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RO का पानी नहीं तो पीएम मोदी के बुलेट ट्रेन का सपना भी अधूरा, जानिए कैसे !

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 February 2018, 17:31 IST

पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन के मामले में एक नया मोड आ गया है. जिसके चलते ये प्रोजेक्ट कुछ दिन देरी से शुरु हो सकता है. दरअसल, बुलेट ट्रेन के कॉरिडोर पर काम कर रही जापानी टीम के सिविल इंजीनियर्स ने निर्माण के दौरान खारे या नमक वाले पानी का इस्तेमाल करने के लिए मना कर दिया है. उन्होंने पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए आरओ के पानी का इस्तेमाल करने की बात कही है. जिसके चलते ये प्रोजेक्ट अब सितंबर से पहले नहीं शुरू हो पाएगा.

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बता दें कि पीएम मोदी ने पिछले साल सितंबर में अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था. फिलहाल कॉरिडोर की डिजाइनिंग और मुंबई में समुद्र के नीचे हुए गन शूटिंग प्रॉसेस के डेटा का जापान में आकलन किया जा रहा है. साथ ही आरओ प्लांट लगाने के स्थान के बार में बातचीत हो रही है.

काम में नहीं बरती जाएगी कोई लापरवाही
कॉरिडोर का काम देख रहे नैशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण में एक बड़ी दिक्कत पानी की आ रही है. साथ काम कर रही जापानी टीम का मानना है कि चूंकि ट्रेन काफी तेज रफ्तार से दौड़ेगी, ऐसे में कंस्ट्रक्शन में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जा सकती. टीम मानती है कि कॉरिडोर के निर्माण के लिए साधारण पानी से काम नहीं चल पाएगा.

क्यों इस्तेमाल किया जाएगा आरओ का पानी

सिविल इंजीनियरों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर खारा होता है या नमक अधिक होता है, वहां आरओ प्लांट लगाकर उसके जरिए आने वाले पानी का उपयोग ही कंक्रीट तैयार करने के लिए किया जाता है. अगर खारा या नमक वाला पानी इस्तेमाल किया जाएगा, तो उससे कंक्रीट में मजबूती नहीं आ पाती. उसकी लाइफ भी कम हो जाती है. बुलेट ट्रेन के सिविल स्ट्रक्चर पर कोई बुरा असर न पड़े, इसलिए आरओ जरूरी है. दिल्ली में भी मेट्रो रूट कंस्ट्रक्शन के लिए कई बार आरओ प्लांट के पानी का इस्तेमाल किया गया.

First published: 25 February 2018, 17:25 IST
 
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