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भारत में जल्द होने वाली है 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी लेकिन मुश्किल क्या है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 June 2018, 14:35 IST

दूरसंचार उद्योग निकाय सीओएआई ने कहा है कि 5जी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी केवल 2019 के दूसरे छमाही के आसपास होगी. हालांकि टेलीकॉम सेक्टर के लगातार बढ़ते घाटे की वजह से कंपनियां किस स्तर पर स्पेक्ट्रम प्रक्रिया में शामिल होगी यह देखने वाली बात होगी.

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पैनल ने लगभग एक दर्जन बैंड में लगभग 6,000 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की सिफारिश की है. दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने पहले कहा था कि भारत 5जी प्रौद्योगिकी को अपनाने में अग्रणी बनना चाहता है और इस साल इसके लिए रोडमैप तैयार करेगा. 

सरकार ने 5वीं पीढ़ी के वायरलेस सिस्टम में अग्रणी होने में मदद करने के लिए उद्योग, अकादमिक और स्टार्टअप को भी बुलाया है जो उच्च स्पीड मोबाइल ब्रॉडबैंड को सक्षम बनाएगा. मैथ्यूज ने कहा कि नीलामी का मूल्यांकन करते समय उद्योग 5जी और सरकारी नीतियों के लिए उभरते उपयोग के मामलों पर नज़र डालेगा.

5जी पर सरकार की राष्ट्रीय नीति भी निर्भर है. इसमें ई-स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स, ई-गवर्नेंस, ई-शिक्षा शामिल है. अगर भारत ने 5जी सेवा आसानी से शुरू होती है तो सरकार को इन योजनाओं को लागू करने में आसानी होगी.

टेलीकॉम सेक्टर में जियो की एंट्री के बाद कई कंपनियों को अपना कारोबार बंद करना पड़ा है. छोटी कंपनियां या तो दिवालिया हो गई या उन्हें बड़ी कंपनियों के साथ मर्जर करना पड़ रहा है. जानकारों की माने तो इस बार स्पेक्ट्रम की नीलामी में मुकेश अंबानी की जियो, एयरटेल और वोडाफोन हिस्सा लेगी लेकिन वह स्पेक्ट्रम खरीदने में कैसे अपने हाथ खोल पायेगी यह देखने वाली बात होगी.

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First published: 22 June 2018, 14:21 IST
 
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