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अडानी-एस्सार के हाथ खड़े करने के बाद गुजरात पवन ऊर्जा के पंखों के सहारे

सुनील रावत | Updated on: 4 June 2018, 14:24 IST

जब अडानी और एस्सार ने गुजरात में लगभग 3,000 मेगावाट बिजली आपूर्ति करने में हाथ खड़े कर दिए हैं ऐसे में राज्य को पवन ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से बड़ी राहत मिली है. एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार और उद्योग सूत्रों का कहना है कि गुजरात में पवन ऊर्जा उत्पादन लगभग 2,800 मेगावॉट अब तक के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.

अदानी और एस्सार द्वारा गुजरात राज्य उर्जा विकास निगम (जीयूवीएन) को बिजली वितरण आपूर्ति में कटौती करने के बीच यह ऊर्जा उपलब्ध हुई है. राज्य के तीन स्वतंत्र बिजली उत्पादक (आईपीपी) संघर्ष कर रहे हैं, केवल टाटा का सीजीपीएल जीयूवीएनएल को आपूर्ति फिर से शुरू करने में सक्षम है. जिससे बिजली उत्पादन समझौते (पीपीए) में अदानी और एस्सार लगभग संयुक्त 3,000 मेगावाट की आपूर्ति कर रहे हैं.

उद्योग सूत्रों का कहना है कि गुजरात आईईएक्स और अन्य स्रोतों से 2,500-2,800 मेगावॉट का वितरण कर रहा है.
सरकार ने गुजरात में बिजली कटौती से बचने के लिए जीयूवीएन को किसी भी कीमत पर और कहीं से भी बिजली खरीदने का निर्देश दिया है.

जीयूवीएन का कहना है कि पीपीए प्रतिबद्धता को पूरा नहीं करने के लिए वह आईपीपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले सितंबर तक इंतजार कर रहा है. गौरतलब है कि जीयूवीएनएल का अदानी पावर से 2,000 मेगावाट की बिजली, एस्सार पावर से 1,000 मेगावाट और टाटा पावर के साथ 1,805 मेगावाट का समझौता किया था.

गुजरात में बिजली सप्लाई करने वाली अडानी पावर ने साल 2006 में अडानी की कंपनी ने गुजरात सरकार से एक समझौता किया था जिसमें कहा गया था कि वह 1000 मेगावाट बिजली 2.35 प्रति यूनिट के हिसाब से सप्लाई करेंगे.

जिसके बाद अडानी पॉवर ने बिजली की कीमत बढ़ाने की मांग की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अडानी की कंपनी को बिजली की दरें बढ़ाने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमिशन और अपेलैट ट्रिब्यूनल को इलेक्ट्रिसिटी ऑर्डर को रद्द कर दिया जिसमें दरें बढ़ाने को मंजूरी दी गई थी.

अडानी पावर का कहना था कि इंडोनेशिया में क़ानूनी बदलाव से इम्पोर्टेड कोयले की क़ीमत बढ़ गई है जिससे कंपनी को घाटा हो रहा है. अदानी पॉवर ने वित्त वर्ष 2013-16 के लिए 3000 करोड़ रुपये के राहत की मांग की थी.

इससे पहले गुजरात में कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने चार प्राइवेट कंपनियों पर जनता का पैसा लुटाकर कांग्रेस ने मालामाल कर दिया. आरोप था कि उसने बाजार से कई गुना अधिक 24.67 रुपये पर यूनिट की दर से बिजली खरीदकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया.

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First published: 4 June 2018, 14:20 IST
 
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