Home » बॉलीवुड » padmavat controversy: filmmaker shyam benegal welcomes supreme court decisions to lift ban in four states
 

" 'पद्मावत' पर सुप्रीम फैसला देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत है"

न्यूज एजेंसी | Updated on: 18 January 2018, 17:59 IST

फिल्मकार श्याम बेनेगल ने गुरुवार को फिल्म 'पद्मावत' पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत है. संजय लीला भंसाली की फिल्म की रिलीज पर कुछ राज्यों में लगी रोक को न्यायालय ने हटा दिया है.

सेंसर बोर्ड में आज के वक्त के हिसाब से बदलावों को सुझाने के लिए बनाई गई सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की समिति की अध्यक्षता कर चुके श्याम बेनेगल ने आईएएनएस से कहा कि एक बार केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म को हरी झंडी दिखा दी, तो अब कोई भी फिल्म की रिलीज रोक नहीं पाएगा. 

राजस्थान, गुजरात और हरियाणा सरकारों ने अपने राज्यों में फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया था. बेनेगल ने कहा कि कुछ संगठनों द्वारा ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ का हवाला देते हुए 25 दिसम्बर को 'पद्मावत' की रिलीज पर प्रदर्शन करने की धमकी के मद्देनजर कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों को कार्रवाई करनी चाहिए.

बेनेगल ने आईएएनएस से फोन पर कहा, "विवाद खत्म हो चुका है. यह फिल्म पूरे देश में दिखाई जाएगी. सीबीएफसी ने फिल्म को मंजूरी दे ही दी है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मुुुुहर लगा दी है. कोई भी इसे रोक नहीं सकता, सिवाय कुछ लोगों के जैसे करणी सेना या फिर जो कोई भी यह हैं. अगर वे इसे रोकते हैं तो यहां कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा होगी और राज्य सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी." उन्होंने कहा, "स्पष्ट रूप से यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत है."

'अंकुर', 'निशांत', 'मंथन' और 'भूमिका' जैसी सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले 83 वर्षीय निर्देशक फिल्म पर तब भी सवाल उठाए जाने से हैरान हैं. जब निर्माताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि फिल्म 16वीं शताब्दी के कवि मलिक मुुहम्मद जयसी के महाकाव्य 'पद्मावत' पर आधारित है.

उन्होंने कहा, "आखिरकार, सीधी सी बात है कि 'पद्मावत' एक महाकाव्य है. यह 1526 में लिखा गया था, ना कि कल या आज. हमने साहित्यिक क्लासिक को स्वीकार किया है, जो 1526 से यहां है. जब मलिक ने इसे लिखा था. और, अब तथ्य यह है कि कई-कई सालों बाद, कुछ छोटे संगठन यह कह रहे हैं कि यह उनकी भावनाओं को आहत कर रहा है. इसका क्या अर्थ
है?"

उन्होंने दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म के लिए सीबीएफसी और सर्वोच्च न्यायालय के 'सही कदम' की सराहना करते हुए विवाद पर कहा, "यह शोर मचाने वाले लोगों के छोटे समूह को छोड़कर किसी को भी समझ नहीं आ रहा है."

सीबीएफसी ने 'पद्मावत' को पिछले साल 30 दिसंबर को यू/ए प्रमाण पत्र देने का फैसला किया था. फिल्म का नाम 'पद्मावती' से बदलकर 'पद्मावत' कर दिया था, साथ ही पांच संशोधन किए थे. लेकिन, राजपूत संगठन श्री राजपूत कर्णी सेना अपनी मांग पर अड़ा है कि फिल्म प्रदर्शित नहीं की जानी चाहिए.

इस पर बेनेगल ने कहा, "समस्या फैलाने वाले इन समूहों से निपटने में राज्य सरकारों को कुछ भी रोक नहीं रहा है जब तक कि वे (सरकारें) खुद ही इन लोगों के साथ मिली ना हों. कुछ भी उन्हें (सरकारों को कार्रवाई से) भला कैसे रोक सकता है?"

First published: 18 January 2018, 17:56 IST
 
अगली कहानी