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Exclusive: अच्छे दिन आनंदीबेन के बेटे के, घाटे में पड़ी कंपनी के शेयरों में 850% की उछाल

अतुल चौरसिया | Updated on: 8 February 2016, 12:51 IST
QUICK PILL
  • साल 2014 के बाद अनार इंडस्ट्रीज़ के शेयरों की कीमतें अचानक से बढ़नी शुरू हुई हैं. जबकि साल दर साल सालाना रिपोर्ट बताती है कि यह कंपनी घाटे में है.
  • इस कंपनी के मालिक गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के बेटे श्वेतांक पटेल और बहू हिना एस पटेल हैं. कंपनी के शेयरों में तेजी आनंदीबेन के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद आनी शुरू हुईं.

कुछ ही दिन पहले मीडिया में इस तरह की खबरें आई थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की मुख्यमंत्री अनंदीबेन पटेल को अपने बच्चों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर लगाम कसने की हिदायत दी है. खबर प्रधानमंत्री के एक नजदीकी सूत्र के हवाले से छपी थी. आनंदी बेन पटेल के दो बच्चे हैं. पुत्र श्वेतांक पटेल और पुत्री अनार पटेल, दोनों का अपना व्यापार है.

श्वेतांक पटेल की कंपनी अनार इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड इन दिनों निवेशकों की सबसे पसंदीदा कंपनी बनी हुई है. बीते एक साल के दौरान स्टॉक मार्केट में भयंकर उतार चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन अनार इंडस्ट्रीज़ इस उठापटक से पूरी तरह महफूज नजर आई. कंपनी के शेयर की कीमतों में जुलाई 2014 के बाद से अब तक करीब 850% का उछाल आया है.

25 जुलाई, 2014 को कंपनी के शेयरों की कीमत 7.63 रुपए थी. जो आज (05-02-2016) 44.85 रुपए है. कंपनी के शेयर अधिकतम 60.45 रुपए की सीमा तक जा चुके हैं. लेकिन यहां एख सवाल पैदा होता है, क्या यह उछाल सामान्य है? इस बढ़ोत्तरी से कंपनी का कामकाज, उसका इतिहास और उसकी वित्तीय सेहत मेल नहीं खाते.

25 जुलाई, 2014 को कंपनी के शेयरों की कीमत 7.63 रुपए थी. जो आज (05/02/2016) 44.85 रुपए है


इस असाधारण उछाल को समझने के लिए अनार इंडस्ट्रीज़ के इतिहास, उसके कारोबार और प्रदर्शन को समझना जरूरी है. कंपनी की स्थापना 1992 में हुई थी. एक मार्च 2011 को गुजरात की मुख्यमंत्री आनंनदीबेन पटेल के पुत्र श्वेतांक को कंपनी का एमडी नियुक्त किया गया. कंपनी की सालाना रिपोर्ट बताती है कि यह कंपनी लगातार घाटे मेंं चल रही थी. पिछले वित्तीय वर्ष (2014-15) में कंपनी का कुल घाटा 70.61 लाख रुपए था.

यह जानना और भी दिलचस्प है कि इस साल कंपनी का घाटा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब पांच गुना बढ़ गया था इसके बावजूद कंपनी के शेयर लगातार ऊपर चढ़ रहे थे.

इससे पहले 2013-14 वित्तीय वर्ष में घाटा 18.41 लाख था. इस साल की रिपोर्ट में कंपनी ने स्पष्ट कहा है कि घाटे के कारण वह कोई डिविडेंट देने की स्थिति में नहीं है. हालांकि वो आने वाले साल में अपने कार्यक्षेत्र को बढ़ाएगी क्योंकि उसे अच्छा निवेश मिलने की संभावना है.

12-13 में भी कंपनी को 13.65 लाख रुपए का कुल घाटा हुआ था. साल दर साल कंपनी की सालाना रिपोर्ट यही कहानी कहती है.

कंपनी का मुख्य कामकाज सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, इंटरनेट सर्विस आदि बताया गया है. 2012 की सालाना रिपोर्ट में पहली बार कंपनी ने बताया कि वह कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करेगी. उसके बाद से कंपनी रियल इस्टेट, कंस्ट्रक्शन आदि के धंधे में भी उतर गई. ये सारी बातें कंपनी की सालाना रिपोर्ट में दर्ज हैं, लेकिन वास्तव में कंपनी का कोई प्रोजेक्ट या कामकाज जमीन पर अब तक देखने में नहीं आया है.

