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अगर आप भी करते हैं Amazon, Flipkart से शॉपिंग तो हो जाएं सावधान, बढ़ सकती है मुश्किलें !

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2019, 12:48 IST

अगर आप भी अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स से ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो ध्यान दें. सरकार द्वारा हाल ही में फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (FDI) के नियमों में किये गए करने के लिए अभी ये कंपनियां तैयार नहीं है. इसके लिए ये ऑनलाइन मार्केटप्लेस सरकार से गुहार लगा सकती हैं कि नई नियमावली को लागू करने के लिए तय की गई डेडलाइन को आगे बढ़ाया है. जो कि अभी 1 फरवरी है. इसके चलते कंपनियां पहले मार्किट में नई नियमावली के अनुसार ऑपरेशनल लेवल पर कुछ जांच करना चाहती हैं. जानकारों की मानें तो इस प्रक्रिया में ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

इस मामले में सूत्रों के हवाले से एनबीटी में छपी एक खबर के अनुसार ये जानकारी मिली है, ''कंपनियों को ताजा प्रावधानों का विस्तार से अध्ययन करना होगा. उन्हें इनके मुताबिक हो सकता है कि ऑपरेशनल लेवल पर बड़े बदलाव करने पड़ें.'' गौरतलब है कि सरकार द्वारा एफडीआई मके नियमों में बदलाव की 26 दिसंबर को की गई थी. लेकिन एमेजॉन (AMAZON) और फ्लिपकार्ट (FLIPKART) ने अभी तक इस संबंध में ईटी के सवालों के जवाब नहीं दिए हैं.

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नए एफडीआई नियमों के अनुसार, ''मार्केटप्लेस एंटिटी या उसकी ग्रुप कंपनियां इनवेंटरी पर नियंत्रण नहीं रख सकती हैं.''  इन बदलावों के बारे में दोनों कंपनियों का कहना है कई ऐसे में खासतौर से दो क्लॉज ऐसे हैं, जिनमें नए नियमों के अनुसार बड़े बदलाव करने होंगे.

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पहला बड़ा बदलाव यह होगा की अब किसी भी वेंडर में मार्केटप्लेस या उसकी ग्रुप कंपनियों का कोई इक्विटी स्टेक नहीं हो सकता है. वहीं दूसरा क्लॉज यह है कि वेंडर अपनी 25 प्रतिशत से ज्यादा खरीदारी मार्केटप्लेस की होलसेल यूनिट नहीं कर सकता है. ऐसा करने पर ये माना जाएगा कि वेंडर की इनवेंटरी पर उस मार्केटप्लेस का पूरा कंट्रोल है. अभी तक ये दोनों कंपनी ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनवेंटरी पर कंट्रोल रखती हैं.

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 हालांकि सरकार के एफडीआई के नए नियमों को लेकर फ्लिपकार्ट ने ये कहा था कि वह भारत में बनाए गए नए नियमों का पालन करेगी. इस बारे में कंपनी ने कहा, ''हम भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध हैं. विचार-विमर्श के जरिए मार्केट आधारित फ्रेमवर्क बनाना महत्वपूर्ण है. हमें उम्मीद है कि निष्पक्ष और ग्रोथ बढ़ाने वाली ऐसी नीतियों को बढ़ावा देने के लिए हम सरकार के साथ मिलकर काम कर पाएंगे जिनसे यह नया सेक्टर विकास करता रहेगा और भारत एक कॉम्पिटीटिव इकनॉमी बनेगा.''

वहीं अब इस मुद्दे पर दोनों कंपनियां सरकार के पास डेडलाइन बढ़ाने और अपनी कुछ मुद्दों को लेकर गुहार लगा सकती है.

 

First published: 4 January 2019, 12:48 IST
 
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