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नोटबंदी के बाद का हाल: जाली नोट बढे 79 %, संदिग्ध लेन-देन में 480 % का इजाफा

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2018, 14:01 IST

नोटबंदी लागू करते वक़्त 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री ने 500 और 1,000 नोटों को अवैध घोषित करते हुए कहा कि यह फेक करेंसी (FICN) के खिलाफ एक बड़ा कदम है, जबकि वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) का कहना है कि वित्तीय संस्थानों में साल 2016-17 में जाली नोट पाए जाने के मामले भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं.

आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 के दौरान जाली नोटों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 79 फीसदी का इजाफा हुआ है. 2015-16 में जाली मुद्रा रिपोर्ट (सीसीआर) की संख्या 4.10 लाख थी.  2016-17 में यह 3.22 लाख की बढ़ोतरी के साथ 7.33 लाख पर पहुंच गई.

 

बीते दिनों सामने आये मामले
नोटबंदी के बाद बड़ी मात्रा में फेक करेंसी जब्त हुई है. इससे पहले हैदराबाद के विज़ग में डीआरआई ने एक यात्रियों से 2000 के नकली नोट 510 पीस बरामद किये थे. पूछताछ में यात्रियों ने कहा कि ये नकली नोट बांग्लादेश से लाये जा रहे थे.

अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो नोटबंदी के एक साल बाद फेक करेंसी जब्ती के मामले में गुजरात सबसे ऊपर है. राज्य में जनवरी 2017 से फरवरी 2018 तक कुल मिलाकर 2.31 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं, जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा 6.77 करोड़ का है.

संदिग्ध लेनदेन भी बढ़ा

संदिग्ध लेनदेन में भी 480 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी और निजी बैंकों 400 फीसदी से अधिक संदिग्ध लेनदेन के मामले पकडे गए हैं. वर्ष 2016-17 में कुल मिलाकर 4.73 लाख से भी अधिक संदिग्ध लेनदेन के बारे में बैंकों द्वारा एफआईयू को सूचित किया गया.

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First published: 21 April 2018, 14:01 IST
 
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