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इरफान खान बर्थडे स्पेशल: "बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में"

विकाश गौड़ | Updated on: 7 January 2018, 13:05 IST

 

टीवी से करियर की शुरुआत करने वाले एक्टर इरफान खान आज बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपने हुनर का जलवा बिखेरे हुए हैं. इरफान खान ने मकबूल, लाइफ इन अ मेट्रो, रोग, स्लमडॉग मिलेनियर, हिंदी मीडियम जैसी एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं. साथ ही उन्हें फिल्म 'पान सिंह तोमर' के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनफान का जन्म 7 जनवरी सन 1967 को जयपुर के एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था. उनका पूरा नाम शाहबजादे इरफान अली खान है. इरफान ने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से एक्टिंग का कोर्स किया हुआ है.

वहीं, अगर फिल्‍मों के नजरिए से देखा जाए तो साल 2017 सचमुच इरफान खान के लिए अच्‍छा साबित हुआ है.
उनकी दो अलग-अलग फिल्मों ने बॉक्‍स ऑफिस पर जिस तरह का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि उन्‍होंने बॉलीवुड में हीरो की एक नई परिभाषा गढ़ी है. इरफान खान की खास बात ये है कि वो हमेशा ही विषय प्रधान सिनेमा का हिस्सा रहे हैं. यही कारण है कि उनके इस टैलेंट को नए-नए आयाम मिल रहे हैं.

 

दरअसल इरफान खान एक्टर के भी एक्टर हैं, एक ऐसे एक्टर, जिन्हें शायद इस बात की परवाह नहीं रहती कि किरदार कैसा है. कैसा भी भूमिका हो, उसे वो पूरी शिद्दत के साथ निभा सकते हैं. उनकी यही खासियत उन्‍हें और एक्टरों से जुदा करती है. उनकी अदायगी के तो चर्चे रहते ही हैं साथ ही उनकी संवाद शैली भी बेहद खूब है.

वो जिस तरह सहजता से प्रेमिका के कान में रोमांटिक लाइनें फुसाफुसा कर बोलते हैं, उसी सहजता से वो धमकी भी देते हैं और किसी की कनपटी पर रिवॉलवर रख देते हैं. उनके इस जन्मदिन के अवसर पर पेश हैं उनकी ही फिल्‍मों के कुछ बेहतरीन डायलॉग्स, जिन्‍हें बोलकर उन्‍होंने अमर कर दिया है.

ये हैं उनके बेहतरीन डायलॉग

फिल्म पान सिंह तोमर

"बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में." रियल लाइफ बेस्ड फिल्म पान सिंह तोमर का ये डायलॉग सभी को याद है जिसने भी ये फिल्म देखी होगी.

फिल्म गुंडे

"पिस्तौल की गोली और लौंडिया की बोली जब चलती है, तो जान दोनों में ही खतरे में होती है."

फिल्म डी-डे

"गलतियां भी रिश्‍तों की तरह होती हैं, करनी नहीं पड़ती, हो जाती हैं."

फिल्म जज़्बा

''शराफत की दुनिया का किस्‍सा ही खतम, अब जैसी दुनिया वैसे हम."

फिल्म साहेब बीवी और गैंगस्टर

इरफान खान के "हमारी तो गाली पर भी ताली पड़ती है." डायलॉग पर सिनेमाघरों में भी तालियां बजतूी थीं.

फिल्म तलवार

तलवार मर्डर केस पर बनी फिल्म के डायलॉग "किसी भी बेगुनाह को सज़ा मिलने से अच्छा है दस गुनहगार छूट जायें." ने भी खूब सुर्खियां बटोरी हैं.

फिल्म द किलर

"बडे शहरों की हवा और छोटे शहरों का पानी, बड़ा खतरनाक होता है." फिल्म द किलर के इस डायलॉग से एक सच्चाई झलकती है.

फिल्म ये साली जिंदगी

फिल्म ये साली जिंदगी का डायलॉग "लोग सुनेंगे तो क्‍या कहेंगे, चुतिया आशिकी के चक्कर में मर गया, और लौन्डिया भी नहीं मिली." लोग खासकर युवा वर्ग जब भी सुनता है हंस पड़ता है.

फिल्म चॉकलेट

"शैतान की सबसे बड़ी चाल ये है कि, वो सामने नहीं आता." ये डायलॉग किसी भी पीठ पीछे बार करने वाले लोगों को लेकर अब अक्सर बोला जाता है.

फिल्म हैदरी

"आप जिस्म है तो मैं रुह, आप फानी में लफानी."

 

फिल्म लाइफ इन मेट्रो

"ये शहर हमें जितना देता है, बदले में कहीं ज्‍यादा हम से ले लेता है.’’ ये भी एक सच्चाई है.

फिल्म हासिल

"और जान से मार देना बेटा, हम रह गये ना, मारने में देर नहीं लगायेंगे,भगवान कसम." इरफान खान का ये डायलॉग भी उनकी संवाद अदायगी को अलग बनाता है.

फिल्म पीकू

"डेथ और शिट, किसी को, कहीं भी, कभी भी, आ सकती है." ये जीवन की सच्चाई है लेकिन इरफान के बोलने का अंदाज इसे अलग बनाता है.

फिल्म द लंच बॉक्स

"आई थिंक वी फॉरगेट थिंग्‍स इफ देयर इज नो बॅडी टू टेल देम." अंग्रेजी का ये डायलॉग भी इनकी इस शैली में शामिल है.

फिल्म लाइफ ऑफ पाई

"हंगर कैन चेंज एवरीथिंग यू थॉट यू न्यू आउट युअरसेल्‍फ।"

फिल्म जुरासिक वर्ल्‍ड

"द की टू ए हैप्‍पी लाइफ इज टू एक्‍सेप्‍ट यू आर नेवर एक्‍चुअली इन कंट्रोल."

फिल्म मदारी

"तुम मेरी दुनिया छीनोगे, मैं तुम्‍हारी दुनिया में घुस जाऊंगा." ये डायलॉग भी इनकी इस लिस्ट का एक अहम डायलॉग है.

 फिल्म हिंदी मीडियम

"एक फ्रांस बंदा, जर्मन बंदा स्‍पीक रॉन्‍ग इंग्‍लिश, वी नो प्रॉब्‍लम, एक इंडियन बंदा से रॉन्‍ग इंग्‍लिश, बंदा ही बेकार हो जाता है जी." उनका ये मजेदार डायलॉग सबकुछ कहता है.

फिल्म करीब करीब सिंगल

"टोटल तीन बार इश्‍क किया, और तीनों बार ऐसा इश्‍क मतलब जानलेवा इश्‍क, मतलब घनघोर हद पार."

First published: 7 January 2018, 12:37 IST
 
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