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इन जनधन खातों की चल रही है जांच, नोटबंदी के बाद जमा हुए थे करोड़ों

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2018, 13:32 IST

नवंबर 2016 में लागू हुई नोटबंदी के बाद सरकार संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मामलों में लगभग 3 करोड़ 70 लाख (37 मिलियन) जन-धन खातों में जमा 60% से अधिक की जांच कर रही है. वित्त सचिव हसमुख अधिया ने ने बताया कि केंद्रीय कर बोर्ड को विभिन्न बैंकों की 187 शाखाओं से 30 रिपोर्ट मिली हैं. उन्होंने कहा ''हालांकि प्रथम दृष्टिया इन डिपॉजिट्स को अवैध नहीं कहा जा सकता है, इस मामले में सीबीडीटी द्वारा आवश्यक जांच के लिए सूचना प्राप्त की गई है."

जांचकर्ता अब इन खातों में पैसे जमा करने वालों और खाताधारकों के नामों का मिलान कर रहे रहे. वित्त सचिव ने कहा, "जिन मामलों में जमा प्रोफाइल से मेल नहीं खाता है, उसकी आवश्यक जांच की जाएगी. इस मामले में जमाकर्ता की प्रतिक्रिया ली जाएगी और एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर मूल्यांकन को अंतिम रूप दिया जायेगा."

 

ऐसे मामलों में जांचकर्ताओं के निष्कर्षों को मान्य करने के बाद ही जमा को अवैध माना जा सकता है. उन्होंने कहा कि इन बैंक खातों को उचित प्रक्रिया के बिना जमे हुए नहीं किया जा सकता है. प्रधानमंत्री जन धन योजना को अगस्त 2014 में बैंकिंग प्रवेश बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गया था. इस योजना के तहत बैंक खाते खोलने वाले ग्राहकों को न्यूनतम शेषराशि बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है और ऐसे खातों में पैसे जमा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

9 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के एक दिन बाद जन-धन खातों में 45,600 करोड़ रुपये थे. एक सप्ताह के भीतर इनमे जमा राशि 41% बढ़कर 64,200 करोड़ रुपये हो गई थी. 7 दिसंबर तक इन खातों के 74,600 करोड़ रुपये थे. जो नोटबंदी के दिन से 63% की वृद्धि दर्शाता है.

हालांकि जमाकर्ताओं ने दिसंबर 2016 के पहले सप्ताह से अपने खातों से पैसे निकालने शुरू कर दिए. मार्च 2017 के अंत तक इनमे जमा राशि 63,000 करोड़ रुपये हो गई. भारतीय रिजर्व बैंक ने 29 नवंबर 2016 को जन-धन बैंक खातों से मासिक निकासी पर 10,000 रुपये की सीमा तय की थी.

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First published: 5 September 2018, 13:19 IST
 
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