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3 साल तक जेल में बच्चों से नहीं मिले थे संजय दत्त, रिहा होते ही बताई थी वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 July 2018, 14:21 IST

29 जुलाई 1959 को मुंबई में जन्मे संजय दत्त ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों को महसूस किया है. पहले युवावस्था में ड्रग्स की लत लगना और इसी बीच पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में जाना. इसके बाद ड्रग्स लेकर बेहोशी की हालत में मां नर्गिस की मौत और फिर 1993 के मुंबई हमले में नाम आना.

इन्हीं तमाम चीजों से संजय दत्त गुजरे हैं. संजय दत्त ने इस बात को कबूल भी किया है कि उनसे गलतियां हुई हैं. इसकी सजा भी उन्होंने काट ली है और फिलहाल वह बरी हो गए हैं. लेकिन कई साल जेल में गुजारने वाले संजय दत्त की जिंदगी के तीन साल ऐसे भी रहे हैं जब उन्होंने अपने बच्चों का मुंह नहीं देखा.

17 अप्रैल, 1993 में संजय दत्त को पहली बार TADA एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन्हें लगभग दो साल से ज्यादा समय के बाद अक्टूबर, 1995 में बेल मिली, लेकिन दो महने के बाद ही फिर से संजय दत्त को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद वे अप्रैल, साल 1997 में फिर बेल पर रिहा हुए.


 

इसके बाद यह केस साल 2006 से 2007 तक फिर चला और संजय को सात महीने जेल में बिताने पड़े. इसके बाद संजय दत्त को मार्च, 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने TADA से बरी किया और आर्म्स एक्ट में पांच साल की सजा सुनाई, चूंकि वे दो बार में 18 महीने पहले ही जेल में गुजार चुके थे, इसलिए उन्हें बकाया समय ही जेल में रहना पड़ा.

संजय कुल चार साल, तीन महीने और 14 दिन जेल में रहे. उनके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उनकी सजा कुछ कम की गई और 25 फरवरी, साल 2016 को संजय जेल से रिहा हो गए. इस बीच एक ऐसा दौर था जब संजय दत्त अपने बच्चों से भी नहीं मिले. दरअसल, खुद संजय दत्त जेल में अपने बच्चों से नहीं मिलना चाहते थे.

 

इस बात को लेकर खुद संजय ने कहा था, "मेरे बच्चे आज भी नहीं जानते कि जेल में क्या होता है. मैंने तीन सालों तक अपने बच्चों को नहीं देखा. मेरी पत्नी कहती थी मैं उनको लेकर जेल तुमसे मिलने आती हूं, लेकिन मैंने कहा, नहीं, कभी उनको यहां लेकर मत लाना, मैं नहीं चाहता कि वे जेल की देहरी भी चढ़ें. मैं नहीं चाहता वे मुझे कैदी के पहनावे और टोपी में देखें."

इसके अलावा संजय बताते हैं, "मैंने जेल में रामायण, भागवत गीता, शिवपुराण, बाइबिल, कुरान, और गुरुग्रंथ साहिब पढ़ी. मैं किसी भी मौलाना या पंडित के सामने बैठकर इस पर बात कर सकता हूं. जेल में मेरा एक अपना छोटा मंदिर था, जबकि सामने बाथरूम था. दरअसल, ऊपर वाला आपके दिल में होता है."

First published: 29 July 2018, 14:14 IST
 
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