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जीएसटी: सारा देश एक तरफ, तमिलनाडु दूसरी तरफ

आकाश बिष्ट | Updated on: 15 June 2016, 19:10 IST
(कैच न्यूज़)

कोलकाता में राज्य वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में भाग लेने आए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बैठक में शामिल सभी राज्य प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का समर्थन करने को राजी हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने कुछ आपत्तियां उठाई हैं, उसे छोड़कर, अन्य राज्यों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि वे 25 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में जीएसटी बिल पर सत्तारूढ़ दल का साथ देंगे.

उनकी यह घोषणा कांग्रेस के लिए झटके से कम नहीं है. कांग्रेस यह जानते हुए भी भाजपा की जीएसटी लागू करने की कोशिश का शुरू से विरोध करती आ रही है कि जीएसटी लागू होने के बाद सुधारों की पूरी एक श्रृंखला शुरू हो सकती है जो अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में सहायक होगी.

जेटली मंगलवार को कोलकाता में थे. वे यहां जीएसटी कानून पर मंथन के लिए शुरू हुई राज्य वित्त मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने आए थे ताकि जीएसटी पर सभी राज्यों के साथ मतभेदों को सुलझाया जा सके.

कांग्रेस की आपत्तियां

सरकार औपचारिक रूप से एक अप्रैल 2017 तक राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी लागू करने की योजना बना रही है और इंतजार कर रही है कि कब राज्यसभा से जीएसटी पास हो और वह इससे संबंधित विधेयक को संसद में पास करे.

हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन कांग्रेस की उन तीन मांगों के खिलाफ है, जिनके अनुसार वह अपनी मंजूरी देने से पहले प्रस्तावित विधेयक में तीन परिवर्तन कराना चाहती है. कांग्रेस की मांग है कि जीएसटी की दर 18 फीसदी पर स्थिर कर दी जाए, प्रस्तावित राज्य लेवी को समाप्त कर दिया जाए और राज्यों के बीच राजस्व के बंटवारे पर विवाद को हल करने के लिए एक स्वतंत्र तंत्र गठित किया जाए.

सरकार पिछली दो मांगों को जीएसटी विधेयक में शामिल करने को सहमत हो गई है, लेकिन उसने दृढ़ता से इस जीएसटी की दर 18 प्रतिशत पर स्थिर करने का विरोध किया है. सरकार का तर्क है कि यदि ऐसा किया गया तो जब भी जीएसटी परिषद के सुझाव पर कर में बदलाव करने की जरूरत होगी, तो हर बार संविधान में संशोधन करना होगा, यह "स्वीकार करना मुश्किल है." 

सरकार के दावे का जवाब देते हुए पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि 'जीएसटी में देरी सिर्फ इसलिए हो रही है क्योंकि सरकार अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं है. हमने विधेयक में तीन खामियों की ओर इशारा किया है. मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी वस्तुतः हमें समर्थन किया है."

उन्होंने आगे कहा कि विवाद समाधान तंत्र पर वित्तमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं और सहमत हैं कि 16% या ऐसी ही कोई दर तटस्थ दर के लिए पर्याप्त है. उन्होंने कहा कि "मुझे लगता है कि व्यापारी समुदाय के बीच और लोगों के बीच इसे लेकर व्यापक समर्थन है. ये आलोचनाएं सही हैं और इससे पहले कि आप विधेयक पारित करें इन खामियों को दूर किया जाना चाहिए. मुझे तो बस यह समझ में नहीं आता कि सरकार इतनी जिद क्यों कर रही है और इन तीन आलोचनाओं या खामियों को दूर करने को तैयार क्यों नहीं है." 

राज्यसभा का नंबर गेम

इस बीच, हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनावों के परिणामों से उत्साहित भाजपा आक्रामक तरीके से जीएसटी विधेयक को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है. यह फिलहाल ऊपरी सदन में अटका हुआ है. यह बिल 2016 में लोकसभा में पारित किया गया था, तब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सदन बहिष्कार कर सरकार के लिए इसे लोकसभा में पास करने हेतु दो तिहाई समर्थन पाना आसान कर दिया था.

