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14,200 करोड़ रुपये के टैक्स नोटिस से तिलमिलाई वोडाफोन

अभिषेक पराशर | Updated on: 26 February 2016, 15:20 IST
QUICK PILL
  • इनकम टैक्स की तरफ से 14,200 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का नोटिस मिलने के बाद वोडाफोन गुस्से में है. नोटिस में कहा गया है कि अगर कंपनी टैक्स का भुगतान नहीं करती है तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी.
  • वोडाफोन टैक्स विवाद 2007 का मामला है. 2007 में जब वोडाफोन ने हचिंसन का अधिग्रहण किया था तब उसे टैक्स भरने को कहा गया था.
  • वोडाफोन ने एक सौदे के तहत हचिसन एस्सार की 67 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था. हचिंसन एस्सार भारत में काम करने वाली मोबाइल कंपनी थी और वोडाफोन ने इस अधिग्रहण के लिए 11.5 अरब डॉलर का भुगतान किया था.

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन को बड़ा झटका देते हुए इनकम टैक्स विभाग ने टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन को 14,200 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस भेजा है. इनकम टैक्स विभाग ने कहा है कि अगर कंपनी टैक्स का भुगतान नहीं करती है तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी. 

इनकम टैक्स (आईटी) विभाग के नोटिस से तिलमिलाई कंपनी ने मोदी सरकार की नीति पर सवाल करते हुए कहा, 'यह सरकार और टैक्स डिपार्टमेट के बीच तालमेल के अभाव को जाहिर करता है.' कंपनी ने कहा कि मोदी सरकार ने वादा किया था कि वह विदेशी निवेशकों के लिए बेहतर माहौल बनाएगी ताकि वह टैक्स के झमेले से मुक्त होकर भारत में निवेश कर सकें. 

कंपनी ने कहा कि उसे ऐसे वक्त में नोटिस भेजा गया है जब यह मामला पहले से ही अंतरराष्ट्रीय अदालत में लंबित है. वोडाफोन ने कहा कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री मोदी विदेशी कंपनियों को बिना डरे भारत में निवेश करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ ऐसे नोटिस जारी किए जा रहे हैं. वोडाफोन भारत में निवेश करने वाली टॉप कंपनियों में से एक है. 

भारतीय टेलीकॉम मार्केट में वोडाफोन भारती एयरटेल के बाद दूसरी बड़ी कंपनी है जिसके उपभोक्ताओं की संख्या 18.38 लाख है. कंपनी तेजी से भारतीय बाजार में अब 4जी सर्विसेज मुहैया कराने में जुटी है.

क्या है मामला?

वोडाफोन टैक्स विवाद 2007 का मामला है. 2007 में जब वोडाफोन ने हचिसन का अधिग्रहण किया था तब उसे टैक्स भरने को कहा गया था. वोडाफोन ने एक सौदे के तहत हचिंसन एस्सार की 67 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था. 

हचिंसन एस्सार भारत में काम करने वाली मोबाइल कंपनी थी और वोडाफोन ने इस अधिग्रहण के लिए 11.5 अरब डॉलर का भुगतान किया था. 

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पूंजीगत लाभ को आधार बनाते हुए कंपनी से टैक्स भरने की मांग की थी जिसे कंपनी ने चुकाने से मना कर दिया

इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक कंपनी पर इस अधिग्रहण की वजह से 2.2 अरब टैक्स की देनदारी बनती है. हालांकि कंपनी ने यह कहते हुए भारत सरकार को टैक्स देने से मना कर दिया उसका अधिग्रहण टैक्स के दायरे में ही नहीं आता है क्योंकि इस मामले में पूरा वित्तीय लेन-देन भारत में हुआ ही नहीं. जबकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना था कि वोडाफोन ने वैसी संपत्ति का अधिग्रहण किया जो भारत में मौजूद थी. 

सरकार बनाम वोडाफोन

2007 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से पहला नोटिस भेजे जाने के बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया. लंबी सुनवाई के बाद जनवरी 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन को राहत देते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया. 

कोर्ट ने कहा कि वोडाफोन पूंजीगत लाभ के बदले कर देने को बाध्य नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि वोडाफोन पहले ही 2,500 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है और सरकार को यह रकम उसे ब्याज के साथ लौटाना चाहिए.

वोडाफोन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने संसद में कानून लाकर पलट दिया था

हालांकि कोर्ट के फैसले के साथ यह विवाद खत्म होने की बजाए और अधिक जटिल हो गया. जब सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया तब प्रणव मुखर्जी देश के वित्त मंत्री थे.

मुखर्जी को यह फैसला नागवार गुजरा और उन्होंने 2012-13 के बजट में इनकम टैक्स कानून 1961 को पिछली तारीख से (रेट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंट) का प्रस्ताव रखा ताकि घरेलू परिसंपत्तियों वाले मामलों में विदेश में विलय एवं अधिग्रहण के सौदों को टैक्स के दायरे में लाया जा सके. 

मुखर्जी के इस फैसले की जबर्दस्त आलोचना हुई थी और वोडाफोन के सीईओ कोलाओ ने बजट से पहले इस मामले में मुखर्जी से मिलकर कंपनी का पक्ष भी रखा. 

इनकम टैक्स कानून में रेट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंट की आशंका से डरी कंपनी ने इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय पंचाट में घसीटने की धमकी दी थी. हालांकि सरकार ने 2012-13 के बजट में इनकम टैक्स में रेट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंट कर दिया. 

सरकार के फैसले का बचाव करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था, 'भारत टैक्स फ्री देश नहीं है. यहां टैक्स की एक दर है. अगर हमारा आपके देश के साथ दोहरा कराधान एग्रीमेंट है और अगर आप अपने देश में टैक्स का भुगतान करते हैं तो यहां आपको टैक्स देने की जरूरत नहीं है.'

लोकसभा में दिए गए बयान में मुखर्जी ने कहा था, 'हम वोडाफोन के मामले में स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं. यह कोई बदले की भावना से किया गया काम नहीं है.'  

इंडस्ट्री ने तब मुखर्जी के इस फैसले की जबरदस्त आलोचना की थी. उनका कहना था कि इस तरह के फैसलों से विदेशी निवेशकों में गलत संदेश जाएगा और वह भारत में निवेश करने से कतराएंगे. तब से वोडाफोन कर विवाद सरकार और कंपनी के बीच टकराव का मुद्दा बना हुआ है.

विदेशी निवेश पर खतरा?

2016 में एक बार फिर से टैक्स नोटिस भेजे जाने पर वोडाफोन ने इशारों में यह कहने की कोशिश की है कि सरकार का यह फैसला विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने के फैसले के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर सकता है.

वोडाफोन भारत में लिस्टेड नहीं है. वोडाफोन ब्रिटेन की कंपनी है और यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में वोडाफोन पीएलसी के नाम से लिस्टेड है. 16 फरवरी को कंपनी का शेयर 0.74 पर्सेंट की मजबूती के साथ 1.55 पॉन्ड चढ़कर 211 पॉन्ड पर बंद हुआ.

First published: 26 February 2016, 15:20 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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