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केरल में क्यों सफल हो रहे हैं स्टार्टअप, CM विजयन ने बताई ये वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 November 2018, 14:17 IST

केरल स्टार्टअप इकोसिस्टम रिपोर्ट 2018 के अनुसार केरल में स्टार्ट-अप को 2017-18 में 38 मिलियन डॉलर (तीन करोड़ 80 लाख डॉलर) का वित्त पोषण मिला है. सरकार ने इस रिपोर्ट को शुक्रवार को जारी किया. सरकार ने कहा संस्थागत वित्त पोषण जो कि 2014 में 9.5 मिलियन डॉलर था, 2015 में 19.6 मिलियन डॉलर हो गया. 2016 से फंड प्रवाह में लगातार वृद्धि हुई है जो पहले छह महीने 15.72 मिलियन डॉलर हो गई है.

2018 की तीसरी तिमाही के अंत में केरल में शुरू होने वाले स्टार्ट-अप की संख्या 1,400 से अधिक थी और 2018 (सितंबर तक) में इनका कुल वित्त पोषण 38 मिलियन डॉलर था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017-18 में वित्त पोषित स्टार्ट-अप की संख्या 59 थी. रिपोर्ट ने मुख्य रूप से संस्थागत वित्त पोषण में बदलाव के लिए वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया. इसने स्टार्ट-अप को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. 2017 तक केरल में 757 तकनीकी स्टार्ट-अप थे, जिसमें 51 प्रतिशत सॉफ्टवेयर विकास पर काम कर रहे थे.

 

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराय विजयन का दावा है कि केरल 2014 में टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप के लिए पॉलिसी तैयार करने वाला पहला राज्य है. आज इसमें इनोवेटिव उत्पादों और सेवाओं के विकास के 1,500 से अधिक स्टार्ट-अप हैं. उनमें से 40 प्रतिशत उत्पाद आधारित हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एम शिवशंकर ने कहा कि पिछले छह महीनों में केरल स्टार्टअप मिशन ने 100 से अधिक उद्यमों को वित्त पोषित किया है, जिसमें उस समय 'स्थिर' राजस्व चरण में 50 प्रतिशत से अधिक धनराशि प्रदान की गई है.

केरल स्टार्टअप मिशन और इसके कई सेक्टर-विशिष्ट साझेदार संगठनों के बैनर के तहत, वर्तमान में 1,500 से अधिक पंजीकृत स्टार्ट-अप, 400,000 से अधिक वर्ग फुट ऊष्मायन स्थान, 30 से अधिक इनक्यूबेटर और 200 से अधिक नवाचार कोशिकाओं - समान रूप से वितरित किए गए हैं.

First published: 17 November 2018, 14:17 IST
 
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