जिस कंपनी का घाटा बीते वित्त वर्ष की तुलना में चार गुना बढ़ गया हो उसके शेयर लगातार ऊपर चढ़ रहे थे


एआईएल की एनुअल रिपोर्ट से एक अंदाजा लग जाता है कि इसकी आर्थिक सेहत बेहद डावांडोल थी. कंपनी लगातार घाटे में थी लेकिन बीते तीन सालों के दौरान कंपनी के इंवेस्टर को करीब 163% का रिटर्न मिला है. क्या यह संभव है कि जो कंपनी लगातार घाटे में थी उसके इंवेस्टर को इतना मोटा रिटर्न मिल सके.

इक्विटी मार्केट के एक विशेषज्ञ अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताते हैं, 'अक्सर कुछ कंपनियों के फंडामेंटल मजबूत नहीं होने के बावजूद उनके स्टॉक्स में उछाल आता है, ऐसा राजनीतिक संपर्कों के कारण होता है.' अपनी बात के समर्थन में वे एक घटना का जिक्र करते हैं, 'नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बढ़ने के साथ ही अदानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भी उछाल आने लगा. जबकि इस दौरान अदानी ग्रुप की कंपनियों के फंडामेंटल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया था.'

अधिकारी ने बताया, 'अमूमन बाजार के भीतर लोगों के कंपनियों के मालिकों के राजनीतिक संबंधों के बारे में पता होता है और वह इसका फायदा उठाते हैं. एआईएल के बारे में भी इस बात की प्रबल संभावना है कि आनंदीबेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके बेटे की कंपनी के बिजनेस मॉडल में भले ही कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है फिर भी मार्केट के सूत्र इस आधार पर काम करने लगते हैं कि आगे इस कंपनी का भविष्य अच्छा होगा. यह फंडामेंटल पर न होकर सेंटीमेंट्स पर आधारित ग्रोथ हो सकता है.'

एक अन्य निवेश एक्सपर्ट अभिषेक कहते हैं, 'ऐसी कंपनियों ने निवेश हमेशा खतरे से भरा होता है. मजबूत कंपनियों की शेयरों की कीमतें एक तय गति से बढ़ती है. जिन कंपनियों के फंडामेंटल्स मजबूत होते हैं उनमें एक सतत ग्रोथ होती है. साल भर के भीतर किसी कंपनी के शेयर सात रुपए से 60 रुपए होना संभव नहीं है जब तक कि उसके पीछे कुछ बनावटी ताकतें काम न करें. कई बार सटोरियों की मोनोपोली से इस तरह का तेज बढ़ाव देखने को मिलता है लेकिन न तो यह बढ़ाव स्थायी होता है न इसमें निवेश करना सुरक्षित होता है.'

'साल भर में किसी कंपनी के शेयर सात रुपए से 60 रुपए होना असंभव है जब तक कि उसके पीछे कुछ बनावटी ताकतें काम न करें'


कंपनी की गतिविधियां इसलिए भी संदेहास्पद लगती हैं क्योंकि जिन तीन सालों के दौरान इसने अपने इंवेस्टर को 163% की दर से रिटर्न दिया है उस दौरान इसी सेक्टर में काम करने वाली कुछ अन्य कंपनियोंं के एनुअल आंकड़े लगातार निगेटिव रिटर्न दे रहे थे. मसलन, इसी क्षेत्र में काम करने वाली सैट (एसएटी) इंडस्ट्रीज़ का तीन सालों का रिटर्न -10.90% रहा. इसी तरह नवकेतन मर्चेंट का रिटर्न 0% रहा. एंपॉवर इंडिया ने 3.13% का रिटर्न दिया. सन एंड शाइन इंडस्ट्रीज़ का रिटर्न भी 0% रहा.

