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2019 में गन्ने की मार से बचने के लिए केंद्र तैयार कर रही है 8,000 करोड़ का पैकेज

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 June 2018, 12:06 IST

बीते दिनों यूपी के कैराना से लोकसभा उप चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. इस चुनाव में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान बड़ा मुद्दा बना था. आगामी लोकसभा चुनावों में कम समय बचा है और ऐसे में केंद्र सरकार के सामने गन्ना किसानों का बकाया बड़ी चुनौती है.

ख़बरों की मानें तो गन्ना किसानों के लिए केंद्र सरकार जल्द 8,000 करोड़ के पैकेज की घोषणा करने जा रही है. जिसमें बफर स्टॉक का निर्माण, इथेनॉल उत्पादन क्षमता का विस्तार और चीनी के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करना शामिल है.

इस पैकेज से गन्ना किसानों का 2017-18 सीजन में उत्पादन के बाद बकाया 20,000 करोड़ चुकाया जायेगा. जबकि गन्ने का 30 लाख टन का बफर स्टॉक बनाया जाएगा. बफर स्टॉक की स्थापना के लिए 1,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके अलावा पैकेज में इथेनॉल क्षमता बढ़ाने के लिए 44,400 करोड़ रुपये की योजना भी शामिल होगी.

2017-18 में भारत का चीनी उत्पादन 31.5 मिलियन टन था जो अब तक का सबसे ज्यादा है. भारत, ब्राजील के बाद चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जहां लगभग 50 मिलियन गन्ना किसान हैं. इनमें ज्यादातर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हैं.

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चीनी उद्योगों इस्मा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि किसानों के गन्ने का बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपये हो गई है. इस्मा ने एक बयान में कहा कि चीनी मिलों की तरलता (नकदी) की स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार को 20 प्रतिशत के निर्यात शुल्क को समाप्त करना चाहिए तथा 20 लाख टन का तत्काल निर्यात करने की अनुमति देनी चाहिए. आंकड़ों के अनुसार, चीनी मिलों ने 2017-18 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) में 15 मार्च तक 2.58 करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया जबकि लक्ष्य 2.95 करोड़ टन था.

First published: 5 June 2018, 12:06 IST
 
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