अपने सहयोगी दलों और क्षेत्रीय संगठनों के समर्थन के भरोसे भाजपा को उम्मीद है कि मानसून सत्र के अंत में इस विवादास्पद कानून पर ऊपरी सदन से मंजूरी की मोहर लग ही जाएगी.

245 सदस्यों वाली राज्यसभा में संप्रग के पास 71 सदस्य हैं तो राजग के पास 74 सदस्यों की ताकत है. वहीं क्षेत्रीय दलों के 89 सदस्य राज्यसभा में हैं. भाजपा द्वारा नामित सात सदस्यों के भी एनडीए के समर्थन में वोट देने की उम्मीद है, जिससे राजग के पक्ष वाले सदस्यों की संख्या 81 हो जाएगी.

लेकिन फिर भी भाजपा को यह महत्वपूर्ण बिल पास कराने के लिए 245 का दो तिहाई यानी 165 सदस्यों का समर्थन चाहिए होगा. इसके लिए उसे क्षेत्रीय दलों के समर्थन की सख्त जरूरत है.

जदयू, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस के साथ अन्य क्षेत्रीय दलों द्वारा समर्थन का वादा करने के बाद कांग्रेस राज्यसभा में अलग-थलग पड़ सकती है. प्रमुख विपक्षी पार्टी के राजग के ऊपर संख्यात्मक लाभ के बावजूद, जीएसटी पर राज्यसभा की स्वीकृति की मुहर लगने की संभावना काफी अधिक है. 

कैसे पास होगी जीएसटी की अड़चन?

अतीत में, भाजपा और उसके सहयोगी बार-बार कांग्रेस पर "अड़चनवादी" होने और राष्ट्रीय हित के ऊपर क्षुद्र राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि यह संप्रग ही थी जिसने जीएसटी की कल्पना की और जब यह विधेयक पारित करने में सहयोग मांगा तब भाजपा से ऐसे ही विरोध का सामना करना पड़ा था.

"वे ऐसा पहली बार नहीं कह रहे हैं. जीएसटी विधेयक की कल्पना कांग्रेस ने की थी. जब जीएसटी पास कराने की बात आई तो वर्तमान प्रधानमंत्री (जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे) अन्य एनडीए नेताओं के साथ इसके कड़े विरोध में थे. वैसे कांग्रेस पार्टी जीएसटी के विरोध में नहीं है, हम वर्तमान जीएसटी विधेयक में कुछ संशोधन चाहते हैं और हम उन संशोधनों के लिए ही जोर दे रहे हैं. और जब भी सरकार हमारे सुझाए संशोधनों के लिए तैयार हो जाएगी, हम खुशी से इसे पारित करेंगे."

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इसका समाधान तो कब का निकल गया होता अगर भाजपा ने अगस्ता वेस्टलैंड सौदे पर "गांधी परिवार पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए होते". कांग्रेस के एक नेता ने कहा "हम संसद को लगातार बाधित करते रहेंगे और सरकार को अपना काम नहीं करने देंगे. चलो देखते हैं वे इसे कैसे पारित करते हैं."

तमिलनाडु की चिंताएं

राजनीतिक मामलों के एक जानकार कहते हैं कि कांग्रेस की योजना को असफल करने के लिए सरकार मत विभाजन का निर्णय ले सकती है, जिसमें हर पार्टी अलग से मतदान कर सकती है. यह अंत में जीएसटी के पारित होने का ही रास्ता होगा.

इस दौरान अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जे जयललिता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए दिल्ली में थीं और सूत्रों का दावा है कि जीएसटी बिल उनकी वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा और उम्मीद है कि सब कुछ अच्छा ही होगा.

जयललिता ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन से भी मुलाकात की. सीतारमन ने कहा है कि उन्होंने तमिलनाडु में परियोजनाओं पर चर्चा की है.

First published: 15 June 2016, 19:10 IST
 
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