बीते एक महीने में अनार इंडस्ट्रीज़ का रिटर्न 23% रहा जबकि सन एंड शाइन का रिटर्न -14% रहा. इससे हमें मोटी-मोटा एक अंदाजा मिलता है कि जिस क्षेत्र में अनार इंडस्ट्रीज़ का कामकाज है वह लगातार बुरे दौर से गुजर रहा है. तो फिर एआईएल इतना मोटा रिटर्न कैसे दे रही है?

कंपनी का मालिकाना हक श्वेतांक पटेल और हिना एस पटेल (श्वेतांक की पत्नी) के पास है. इसके अलावा कंपनी में दो और निदेशक हैं. दिलचस्प तथ्य है कि जुलाई, 2014 से एआईएल के शेयरों की कीमतें चढ़ने की शुरुआत हुई और उसके सिर्फ दो महीने पहले ही मई, 2014 में आनंदीबेन पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री बनीं थी.

2014-15 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के चार प्रमोटर्स के पास 74.98% शेयर हैं. संख्या में बात करें तो यह 4,749,589 शेयर है. इसमें से भी सर्वाधिक 2,735,369 शेयर श्वेतांक के पास हैं यानि 50% से ज्यादा. करीब 23 फीसदी शेयर निजी निवेशकों के पास हैं.

एआईएल की एनुअल रिपोर्ट से एक अंदाजा लग जाता है कि इसकी आर्थिक सेहत बेहद डावांडोल थी

सिर्फ 0.01 यानि 1350 शेयर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के पास हैं. मार्केट विशेषज्ञ बताते हैं, 'यह किसी कंपनी की अच्छी सेहत की निशानी नहीं है. जिस कंपनी में फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन की हिस्सेदारी जितनी कम होगी उस कंपनी की संभावनाएं और भविष्य उतना ही खराब माना जाता है. जाहिर है कि इस कंपनी में फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन ने भरोसा नहीं दिखाया उसके बाद भी कंपनी के शेयर लगातार चढ़ते रहे.'

2015 में एक एनआरआई रोशन शाह ने सेबी में अनार के रिटेल वेंचर से जुड़ी एक शिकायत दर्ज करवाई थी. यह भी एआईएल की दशा के बारे में हमें एक संकेत देता है. शिकायतकर्ता ने कहा था कि 20 साल पुरानी इस कंपनी का कहीं कोई वास्तविक ढांचा नहीं हैं, यह सिर्फ एक घर से संचालित हो रही है जो कि मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल का पैत्रिक आवास है. इसके बावजूद इसमें लोग पैसा क्यों लगा रहे हैं. इसके जवाब में श्वेतांक पटेल ने सेबी को बताया कि शिकायतकर्ता खुद वित्तीय घोटाले का आरोपी है. पर क्या इस जवाब से एआईएल की जवाबदेही खत्म होती है.

कंपनी के चार प्रमोटर्स के पास 74.98% शेयर हैं. इसमें 50% से ज्यादा शेयर श्वेतांक के पास हैं


एआईएल की वेबसाइट कहती है- 'उसका कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर औऱ प्रबंधन के क्षेत्र में कामकाज है.' इसके अलावा आनंदीबेन पटेल की 44 वर्षीय बेटी अनार पटेल भी अनार प्रोजेक्ट्स लिमिटेड नाम की कंपनी संचालित करती हैं. इसका कामकाज भी रियल इस्टेट है. स्थानीय रियल इस्टेट बाजार में दोनों की काफी दखल है. शायद इसी तरफ प्रधानममंत्री का इशारा था.

खुद आनंदीबेन के पास राजस्व और शहरी विकास जैसे दोनों महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं जिनका सीधा संबंध इन कंपनियों से जुड़ता है. ये स्थितियां मिलकर आनंदीबेन की स्थिति को संदेहास्पद बनाती हैं. जानकारों के मुताबिक पटेल परिवार का अहमदाबाद के रियल इस्टेट में बड़ी दखल है.

इस संबंध श्वेतांक पटेल और हिना पटेल से संपर्क करने की कोशिशें सफल नहीं हुई. दोनों के मोबाइल फोन पर कोई उत्तर नहीं मिला. श्वेतांक पटेल के व्यक्तिगत मेल आईडी पर भी इससे जुड़े प्रश्न भेजे गए हैं लेकिन उनके उत्तर अभी तक नहीं मिले हैं.

First published: 8 February 2016, 12:51 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

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