार नहीं होता...न जाने बाग़ में कितने फूल खिले हैं...हर फूल ख़ूबसूरत नहीं होता

6. इंसान दो ही नस्ल के होते हैं..एक तो हरामी और दूसरे बेवक़ूफ़.

7. इतनी गोली मारते कि आपका ड्राइवर भी खाकी खोका बेचकर रईस बन जाता.

8. हम परपेंडिकुलर हैं...हमले लिए ना ऐसा ही होता है..

9. ना हो पाएगा...बेटा तुमसे ना हो पाएगा.

10. बाप का, भाई का, दादा का...सबका बदला लेगा रे तेरा फैजल.

First published: 22 June 2017, 15:16 IST
 
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